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6 अगस्त, 2020|6:28|IST

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हरियाली तीज पर राधावल्लभ लाल का हुआ मनमोहक श्रंगार

हरियाली तीज पर राधावल्लभ लाल का हुआ मनमोहक श्रंगार

जिले भर में गुरुवार को हरियाली तीज का पर्व पूरी श्रद्धा के साथ मनाया गया। सुहागिन महिलाओं के लिए इस दिन का बहुत खास महत्व होता है। ऐसे में महिलाओं ने सोलह श्रृंगार कर अपने पति की लम्बी उम्र और सुख समृद्धि के लिए व्रत रखा। सौंदर्य और प्रेम के इस पर्व को श्रावणी तीज भी कहते हैं। हरियाली तीज के दिन महिलाओं ने पूरी श्रद्धा से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की। हरियाली तीज भगवान शिव और मां पार्वती के पुनर्मिलन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। शिव पुराण के अनुसार हरियाली तीज के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का पुनर्मिलन हुआ था इसलिए सुहागन स्त्रियों के लिए इस व्रत की बड़ी महिमा है। इस दिन महिलाएं महादेव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करती हैं।

राधावल्लभ मंदिर में हरियाली तीज के मौके पर विशेष पूजा का आयोजन किया गया। शाम के समय भगवान का विशेष श्रृंगार कर हरियाली तीज की कथा व पूजा का भी आयोजन हुआ। मंदिर के महंत प्रकाश चन्द्र गोस्वामी ने बताया मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था। इस कड़ी तपस्या और 108वें जन्म के बाद माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त किया। मान्यता है कि श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया को ही भगवान शंकर ने माता पार्वती को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। तभी से भगवान शिव और माता पार्वती ने इस दिन को सुहागन स्त्रियों के लिए सौभाग्य का दिन होने का वरदान दिया। हरियाली तीज का व्रत और पूजन शीघ्र विवाह और सुखद वैवाहिक के लिए सबसे उत्तम है। इस दिन लोगों को महादेव संग मां पार्वती की विशेष कृपा मिलती है। उन्होंने बताया कि यह त्यौहार प्रकृति को भी समर्पित है। भगवान कृष्ण ने इस समय को प्रकृति के प्रति समर्पित करते हुए इसे विशेष दिवस की संज्ञा दी है। मंदिर में पूजा के बाद भजन कीर्तन का आयोजन भी सोशल डिस्टेंसिंग के साथ किया गया।

आज से ही होती है कजरी उत्सव की शुरुआत

हरयिाली तीज हरियाली तीज का उत्सव श्रावण मास में शुक्ल पक्ष तृतीया को मनाया जाता है। यह उत्सव महिलाओं का उत्सव है। सावन में जब सम्पूर्ण प्रकृति हरी चादर से आच्छादित होती है उस अवसर पर महिलाओं के मन मयूर नृत्य करने लगते हैं। वृक्ष की शाखाओं में झूले पड़ जाते हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश में इसे कजली तीज के रूप में मनाते हैं।सुहागन स्त्रियों के लिए यह व्रत काफी मायने रखता है।आस्था, उमंग, सौंदर्य और प्रेम का यह उत्सव शिव-पार्वती के पुनर्मिलन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। चारों तरफ हरियाली होने के कारण इसे हरियाली तीज कहते हैं।

मंदिर में डाला गया ठाकुर जी का हिंडोला

हरियाली तीज के मौके पर महिलाएं झूला झूलती हैं, लोकगीत गाती हैं और खुशियां मनाती हैं। राधावल्लभ मंदिर पर गुरुवार को ठाकुर जी का हिंडोला उत्सव भी मनाया गया। इस उत्सव में कुमारी कन्याओं से लेकर विवाहित युवा और वृद्ध महिलाएं सम्मिलित हुए। सभी ने ठाकुर जी को झूला झुलाया। इस दौरान मंदिर में महिलाओं को श्रंगार सामग्री भी प्रसाद रूप में वितरित की गयीं। हरयिाली तीज के दनि सुहागन स्त्रयिां हरे रंग का श्रृंगार करती हैं। इसके पीछे धार्मकि कारण के साथ ही वैज्ञानकि कारण भी शामलि है।

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  • Web Title:Radha Vallabh Lal 39 s adorable adornment on greenery Teej