RWA के हर फैसले को सीधे हाईकोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती, सरकार को दिया यह निर्देश
हाईकोर्ट ने कहा है कि सोसाइटियों में बनाई गई रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के फैसले को सीधे अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती है। आरडब्ल्यूए को पार्किंग, सुरक्षा और साझा सुविधाओं पर निर्णय लेने का अधिकार है। सरकार को कोर्ट ने प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र विकसित करने का आदेश दिया है।

हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राज्य सरकार को आवासीय सोसायटीज की विधिवत निर्वाचित रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) तथा अपार्टमेंट मालिकों के बीच उत्पन्न होने वाले विवादों के निस्तारण के लिए प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र विकसित करने पर विचार करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही न्यायालय ने कहा है कि किसी आवासीय सोसायटी के प्रबंधन और उसके प्रशासन की जिम्मेदारी सामूहिक रूप से आरडब्ल्यूए की होती है। यदि आरडब्ल्यूए लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत कोई निर्णय लेता है और कुछ फ्लैट मालिक उससे असहमत हैं, तो सिर्फ इसी आधार पर संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल नहीं की जा सकती।
क्या था अपनी ही सोसाइटी के एसोसिएशन पर आरोप
यह आदेश न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने गोमती नगर विस्तार स्थित सर्वोदय सुलभ अपार्टमेंट के चार निवासियों की याचिका खारिज करते हुए दिया। याचियों का आरोप था कि आरडब्ल्यूए ने मनमाने ढंग से 10 में से छह प्रवेश द्वार बंद कर दिए। पार्किंग शुल्क वसूला जा रहा है, शुल्क न देने वालों के वाहनों पर क्लैंप लगाकर प्रतिदिन पांच सौ रुपये वसूले जाते हैं तथा निजी क्रेन से वाहन हटाए जाते हैं। साथ ही आरडब्ल्यूए के गठन पर भी सवाल उठाए गए थे।
RWA ने बताया क्या है उसके अधिकार
सुनवाई के दौरान आरडब्ल्यूए ने बताया कि संस्था का विधिवत पंजीकरण हुआ है और चुनाव कराए जाने के बाद ही इसका गठन किया गया। न्यायालय ने इस दलील को स्वीकार करते हुए कहा कि एक बार निर्वाचित आरडब्ल्यूए अस्तित्व में आ जाए तो उसे उप विधियों के अनुसार पार्किंग, सुरक्षा और साझा सुविधाओं के संचालन संबंधी निर्णय लेने का अधिकार है।
हाईकोर्ट ने सुरक्षा पर ऐक्शन को सही बताया
कहा गया कि निर्धारित स्थान के बाहर वाहन खड़ा करना अनधिकृत पार्किंग माना जा सकता है और ऐसे मामलों में आरडब्ल्यूए आवश्यक कार्रवाई कर सकती है। न्यायालय ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर कुछ प्रवेश द्वार बंद करना आरडब्ल्यूए के अधिकार क्षेत्र का विषय है और इससे नागरिकों की आवाजाही के मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं माना जा सकता।
सरकार शिकायत निवारण प्रणाली विकसित करेः कोर्ट
हाईकोर्ट ने कहा कि एसोसिएशन के निर्णयों से असहमति रखने वाले सदस्यों को पहले आरडब्ल्यूए के मंच पर अपनी आपत्तियां उठानी चाहिए। ऐसे मामलों में तब तक न्यायिक हस्तक्षेप उचित नहीं माना जाएगा, जब तक कोई स्पष्ट वैधानिक या संवैधानिक अधिकार प्रभावित न हो। हालांकि न्यायालय ने यह भी माना कि ऐसे विवादों के समाधान के लिए मौजूदा कानून में पर्याप्त व्यवस्था नहीं है इसलिए राज्य सरकार से उत्तर प्रदेश अपार्टमेंट अधिनियम, 2010 के तहत उपयुक्त शिकायत निवारण प्रणाली विकसित करने पर विचार करने को कहा है।


