‘रिश्वत से सबकुछ खरीदा जा सकता है’, हाई कोर्ट ने चिंता के साथ की ये सख्त टिप्पणी

Apr 06, 2026 08:44 pm ISTAjay Singh विधि संवाददाता, प्रयागराज
share

पीड़िता ने न तो किसी कोर्स के लिए आवेदन किया और न ही किसी भर्ती प्रक्रिया में भाग लिया। बाद में आरोपियों ने उसे फर्जी दस्तावेज जैसे पीएचडी मार्कशीट, एडमिशन लेटर, टॉपिक अप्रूवल लेटर और नियुक्ति पत्र दे दिए। रजिस्ट्रार ने इन सभी दस्तावेजों को पूरी तरह फर्जी और हस्ताक्षर नकली बताया।

‘रिश्वत से सबकुछ खरीदा जा सकता है’, हाई कोर्ट ने चिंता के साथ की ये सख्त टिप्पणी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने समाज में बढ़ती उस धारणा पर कड़ी टिप्पणी की है, जिसमें आम लोग यह मानने लगे हैं कि रिश्वत देकर कुछ भी हासिल किया जा सकता है, चाहे वह शैक्षणिक डिग्री हो या विश्वविद्यालय में नौकरी। न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने फर्जी पीएचडी डिग्री और असिस्टेंट प्रोफेसर की नौकरी दिलाने के नाम पर 22 लाख रुपये से अधिक की ठगी के मामले में दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार कर दिया है।

कानपुर निवासी तान्या दीक्षित ने आरोप लगाया कि आरोपी प्रियंका सिंह सेंगर व अन्य ने उसे अलीगढ़ स्थित एक विश्वविद्यालय में पीएचडी में प्रवेश और कानपुर के एक विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर की नौकरी दिलाने का झांसा दिया। इन आश्वासनों पर भरोसा करते हुए पीड़िता और उसकी मां ने आरोपियों के खातों में कुल 22,18,000 ट्रांसफर किए। हालांकि, पीड़िता ने न तो किसी कोर्स के लिए आवेदन किया और न ही किसी भर्ती प्रक्रिया में भाग लिया। बाद में आरोपियों ने उसे फर्जी दस्तावेज जैसे पीएचडी मार्कशीट, एडमिशन लेटर, टॉपिक अप्रूवल लेटर और नियुक्ति पत्र सौंप दिए। जब पीड़िता विश्वविद्यालय पहुंची, तो रजिस्ट्रार ने इन सभी दस्तावेजों को पूरी तरह फर्जी और हस्ताक्षर नकली बताया।

हाईकोर्ट ने कहा कि यह मामला समाज में बेहद चिंताजनक प्रवृत्ति को दर्शाता है, जहां लोग यह मान बैठे हैं कि रिश्वत के जरिए सब कुछ संभव है। कोर्ट ने यह भी कहा कि एक शिक्षित महिला का इस तरह ठगी का शिकार होना यह दर्शाता है कि समाज में नैतिक मूल्यों का स्तर काफी गिर चुका है। ऐसे अपराधों को दंडित करना आवश्यक है ताकि समाज में नैतिकता बहाल की जा सके।

आरोपी पक्ष ने दलील दी कि सह-आरोपियों को पहले ही अंतरिम राहत मिल चुकी है, इसलिए समानता के आधार पर एफआईआर रद्द की जाए। लेकिन अदालत ने यह कहते हुए दलील खारिज कर दी कि वे आदेश केवल अंतरिम और अस्थायी थे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पीएचडी डिग्री केवल निर्धारित शैक्षणिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही मिलती है और विश्वविद्यालय में नियुक्ति भी विधिवत भर्ती प्रक्रिया के जरिए ही होती है। अदालत ने कहा कि वह इस स्तर पर आरोपों की सत्यता पर कोई टिप्पणी नहीं कर रही है, लेकिन प्राथमिकी में लगाए गए आरोप गंभीर हैं और उनकी निष्पक्ष व विस्तृत जांच आवश्यक है। इसी आधार पर अदालत ने हस्तक्षेप से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी।

Ajay Singh

लेखक के बारे में

Ajay Singh

अजय कुमार सिंह पिछले आठ वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में पूर्वांचल के बड़े हिस्से से खबरों का कोआर्डिनेशन देख रहे हैं। वह हिन्दुस्तान ग्रुप से 2010 से जुड़े हैं। पत्रकारिता में 27 वर्षों का लंबा अनुभव रखने वाले अजय ने टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। हिन्दुस्तान से पहले वह ईटीवी, इंडिया न्यूज और दैनिक जागरण के लिए अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। अजय राजनीति, क्राइम, सेहत, शिक्षा और पर्यावरण से जुड़ी खबरों को गहराई से कवर करते हैं। बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट अजय फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान में असिस्टेंट एडिटर हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति और क्राइम की खबरों पर विशेष फोकस रखते हैं।

और पढ़ें
लेटेस्ट Hindi News, Lucknow News, Meerut News, Ghaziabad News, Agra News और Kanpur News के साथ-साथ UP Board Result 2026 Live, UP Board 10th Result, UP Board 12th Result और UP News अपडेट हिंदी में पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।