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Hindi News उत्तर प्रदेशचौथे दिन हुई माता कूष्मांडा की पूजा, लगाया गया मालपुए का भोग

चौथे दिन हुई माता कूष्मांडा की पूजा, लगाया गया मालपुए का भोग

इटावा। हिन्दुस्तान संवाद बासंतिक नवरात्र में कोरोना का प्रभाव ज्यादा देखने को मिल रहा...

चौथे दिन हुई माता कूष्मांडा की पूजा, लगाया गया मालपुए का भोग
हिन्दुस्तान टीम,इटावा औरैयाFri, 16 Apr 2021 11:42 PM
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इटावा। हिन्दुस्तान संवाद

बासंतिक नवरात्र में कोरोना का प्रभाव ज्यादा देखने को मिल रहा है। जहां मंदिरों व घरों में देवी गीतों व लंगुरियों की धूम मची रहती थी लेकिन इस बार मंदिरों में श्रद्वालुओं की संख्या जहाँ काफी कम दिख रही है वही मंदिरों व घरों देवी गीतों की गूँज भी नही सुनाई दे रही है। शुक्रवार को नवरात्र के चौथे दिन शक्ति के चौथे स्वरुप माता कूष्मांडा की पूजा अर्चना की गई। भक्तों के द्वारा माता

को मालपुए का विशेष भोग भी अर्पित किया गया। देवी मंदिरों में प्रतिदिन माता रानी के विशेष श्रंगार किया जा रहा हैं।

नवरात्र में प्रतिदिन शक्ति के अलग-अलग स्वरूपों की श्रद्धालु पूजा अर्चना करते हैं। चौथे दिन भक्तों ने कूष्मांडा माता का पूजन अर्चन किया। बताया जाता है कि माता कूष्मांडा अपनी हंसी मात्र से सम्पूर्ण ब्रह्मांण को उत्पन्न करती हैं। इस कारण माता को कूष्मांडा देवी कहा जाता है। यह देवी सूर्यमंडल के भीतर निवास करती हैं और इनकी कांति सूर्य के समान है। मान्यता है कि माता के तेज से दसों दिशाएं प्रकाशित होती हैं। पौराणिक कथा के अनुसार मां कूष्मांडा का अर्थ होता है कुम्हड़ा, मां दुर्गा ने असुरों के अत्याचार से संसार को मुक्त करने के लिए कूष्मांडा का अवतार लिया था। मान्यता है कि देवी कूष्मांडा ने पूरे ब्रह्माण्ड की रचना की थी पूजा के दौरान कुम्हड़े की बलि देने की भी परंपरा है ऐसा करने से मां प्रसन्न होती हैं और पूजा सफल होती है

श्रद्धालुओं ने जहां विभिन्न प्रकार के भोग अर्पित किए। वहीं माता को

सर्वप्रिय मालपुए का भोग भी लगाया। माता को मालपुए का भोग लगाकर जरूरतमंदों में बांटने से बौद्धिक क्षमता का विकास होता है। हिन्दू घरों में नवरात्र को लेकर देवी गीतों व लंगुरियों की धूम रहती थी लेकिन इस बार नवरात्र में कहीं पर भी देवी गीत नहीं सुनाई दे रहे है।इस बार कोरोना के कारण माता के चरणों में नेजे चढाने पर भी रोक है जिसके कारण भक्त नेजें चढानें से अपनें को बंचित मान रहे है।

सिद्वपीठ माता कालीबाँह मंदिर, लरवना के कालिका देवी मदिर व बलरई के प्राचीन ब्रम्हाणी देवी मंदिर पर सवसे ज्यादा श्रद्वालु पहुचे और माता कूष्मांडा का पूजन अर्चन किया। कालीवॉह मंदिर पर बंद गेट के बाहर से ही भक्तों को माता की पूजा अर्चना करनी पड़ी। प्राचीन श्री कालीबाड़ी मंदिर में माता दक्षिणेश्वरी काली का श्रंगार हुआ। वही इसी मंदिर परिसर में बने नव दुर्गा मंदिर में माता के नौ रूपों का अलग अलग श्रंगार किया गया है। यमुना किनारे पीताम्बरा धाम मंदिर, पुरोहितन टोला के आनन्दी माता मंदिर, चितभवन के माँ कामाख्या देवी मंदिर, आलमपुरा के कल्याणी देवी मंदिर, बराही देवी मंदिर, लालपुरा के कालका देवी मंदिर,ज्वाला देवी मंदिर, गमा देवी, करीला देवी, फूलनदेवी, गामा देवी, गायत्री देवी, बेहड़ बाली माता, झारखण्ड देवी व अन्य देवी मंदिरों पर भी श्रद्वालु माता के पूजन अर्चन को पहुँचे।