सिरप के वितरण पर लगाई गई रोक

Newswrap हिन्दुस्तान, इटावा औरैया
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Etawah-auraiya News - इटावा में एक डेढ़ साल की बच्ची की मौत नॉरफ्लॉक्सासिन सस्पेंशन सिरप पीने से हुई। परिजनों ने सिरप में जहर होने का आरोप लगाया। औषधि निरीक्षक ने सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर सिरप के वितरण पर रोक लगा दी है और नमूना जांच के लिए भेजा गया है। मामले में हंगामा और पुलिस की कार्रवाई भी हुई।

सिरप के  वितरण पर लगाई गई रोक

इटावा। जिला अस्पताल समेत सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर नॉरफ्लॉक्सासिन सस्पेंशन सिरप के वितरण पर औषधि निरीक्षक ने रोक लगा दी है। इस सिरप का भी सैंपल जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा। जिस सिरप को पीने से बच्ची की मौत का आरोप लगाया गया है। उसमें काफी दुर्गंध भी आ रही थी। बता दें कि शुक्रवार को जिला पुरुष अस्पताल में बच्ची की मौत के बाद परिजनों ने हंगामा काटा था। सैफई रोड पर कुनैरा के विपिन कुमार अपनी डेढ़ साल की बच्ची श्रेयांशी को सर्दी-जुकाम और बुखार की दिक्कत होने पर बुधवार को जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे, तब तक ओपीडी बंद हो चुकी थी।

गुरुवार को विपिन अपनी पत्नी रिया संग बच्ची को लेकर अस्पताल पहुंचे। जहां बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शादाव आलम ने देखा और बच्ची को दस्त का सिरप नॉरफ्लॉक्सासिन सस्पेंशन, बुखार का सिरप पेरासिटामोल और एंटी एलर्जिक सिरप लेवो सिटिरिज़िन लिख दिया। परिवार वालों ने अस्पताल के काउंटर से ही यह तीनों दवाएं ली थीं। शुक्रवार सुबह 9:30 बजे बच्ची को नॉरफ्लॉक्सासिन सस्पेंशन पिलाया गया तो उसकी तबीयत बिगड़ने लगी और मुंह से झाग आने लगा आनन फानन में परिवार वाले बच्ची को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे, यहां से सैफई मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया लेकिन रास्ते में ही बच्ची की मौत हो गई थी।बच्ची के शव को लेकर परिवार वाले वापस जिला अस्पताल पहुंचे और सिरप का रंग नीला होने पर उसमें जहर होने की बात कही। वहीं बच्ची की मौत का कारण अस्पताल से दिया गया सिरप बताकर जमकर हंगामा काटा। पुलिस के पहुंचने पर मामला शांत हुआ लेकिन सीएमएस के कहने पर परिवारीजन बच्ची का पोस्टमार्टम कराने के लिए तैयार नहीं हुए और शव को लेकर वापस चले गए थे ।जिले के औषधि निरीक्षक नीलेश शर्मा ने मामला संज्ञान में आने पर जिला अस्पताल के अलावा जनपदीय ड्रग वेयर हाउस से जिले के जिन स्वास्थ्य केन्द्रों पर सिरप नॉरफ्लॉक्सासिन सस्पेंशन की सप्लाई की गई है। उन सभी के वितरण पर रोक लगा दी। उन्होंने बताया इस सिरप का नमूना जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा और जब तक रिपोर्ट नहीं आती है। तब तक सिरप का वितरण नहीं किया जाएगा।इटावा। नॉरफ्लॉक्सासिन सस्पेंशन सिरप की 5000 बॉटल मई 2025 में जनपदीय ड्रग बेयर हाउस में आई थी। इनकी मैन्युफैक्चरिंग भी मई की है और एक्सपायरी अप्रैल 2027 की है। ड्रग बेयर हाउस से तो पूरी दवा का वितरण हो चुका है जबकि जिला अस्पताल में अभी 470 वॉटल बची हुई हैं। अस्पताल में अब इस दवा का वितरण जांच रिपोर्ट आने तक बंद कर दिया गया है वहीं जनपदीय ड्रग वेयर हाउस से भी सभी स्वास्थ्य केंद्रों को औषधि निरीक्षक के निर्देश पर इस दवा के वितरण पर रोक लगा दी गई है।इटावा। दवा से आने वाली दुर्गंध को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कुछ ने इसे गेहूं में रखने वाली दवा की दुर्गंध की तरह बताया तो किसी ने खेतों में छिड़कने वाली दवा की तरह बताया। साथ ही बच्ची के पोस्टमार्टम न कराने और दवा को जांच के लिए अस्पताल में न छोड़ने पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। वहीं सीएमएस को थाने में पीआई भेजनी चाहिये थी और जिस दवा से दुर्गंध आ रही थी उसे लेकर इसकी बारीकी से जांच भी करानी चाहिए थी।

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