Dua of goodwill of mutual brotherhood - उर्स में आपसी भाईचारे की सलामती की दुआ DA Image
7 दिसंबर, 2019|3:16|IST

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उर्स में आपसी भाईचारे की सलामती की दुआ

उर्स में आपसी भाईचारे की सलामती की दुआ

शहर के दरगाह हुसैनिया मुजीबिया के 148 सालाना उर्स के समापन पर भारी संख्या में जियारत करने को जायरीन पहुंचे। यहां पर खैर-ओ-बरकत की दुआ की गई। बुधवार को हजरत फरकुंद अली उर्फ फुंदन मिया के कुल शरीफ बाद उर्स का समापन हो गया। शहर में आपसी भाईचारे की सलामती की दुआ की गई।

मोहल्ला सूफी खां स्थित दरगाह में चल रहे सालाना उर्स का समापन हजरत फुंदन मियां के कुल शरीफ के बाद हुआ। मेहमाने खुसूसी मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के सदस्य डाक्टर यासीन अली उस्मानी ने शिरकत की। उन्होंने वतन की सलामती की मन्नत मांगते हुए कहा कि यह देश सूफियों और संतों का है। यहां एकता और भाईचारे के साथ रहने वाले अमन पसंद लोग रहते हैं। दरगाहें हमेशा एकता का पैगाम देती रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उर्स न होते तो दुनिया अपने मोहसिनों को भुला चुकी होती। आपस में भाईचारा बनाए रखें क्योंकि कोई भी दूसरों से लड़ सकता है पर अपनों से नहीं। सियासतदारों को नसीहत देते हुए कहा कि मुल्क को बांटने का काम न करें। कुल शरीफ बाद लंगर हुआ। हिलाल मुजीबी, बिलाल शफीकी, मिन्ना खां आदि मौजूद रहे।

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