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जिंदगी को पटरी पर लाने को कर रहे उधेड़बुन

हिन्दुस्तान टीम,फर्रुखाबाद कन्नौजNewswrap
Sat, 30 May 2020 11:41 PM
जिंदगी को पटरी पर लाने को कर रहे उधेड़बुन

दिल्ली, मुंबई, नोएडा सरीखे शहरों में सुनहरे सपने लेकर पहुंचे प्रवासियों को अब घर लौटने के बाद दिन काटे नहीं कट रहे हैं। क्योंकि गांव में भले ही अपनी जिंदगी की सलामती को प्रवासी लौट आए। मगर इस पिछड़े जिले में ऐसा उन्हें कोई बेहतर काम नहीं सूझ रहा है जिससे जिदंगी की गाड़ी को पटरी पर लाया जा सके।

एक ही काम मनरेगा का है जिससे भी प्रवासियों की नैया पार होने वाली नहीं है। इसमें भी एक ओर कम मजदूरी और दूसरा नियमित काम न होना भी प्रवासियों को चिंतित कर रहा है। दिल्ली, मुंबई और नोएडा से आए प्रवासी यहां पर मनरेगा के अलावा दूसरा कोई बेहतर कार्य न होने से मायूस हैं। कई प्रवासी इसको लेकर उधेड़बुन कर रहे हैं। क ोई ऐसा यहां पर कार्य मिल जाए जिससे कि बाहर जाने का रास्ता खत्म हो। पिछड़े इस जनपद में ऐसा कोई उद्योग धंधा भी नहीं है जिसके माध्यम से अच्छे भविष्य की कल्पना की जा सके। इतना अवश्य है कि कई प्रवासियों ने परचून दुकानों के अलावा फास्ट फूड के स्टाल खोल रखे हैं। इसके माध्यम से फिलहाल आजीविका चलाने की कोशिश की जा रही है। लाक डाउन का लंबा अर्सा होने के बाद अब बाहर से उनके पास वापसी के लिए कॉल भी पहुंच रही हैं। ऐसे में वे अभी निर्णय कर पाने की स्थिति में नहीं आ रहे हैं। जिले में करीब 55 हजार प्रवासी आ चुके हैं। यह प्रवासी सरकारी आंकड़ों में हैं जबकि इसके विपरीत एक लाख से अधिक प्रवासियों के यहां आने का अनुमान है। यहंा पर सर्वाधिक प्रवासी दिल्ली, मुंबई, नोएडा के अलावा जयपुर, गुजरात से आए हुए हैं। सुदूर आंध्रप्रदेश, तेलंगाना के प्रवासी की संख्या भी ठीक ठाक है। जिला प्रशासन की ओर से यहां मनरेगा के तहत जो काम दिया जा रहा है उसमें अभी जॉब कार्ड धारकों का आंकड़ा कोई ज्यादा नहीं है। जो मजदूर पढ़े लिखे हैं वे दूसरे काम काज को लेकर उधेड़बुन कर रहे हैं। बाहर शहरों में मजदूरी का काम करने वाले प्रवासी जरूर मनरेगा के जॉब कार्ड बनवाने को लगे है। अभी तक जिले में जो नए जॉब कार्ड बने हैं उनकी संख्या यहां आए प्रवासियों के मुकाबले बेहद कम है। मनरेगा जॉब कार्ड को लेकर भले ही जोर लगाया जा रहा है पर इसके बेहतर परिणाम सामने नहीं आ रहे हैं।

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