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19 अक्तूबर, 2020|6:47|IST

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स्वराज के लिए हुंकार भरने फर्रुखाबाद आए थे गांधी जी

स्वराज के लिए हुंकार भरने फर्रुखाबाद आए थे गांधी जी

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का अपने जिले से गहरा नाता रहा है। गोरी हुकूमत के खिलाफ जब भी हुंकार भरी तो फर्रुखाबाद के लोगों का साथ लेना वे नहीं भूले। महात्मा गांधी यहां की सरजमीं पर एक बार नहीं बल्कि दो बार आए। पहली बार जहां उन्होंने इस पावन धरती पर आकर लोगों को स्वराज के लिए झकझोरने का काम किया तो वहीं दूसरी बार छुआछूत निवारण और हरिजन सेवक अखबार का प्रसार करने को यहां पर पहुंचे थे।

महात्मा गांधी जब पहली बार यहां आए थे तो ब्रिटिश हुकूमत हिलकर रह गई थी। टाउनहाल के किले पर थकान के चलते गांधी जी बहुत ही धीमी आवाज में बोल रहे थे। तब उनकी आवाज को शांतिस्वरूप ने दोहराने का काम किया था। गांधी जी 22 सितंबर 1929 में यहां कस्तूरबा गांधी के साथ पहुंचे थे। सेठ गुलामदास ने गांधी जी के आगमन पर 1001 रुपए की थैली भी भेंट की थी। टाउनहाल किले पर स्वराज प्राप्त करने के लिए लोगों को उनमें जोड़ने का काम किया। उनके भाषण के अंश यह थे-स्वराज प्राप्त करने के लिए लगन पैदा करो, स्वदेशी अपनाओ, विदेशी का बहिष्कार करो, शराब मत बिकने दो, विदेशी कपडों की होली जलाओ, अंग्रेजों को लगान मत दो। गांधी जी अपने संबोधन में काफी धीमी आवाज में बोल रहे थे। लोग उनकी बुलंद आवाज को सुनने के लिए उतावले थे। उसी समय यही के शांतिस्वरूप उनके भाषण को तेज आवाज में दोहराने का काम कर रहे थे। उस समय गांधी जी के भाषण को सुनने के लिए लोग घरों से निकलकर हजारों की तादाद में टाउनहाल पर पहुंचे थे। इतिहासकार डॉ.रामकृष्ण राजपूत बताते हैं कि वर्ष 1929 के बाद गांधी जी एक बार फिर 1934 में यहां आए। तब उन्होंने छुआछूत निवारण और हरिजन सेवक अखबार को लेकर यहां प्रचार प्रसार किया था।

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  • Web Title:Gandhi came to Farrukhabad to recite the swaraj