गाड़ी बिकने के बाद भी रजिस्टर्ड ओनर ही देगा मुआवजा, HC ने खारिज की बीमा कंपनी की अपील

Feb 07, 2026 09:20 pm ISTDinesh Rathour प्रयागराज, विधि संवाददाता
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना मुआवजे से जुड़े एक मामले में स्पष्ट किया है कि किसी वाहन की बिक्री हो चुकी हो, लेकिन परिवहन विभाग के रिकॉर्ड में पंजीकरण में पुराने मालिक का नाम ही दर्ज है तो दुर्घटना की स्थिति में वही पंजीकृत मालिक मुआवजे के भुगतान के लिए जिम्मेदार माना जाएगा।

गाड़ी बिकने के बाद भी रजिस्टर्ड ओनर ही देगा मुआवजा, HC ने खारिज की बीमा कंपनी की अपील

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना मुआवजे से जुड़े एक मामले में स्पष्ट किया है कि किसी वाहन की बिक्री हो चुकी हो, लेकिन परिवहन विभाग के रिकॉर्ड में पंजीकरण में पुराने मालिक का नाम ही दर्ज है तो दुर्घटना की स्थिति में वही पंजीकृत मालिक मुआवजे के भुगतान के लिए जिम्मेदार माना जाएगा। यह आदेश न्यायमूर्ति संदीप जैन ने दिया है। इसी के साथ कोर्ट ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी की अपील खारिज करते हुए कर्मचारी मुआवजा आयुक्त के आदेश को बरकरार रखा।

मामला 26 फरवरी 2015 को हुई सड़क दुर्घटना से संबंधित है, जिसमें कार चालक धरमवीर की मौत हो गई थी। कर्मचारी मुआवजा आयुक्त मुरादाबाद ने मृतक के परिजनों को 8,26,495 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था। इस आदेश को बीमा कंपनी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। बीमा कंपनी ने तर्क दिया कि वाहन के मूल मालिक राकेश ने दुर्घटना से पहले ही कार निर्दोष कुमार को बेच दी थी इसलिए मालिक और सेवक का संबंध समाप्त हो गया था और कंपनी जिम्मेदार नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला

कोर्ट ने पाया कि दुर्घटना की तारीख तक वाहन का पंजीकरण राकेश के नाम पर ही था। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि मुआवजा पाने वाले को वाहन के लगातार हस्तांतरणों के पीछे भागने की जरूरत नहीं है। कानूनी रूप से पंजीकृत मालिक और उसकी बीमा कंपनी ही जिम्मेदार होंगे। कंपनी ने यह भी दावा किया कि ड्राइवर के लिए अलग से प्रीमियम नहीं लिया गया था लेकिन रिकॉर्ड में आईएमटी 29 के तहत दो कर्मचारियों के लिए 50 प्रीमियम लिया गया था।

कोर्ट ने कहा कि निजी वाहन में ड्राइवर ही प्रमुख कर्मचारी होता है इसलिए वह बीमा पॉलिसी के दायरे में कवर माना जाएगा। कोर्ट ने भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) के 2023 के सर्कुलर का उल्लेख करते हुए कहा कि निजी कार पॉलिसी में आईएमटी 29 कवर अब अनिवार्य रूप से शामिल किया गया है, जिससे ड्राइवरों को सुरक्षा मिलती है। कोर्ट ने कहा कि अपील में कोई ठोस कानूनी आधार नहीं है। साथ ही बीमा कंपनी को निर्देश दिया कि 17,94,718 रुपये (मुआवजा व ब्याज सहित) की राशि दावेदारों को वितरित करे।

आईएमटी 29 क्या है

आईएमटी 29 (इंडियन मोटर टैरिफ 29) मोटर बीमा पॉलिसी का एक विशेष एंडोर्समेंट/कवर है, जो वाहन में काम करने वाले ड्राइवर, कंडक्टर या अन्य कर्मचारियों को दुर्घटना की स्थिति में बीमा सुरक्षा देता है।

Dinesh Rathour

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Dinesh Rathour

दिनेश राठौर लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में पिछले आठ सालों से काम कर रहे हैं। वह लाइव हिन्दुस्तान में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। कानपुर यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया है। पत्रकारिता में 13 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश की डिजिटल मीडिया और प्रिंट जर्नलिज्म में अलग पहचान है। इससे पहले लंबे समय तक प्रिंट में डेस्क पर भी काम किया है। कुछ सालों तक ब्यूरो में भी रहे हैं। यूपी और राजस्थान के सीकर जिले में भी पत्रकारिता कर चुके हैं। यूपी की राजनीति के साथ सोशल, क्राइम की खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाते हैं। वायरल वीडियो की फैक्ट चेकिंग में दिनेश को महारत हासिल है।

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