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14 अगस्त, 2020|11:36|IST

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टूट रही आस, मटके बिक रहे न गिलास

टूट रही आस, मटके बिक रहे न गिलास

एक जमाना था जब मिट्टी के बर्तन का चलन खूब हुआ करता था,धीरे धीरे प्लास्टिक थर्माकोल आदि ने इसका स्थान ले लिया पर जब प्लास्टिक पर बैन लगा तो मिट्टी बर्तन का कारोबार फिर चल पड़ा। लेकिन कोरोना वायरस के चलते लगे लाक डाउन ने मिट्टी बर्तन बनाने बाले लोगों के अरमान तोड़ कर रख दिए हैं। सीजन शुरु हो चुका है पर बने रखे मटके लस्सी गिलास आदि को कोई पूछने बाला नही है। जिससे कुम्हार परिवारो के आगे संकट खड़ा हो गया है। जिले मे कुम्हारो की एक बड़ी आबादी है जो मिट्टी के बर्तन बनाने का काम करती है। इन लोगों की अजीबिका इन्ही मिट्टी के बर्तनो से चलती है, पर 38 दिन हो गए है एक भी बर्तन नही बिका है। जमा पूंजी भी इनको बनाने मे इस उम्मीद से लगा दी कि अप्रैल,मई,जून मे बने रखे मिट्टी बर्तनो की बिक्री होने लगेगी पर लाक डाउन के चलते बिक्री न होने से अब घर चलाने मे दिक्कत हो रही है। झौनी नगला के अनुज प्रताप,भोले शंकर व अखिलेश प्रजापति ने बताया कि सारे पैसो की मिट्टी खरीदकर स्टाक कर ली है। मिट्टी के बर्तन भी एक माह से बने रखे है क्या करें कुछ समझ नही आ रहा है। बने रखे मटकों,लस्सी गिलास आदि मिट्टी बर्तनो की रखवाली करनी पड़ रही है,फिर भी हजारो के मिट्टी बर्तन टूट चुके है।

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  • Web Title:Aas is broken glass is not being sold