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परदेश कमाने गए, साथ में लेकर लौटे वायरस

- दीपावली की छुट्टी के महीने में तीन गुने बढ़ गये एड्स के मरीज

परदेश कमाने गए, साथ में लेकर लौटे वायरस
हिन्दुस्तान टीम,फैजाबादThu, 30 Nov 2023 11:55 PM
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- दीपावली की छुट्टी के महीने में तीन गुने बढ़ गये एड्स के मरीज

- शहरों की तुलना में ज्यादा है गांवों के एचआईवी पाजिटिव

विश्व एड्स दिवस पर खास

अयोध्या, संवाददाता। शहर की तुलना में सबसे ज्यादा एचआईवी पाजिटिव मरीज गांवों से आते है। इसमें वह मरीज ज्यादा होते है, जो दूसरे प्रदशों में कमाने जाते है। वापस घर लौटने पर जांच के बाद उसे अपनी बीमारी के बारें में पता चलता है। जब तक उसे पता चलता है तब तक वह बीमारी पत्नी व अन्य को दे चुका होता है। जिला चिकित्सालय में हर महीने औसतन दस मरीज आते है। लेकिन पिछले महीने इसकी संख्या 29 हो गयी। खास ये है कि दीपावली के अवकाश पर परदेश गये लोग अपने घर वापस आते है। जिले से बड़ी संख्या में लोग मुम्बई, सूरत, अहमदाबाद, लुधियाना, चंडीगढ़ व दिल्ली कमाने के लिए जाते है।

जिला चिकित्सालय के एमओएआरटी डा आरपी राय ने बताया कि पिछले दस वर्षो के आंकड़ो में एड्स के नये मरीजों की संख्या में कोई कमी नहीं आयी है। इसका कारण जागरुकता का अभाव है। अक्सर जागरुकता अभियान में शामिल लोग भी खुलकर शर्म के कारण इसकी जानकारी नहीं दे पाते है। जिला चिकित्सालय में आने के बाद मरीज काफी डरा रहता है। रिपोर्ट पाजिटिव आने के बाद पहलें उसकी काउंसलिंग होती है। मरीज के मन से डर निकाला जाता है। उसको सारी जानकारी दी जाती है। इलाज के दौरान कभी मरीज से बीमारी होने का कारण नहीं पूछा जाता है। इसके लिए आजीवन दवा लेनी पड़ती है। दवा लेने से वायरल लोड में कमी आती है। जिसके बाद मरीज सामान्य जीवन जी सकता है।

उन्होंने बताया कि कई बार महिलाओं को गर्भवस्था के दौरान रोग का पता चलता है। जब वायरल लोड एक हजार के उपर होता है तो दो दवा व कम होने पर एक दवा चलती है। 18 महीनें बच्चे का इलाज चलता है। जिसके बाद वह सामान्यतया ठीक हो जाता है। इसके बाद भी उसकी नियमित जांच के साथ चिकित्सीय परामर्श लेते रहना चाहिए।

कोई डीप डिप्रेशन में चला गया, किसी ने सुसाइड की सोची

- एड्स के मरीजों की कहानी असहज करने वाली है। जिला चिकित्सालय में एक मरीज को संक्रमित ब्लड चढ़ने की वजह से एड्स हो गया था। जिसने सुसाईड के बारें में सोच लिया। जिला चिकित्सालय में उसकी काफी काउसलिंग की गई। जिसके बाद उसने नियमित इलाज प्रारंभ किया। दूसरी कहानी में एक परिवार अपने दो छोटे बच्चों के साथ आया था। जिसमें परिवार के मुखिया को एचआईवी पाजिटिव आया था। जिसके बाद वह ड्रिप्रेशन में चला गया। लेकिन उसकी पत्नी ने हिम्मत बधाई। वह इलाज के लिए अपने पति को स्वयं अस्पताल लेकर आती थी। तीसरी कहनी में बाहर कमाने गये मजदूर पति से महिला को एचआईवी पाजिटिव हो गया था। इलाज के बाद वह सामान्य जीवन जी रही है।

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