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26 नवंबर, 2020|9:58|IST

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चारपाई पर चूल्हा रख पका रहे भोजन

चारपाई पर चूल्हा रख पका रहे भोजन

बाढ़ की विनाशलीला ने पीड़ितों को कहीं का नहीं रखा है। नदियों के कहर ने घर की सारी सुख सुविधाएं छीन ली हैं। बेबस घर की महिलाएं पानी से घिरे आंगन और घर में चारपाई पर चूल्हा रखकर खाना पका रही हैं। घर के आंगन में पानी भरने से रात भर जागते ही बीत रही है। ऐसे में कीड़ों का भी भय ग्रामीणों को सता रहा है।

सब कुछ बर्बाद होने के बाद भी अभी तक जिला प्रशासन की ओर से गांव में पीड़ितों की खबर नहीं ली गई है। जनप्रतिनिधि भी पूरी तौर पर खामोश बने हैं। तराई क्षेत्र के पैलानी दक्षिण में गांव के अंदर तक पानी पहुंच चुका है। यहां का शायद कोई भी घर बचा हो जहां पर पानी न भरा हो। लोग खाने पीने का इंतजाम करने के लिए भी परेशान हो रहे हैं। राशन भी गया है जो कुछ बचा है उससे पेट की आग शांत की जा रही है। इस गांव में कई घरों में महिलाओं ने चारपाई पर चूल्हा रखकर भोजन पकाने का इंतजाम किया है। पानी से किसी प्रकार का खतरा न हो इसके चलते महिलाएं अपने बच्चों केा भी चारपाई पर ही निगरानी में लिटा रही हैं। गांव के अंदर तक कई फिट पानी बह रहा है। इससे आवागमन बाधित है। लोगों के यहां राशन भी खत्म हो रहा है ।ग्रामीणों को इस बात का मलाल है कि उन लोगों की सुनवाई अभी तक किसी अधिकारी ने नहीं की है। राहत के नाम पर कोई भी नहीं आया है। जनप्रतनिधि भी मुंह मोड़े हैं। कमथरी गांव में कई झोपड़ियों में पानी भर गया है। आधा दर्जन झोपडियांं नदी में समा गइंर् हैं। स्थिति यह है कि गाव में बैठने तक की जगह नहंी रह गई है। लोग इधर उधर जा रहे है। चौरा मार्ग पर जलभराव से रास्ता बंद हो चुका है। पीड़ितों का कहना है कि कुदरत उनकी परीक्षा ले रही है इसके पश्चात र्प्रशासन तो कम से कम उन लोगों की बेबसी पर तरस खाए।