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उपभोक्ता अदालत में पांच सालों से अटके हैं 536 केस

उपभोक्ता अदालत में पांच सालों से अटके हैं 536 केस

संक्षेप:

Farrukhabad-kannauj News - फर्रुखाबाद में उपभोक्ता अदालत में न्याय की प्रक्रिया बेहद धीमी है। पिछले पांच वर्षों में 536 मामले लंबित हैं, जबकि केवल 1189 मामलों का ही निस्तारण हो सका है। कई उपभोक्ता वर्षों से न्याय का इंतजार कर रहे हैं, जिससे उनकी उम्मीदें कमजोर हो रही हैं। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अनुसार, मामलों का निपटारा जल्दी होना चाहिए, लेकिन वास्तविकता भिन्न है।

Jan 05, 2026 11:21 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, फर्रुखाबाद कन्नौज
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राजीव सक्सेना फर्रुखाबाद।उपभोक्ता अदालत में ऊपर दिये गये मामले सिर्फ वानगी है। कुछ इसी तरह के सैकड़ों मामले उपभोक्ता अदालत में इंसाफ की सुस्त चाल से लंवित चल रहे हैं। जबकि उपभोक्ता अदालत को आम लोगों के लिए त्वरित और सुगम न्याय का माध्यम भले ही माना जाता है मगर यह भरोसा कमजोर सा पड़ता दिख रहा है। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के आंकड़ों पर ही गौर करेंगे तो हकीकत सामने दिखायी पड़ेगी। पिछले पांच वर्षो में इंसाफ की सुस्त चाल का ही नतीजा हैकि 536 केस उपभोक्ता अदालत में अटके हैं। पांच सालों में 1189 ही केस निपट सके हैं।

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इस तरह से तुलनात्मक दृष्टि से देखा जाये तो कई ऐसे मामले हैं जो कि वर्षो से निपटारे का इंतजार कर रहे हैं। उपभोक्त अदालत में कंपनी से जुड़े मामलों के निस्तारण में जब देरी होती है तो इसका सीधा फायदा उपभोक्ता की बजाय कंपनी को मिल जाता है। उपभोक्ताओं के मामलों के निस्तारण में आयोग की भूमिका अहम मानी जाती है। उपभोक्ता अदालत में बैंकिंग, बीमा, रिलय एस्टेट, टेलीकाम, ई कामर्स सेवाओं से जुड़े विवादों की सुनवाई होती है। नियमों पर यदि जाएंगे तो 90 दिनों के भीतर मामलों का निपटारा होना चाहिए। मगर जमीनी हकीकत इससे काफी अलग है। यही वजह है कि कई दफ ा देरी का सीधा फायदा सेवा प्रदाताओं को मिलता है और उपभोक्ता ठगा सा महसूस करता है।अपने जनपद में ही उपभोक्ता अदालत के मामलों पर गौर किया गया तो इसमें पाया गया कि पिछले पांच सालों में उपभोक्ता अदालत में 1725 मामले दायर किए गए। इंसाफ क ी सुस्त चाल का ही नतीजा है कि पंाच सालों में निस्तारित केस की संख्या 1189 ही है। कई ऐसे मामले हैं जो कि वर्षौ से लंवित है। तेजराम बनाम शाखा प्रबंधक पंजाब नेशनल बैंंक का मामला वर्ष 2016 में दायर हुआ था और इसका निवारण 9 साल बाद ही हो सका है। इसी तरीके से कईमामले विचाराधीन भी चल रहे हैं। इसमें अरूणकुमार सैनी बनाम पोस्टमास्टर कंपिल का मामला वर्ष 2011 में दायर किया गया था। मगर मामले में ऐसी अड़चन आयी कि अभी भी यह मामला विचाराधीन चल रहा है। यह मामले बताते हैं कि इंसाफ की जो सुस्त चाल उपभोक्ता अदालत में चल रही है उससे कहीं न कहीं उपभोक्ताओं का भी भरोसा कमजोर हो रहा है और उपभोक्ता न्याय के लिए दूसरे माध्यम का सहारा लेने को मजबूर हो रहे हैं। कई उपभोक्ताओं को इन परिस्थितियों में पुलिस की मदद लेनी पड़ती है। साल दर साल होती रही सुनवाई, नहीं मिला इंसाफ फर्रुखाबाद। पटटी मदारी के अरुण कुमार सैनी ने वर्ष2011 में पोस्टमास्टर कंपिल के खिलाफ उपभोक्ता अदालत में परिवाद दायर किया था। साल दर साल सुनवाईहोती रही आदेश भी हुए मगर पूरी तौर पर मामले का निस्तारण अभी तक नहीं हो सका है। मामला अभी तक विचाराधीन है। उपभोक्ता मामलों के वकील मुकुल सक्सेना ने बताया कि अरुण कुमार सैनी ने जो परिवाद दायर किया था उसमें भुगतान की समस्या थी भुगतान के आदेश भी अदालत ने वर्ष 2015 में कर दिये थे मगर अभी तक भुगतान की वसूली की कार्यवाही पूरी नही हो सकी है। क्या कहते है उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 38 की उपधारा 7 में प्राविधानित किया गया है कि उपभोक्ता की शिकायत का निपटारा जल्द किया जायेगा। इसमें यह भी प्राविधान है कि उपभोक्ता अदालत प्रयास करेगी कि मामले में प्रतिवादी पक्ष को नोटिस मिलने की तारीख से तीन माह के भीतर निपटारा हो जाना चाहिए। यदि शिकायत में टेस्टिंग की जरूरत है तो पांच माह में मामले का निपटारा होना चाहिए।