नहीं लिखी थी मौत तो ट्रेन के सामने जाकर भी बच गया बच्चा, साथ लेकर कूदी मां की चली गई जान

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यूपी के इटावा में बच्चे की मौत नहीं लिखी थी तो ट्रेन के सामने जाकर भी बच गया। साथ लेकर कूदी मां की  जान चली गई। घायल बच्चे की पुलिस देखभाल कर रही है। महिला की शिनाख्त की जा रही है।

नहीं लिखी थी मौत तो ट्रेन के सामने जाकर भी बच गया बच्चा, साथ लेकर कूदी मां की चली गई जान

उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में मासूम को गोद में लेकर ट्रेन के आगे महिला कूद गई। घमुरिया गांव के पास डीएफसी रेलवे लाइन पर महिला की मालगाड़ी से कटकर मौत हो गई, जबकि उसका करीब डेढ़ वर्षीय बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई।

पुलिस के मुताबिक, मृतका महिला की उम्र लगभग 25 से 30 वर्ष के बीच प्रतीत हो रही है, लेकिन उसके पास से कोई पहचान पत्र, मोबाइल फोन या ऐसा कोई दस्तावेज नहीं मिला, जिससे उसकी शिनाख्त हो सके। घटना के कई घंटे बाद भी पुलिस के सामने महिला की पहचान सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।

सोमवार देर रात डीएफसी रेलवे लाइन के डाउन ट्रैक पर महिला ने बच्चे के साथ कूद गई। घटना की सूचना रेलवे अधिकारियों और स्थानीय पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच-पड़ताल शुरू कर दी। महिला का शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया, जबकि घायल बच्चे को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। सिर में गंभीर चोट होने के कारण डॉक्टर ने उसे मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। उसकी पहचान और परिजनों तक पहुंचना भी पुलिस के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के समय उस क्षेत्र में आवाजाही काफी कम रहती है। ऐसे में महिला कब और किस रास्ते से ट्रैक तक पहुंची, यह जांच का विषय है।

पुलिस आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है ताकि पता लगाया जा सके कि महिला किस दिशा से आई थी और उसके साथ कोई अन्य व्यक्ति तो नहीं था। घटना के बाद पुलिस कर्मी घायल बच्चे की देखभाल कर रहे हैं। प्रभारी निरीक्षक विक्रम सिंह ने बताया कि मृतका की शिनाख्त कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। आसपास के थानों और पड़ोसी जनपदों से भी संपर्क किया गया है। साथ ही रेलवे लाइन और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी देखी जा रही है। उन्होंने कहा कि महिला की पहचान होने के बाद ही घटना के पीछे की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।

रोते-रोते सो गया मासूम, पुलिस ने मृत समझा तो चल रही थीं सांसें

हादसे के बाद पुलिसकर्मियों और राहतकर्मियों को भी भावुक कर दिया। मालगाड़ी की चपेट में आने से महिला की मौत हो गई थी, जबकि उसका करीब डेढ़ वर्षीय बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे के बाद मासूम दर्द और चोट के कारण काफी देर तक रोता रहा और फिर ट्रैक किनारे ही रोते-रोते सो गया। घटना की सूचना मिलने पर जब पुलिस मौके पर पहुंची तो महिला का शव रेलवे ट्रैक पर पड़ा था। वहीं कुछ दूरी पर बच्चा पड़ा दिखाई दिया। शुरुआत में पुलिसकर्मियों को आशंका हुई कि हादसे में बच्चे की भी मौत हो चुकी है। बच्चे की कोई हलचल नजर नहीं आने पर मौके पर मौजूद लोगों की चिंता बढ़ गई। इसी दौरान पहुंची एंबुलेंस टीम ने बच्चे की जांच की। परीक्षण में पता चला कि उसकी सांसें चल रही हैं और वह जीवित है। यह जानकारी मिलते ही पुलिस और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली। एंबुलेंस कर्मियों ने प्राथमिक उपचार शुरू किया और घायल बच्चे को सावधानीपूर्वक एंबुलेंस में लेकर जिला अस्पताल पहुंचाया। घटना के बाद पुलिसकर्मी भी बच्चे की देखभाल में जुटे रहे। मां की मौत और घायल मासूम की हालत ने मौके पर मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया।

Deep Pandey

लेखक के बारे में

Deep Pandey

दीप नरायन पांडेय लाइव हिन्दुस्तान में पिछले आठ सालों से यूपी की खबरें करते हैं। डिजिटल, टीवी और प्रिंट जर्नलिज्म में 15 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले दीप नरायन पांडेय वरिष्ठ पत्रकार हैं। दीप अब डिजिटल मीडिया के जाने माने नाम बन गए हैं। दीप हिंदी भाषा की डिजिटल पत्रकारिता के नए आयामों को बेहतर समझते हैं। यूपी की राजनीति के साथ क्राइम की खबरों पर अच्छी पकड़ है। सामाजिक, इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन, शिक्षा और हेल्थ पर भी लिखते हैं। दीप पाठकों की पसंद को समझने और उसी तरह से न्पूज प्रस्तुत करने में माहिर हैं। दीप सरल भाषा में खबरों को पाठकों तक पहुंचाते हैं। खबर लिखने के अलावा साहित्य पढ़ने-लिखने में भी रुचि रखते हैं। मास कम्युनिकेशन में बीए और एमए दीप नरायन पांडेय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गोंडा के रहने वाले हैं। दीप ने पत्रकारिता की शुरुवात लखनऊ से की। टीवी चैनल से करियर का आगाज करने वाले दीप इसके बाद प्रिंट अमर उजाला लखनऊ में भी रहे। हिन्दुस्तान प्रिंट में वाराणसी, गोरखपुर, फिर लखनऊ में कार्य के दौरान विभिन्न जिलों के डेस्क इंचार्ज रहे हैं। यूपी विधानसभा चुनाव 2012, 2017, 2022, लोकसभा चुनाव, पंचायत चुनावों के दौरान बेहतर कवरेज कर चुके हैं।

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