इस जिले में लगे पलायन के पोस्टर, महिलाएं बोलीं-मेहनत से बनाए आशियाने, मकान टूटे तो जान दे देंगी

Dinesh Rathour मेरठ, वरिष्ठ संवाददाता
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मेरठ जिले के सेंट्रल मार्केट मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए 859 भवनों के अवैध सेटबैक तोड़ने के आदेश के बाद शुक्रवार को महिलाओं ने परिषद और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

इस जिले में लगे पलायन के पोस्टर, महिलाएं बोलीं-मेहनत से बनाए आशियाने, मकान टूटे तो जान दे देंगी

Meerut News: मेरठ जिले के सेंट्रल मार्केट मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए 859 भवनों के अवैध सेटबैक तोड़ने के आदेश के बाद शुक्रवार को महिलाओं ने परिषद और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। महिलाओं ने घरों पर पलायन और मकान बिक्री के पोस्टर चस्पा कर दिए और सड़क पर धरना देकर बैठ गईं। महिलाएं हाथ में ‘पलायन हेतु मकान बिकाऊ है’ लिखे पोस्टर लिए हुए थीं। महिलाओं ने रोते हुए कहा कि अगर खून पसीने से बनाए गए आशियाने और कारोबार उजड़े तो वे जहर खाकर अपनी जान दे देंगी।

सेक्टर दो निवासी मीनू ने कहा कि 38 से 40 वर्गमीटर के मकानों में कैसे सेटबैक छोड़ेंगे। अगर सेटबैक छोड़ा तो मकान ही नहीं बचेंगे। कुसुम शर्मा ने कहा कि लोगों ने छोटे-छोटे घरों में अपने जीवन यापन के लिए एक-एक छोटी सी दुकान बनाई थी, जो परिषद के डंडे के बाद बंद कर दी गई। शटर हटाकर दीवार लगा दी गई। इसके बाद भी सेटबैक तोड़ने के आदेश आ गए हैं। अब वे यहां रहकर क्या करेंगे। इसलिए अपने मकान बेचकर पलायन करने की तैयारी कर रहे हैं।

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दुकानें बंद होने से कारोबार ठप

अंजना जैन ने कहा कि दुकानें बंद होने से कारोबार ठप हो गया। अब स्कूल भी बंद हो गए, इससे बच्चे भी स्कूल नहीं जा रहे हैं। अगर उनके आशियाने उजाड़े गए तो महिलाएं जहर खाकर अपनी जान देने से पीछे नहीं हटेंगी। दिव्या गुप्ता और शिल्पी ने कहा कि आज कोई भी जनप्रतिनिधि उनका दुख बांटने नहीं आ रहा है। सरकार ने मेट्रो चलाकर मेरठ को तो मेट्रो सिटी बना दिया लेकिन हमारी कोई सुध नहीं ली जा रही है। वे अब यहां रहकर क्या करेंगे, जब कारोबार ही नहीं बचा। अब आशियाने भी सेटबैक के नाम पर उजाड़े जाएंगे। दो महीने के अंदर सेटबैक तोड़ने में घर ही खत्म हो जाएंगे। ऐसे में उनके पास यहां से पलायन करने का कोई दूसरा विकल्प ही नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिया है दो माह में अवैध सेटबैक तोड़ने के आदेश

9 अप्रैल को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शास्त्रीनगर के सील किए 44 भवनों समेत सभी 859 भवनों के अवैध सेटबैक तोड़ने के आदेश दिए हैं। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने 2 महीने का समय दिया है। 15 दिन के अंदर भवन स्वामी स्वयं अवैध रूप से कब्जाए गए सेटबैक (इमारतों के चारों ओर छोड़ी जाने वाली अनिवार्य खुली जगह) को हटाने के आदेश दिए हैं। अगर भवन स्वामी स्वयं अवैध सेटबैक नहीं हटाएंगे तो परिषद इन्हें तोड़ेगी और इस पर होने वाले खर्च को भवन स्वामी से वसूला जाएगा। कोर्ट ने भू उपयोग परिवर्तन की कार्यवाही पर भी फिलहाल रोक लगाते हुए कहा कि हम यह स्पष्ट करते हैं कि इससे पहले कि अधिकारी निर्माण के किसी हिस्से को कंपाउंड करने की प्रक्रिया शुरू करें, हमें यह पता होना चाहिए कि ये उप-नियम क्या हैं और क्या वास्तव में ये उप-नियम कंपाउंड करने की अनुमति देते हैं या नहीं। सुनवाई की अगली तारीख पर इस मुद्दे पर विचार करेंगे। कोर्ट ने परिषद से इस संबंध में एक स्टेटस रिपोर्ट मांगी है।

देर शाम अपलोड हुआ सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर, जल्द नोटिस जारी करेगा परिषद

सुप्रीम कोर्ट का आदेश देर शाम अपलोड हो गया। आवास एवं विकास परिषद नोटिस जारी करने के लिए ऑर्डर का इंतजार कर रहा था। अब ऑर्डर आ गया है। अधिकारियों का कहना है कि नोटिस तैयार कराकर जल्द ही जारी किए जाएंगे। परिषद ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है।

अफवाहों पर ध्यान न दें लोग : अनिल कुमार सिंह

उप आवास आयुक्त अनिल कुमार सिंह ने कहा कि कुछ असामाजिक तत्व ये अफवाह फैला रहे हैं कि कोर्ट ने 44 संपत्तियों के अलावा बाकी को भी ध्वस्त करने का आदेश दिया है, जबकि कोर्ट ने सैटबैक से अवैध निर्माण हटाने के आदेश दिए हैं। आवास विकास 15 दिन के नोटिस देगा और सुनवाई करेगा। संबंधित व्यक्ति को उसके अवैध निर्माण की जानकारी दी जाएगी और अवैध निर्माण हटने पर बाइलाज के तहत कंपाउंडिंग की जा सकेगी। कोर्ट ने आवास विकास को अपने बाईलॉज और प्लान भी कोर्ट के सामने रखने का आदेश दिया है। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि सेटबैक कवर किए हों तो इन्हें स्वयं हटा लें। नियमों में कंपाउंडेबल होने पर कंपाउंडिंग की जा सकेगी।

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दिनेश राठौर वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में हरदोई से की थी। कानपुर यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका (डिजिटल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हरदोई की गलियों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर आज डिजिटल मीडिया के शिखर तक पहुँच चुका है। दिनेश राठौर ने यूपी और राजस्थान के विभिन्न शहरों की नब्ज को प्रिंट और डिजिटल माध्यमों से पहचाना है।
लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में कार्यरत दिनेश दिनेश, खबरों के पीछे की राजनीति और सोशल मीडिया के ट्रेंड्स (वायरल वीडियो) को बारीकी से विश्लेषण करने के लिए जाने जाते हैं।

पत्रकारिता का सफर
हरदोई ब्यूरो से करिअर की शुरुआत करने के बाद दिनेश ने कानपुर हिंदुस्तान से जुड़े। यहां बतौर स्ट्रिंगर डेस्क पर करीब एक साल तक काम किया। इसके बाद वह कानपुर में ही दैनिक जागरण से जुड़े। 2012 में मुरादाबाद हिंदुस्तान जब लांच हुआ तो उसका हिस्सा भी बने। करीब दो साल यहां नौकरी करने के बाद दिनेश राजस्थान पत्रिका से जुड़ गए। सीकर जिले में दिनेश ने करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में प्रिंट के डेस्क पर वापसी की। लगभग दो साल की सेवाओं के बाद डिजिटल हिंदुस्तान में काम करने का मौका मिला जिसका सफर जारी है।

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