
विश्व टॉयलेट दिवस विशेष<bha>--</bha><bha>--</bha><bha>--</bha>
Etawah-auraiya News - कहीं शौचालय में ताला तों कहीं निर्माण में हुआ घोटालागंदगी और संचालन में हो रहीं लापरवाही से खुले में शौच जारी फ़ोटो-39. सामुदायिक शौचालय में लटका ताला। इटावा, संवाददाता। जहां एक ओर केन्द्र व प्रदेश...
कहीं शौचालय में ताला तों कहीं निर्माण में हुआ घोटाला गंदगी और संचालन में हो रहीं लापरवाही से खुले में शौच जारी फ़ोटो-39. सामुदायिक शौचालय में लटका ताला। इटावा, संवाददाता। जहां एक ओर केन्द्र व प्रदेश सरकार स्वच्छ भारत मिशन को लेकर सजग है साथ ही जिले को ओडीएफ होने का जिले के अधिकारी दावा करते हैं। लेकिन महेवा विकास खंड की ग्राम पंचायत दिलीपनगर मडैया में बने शुलभ शौचालय में ताला पड़े होने के चलते ग्रामीण परेशान हैं। जिम्मेदार अधिकारी व जनप्रतिनिधि कुछ नहीं कर पा रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि जहां एक ओर लोगों को खुले में शौच न जाने के लिए स्वच्छ भारत मिशन के तहत सामुदायिक शुलभ शौचालय गाँव में खोले जा रहे हैं।
मडैया दिलीपनगर में बने शुलभ शौचालय में ताला पड़े होने से ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस मामले में कोई भी अधिकारी व जनप्रतिनिधि इसका ताला खुलवाने का काम नहीं कर रहा है। जिसके कारण लोग बहुत परेशान हैं। लोगों को मजबूरन खुले में शौच के लिए जाना पड़ रहा है। वहीं बसरेहर विकासखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत रैपुरा में बना सामुदायिक शौचालय आठ माह से नहीं खुल रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि कई बार अधिकारियों से इसकी शिकायत की गई लेकिन मामला ज्यों का त्यों बना है। जबकि शौचालय मेंटिनेंस व मरम्मत कार्य के लिए 76531 रुपए नवंबर 2024 को निकाले गये और केयर टेकर का भुगतान मार्च से सितंबर तक का 30000 रुपये भी अक्टूबर 2024 को निकाल लिए गये है लेकिन फिर भी सामुदायिक शौचालय में ताला ही लगा रहता है।ग्रामीणों ने आरोप लगाते हुए बताया कि प्रशासन द्वारा ग्राम पंचायत में सामुदायिक शौचालय तो बना दिया गया लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते उसका ताला नहीं खुलता है। ग्रामीणों ने मांग करते हुए कहा कि ग्राम पंचायत रैपुरा में बने सामुदायिक शौचालय का ताला खुलवाया जाए जिससे बुजुर्ग व अन्य लोगों को परेशानियों का सामना न करना पड़े। ग्राम बीना में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर मरीजों को शौचालय तक के लिए भटकना पड़ता है। यहां शौचालय के लिए मरीज व स्टाफ को बाहर जाना पड़ता है। इकदिल कस्बा में लोगों की सुविधा के लिए बनवाए गए शौचालयों की अनदेखी से उनका हाल बेहाल है। साफ-सफाई न होने से उसमे गंदगी पसरी रहती है। आम लोग उनमें जाने से भी कतराते हैं। स्वच्छता अभियान के तहत नगर में कई जगह शौचालयों का निर्माण कराया गया। उनकी देखरेख के लिए कर्मचारी नियुक्त हैं, इसके बावजूद उनको बेहतर निगरानी की आवश्यकता है। इंधौआ रोड के सामने फब्बारा चौराहे पर मूत्रालय की स्थित बेहद दयनीय है। कई-कई महीनों तक उसकी सफाई ही नहीं होती। तमाम राहगीर, आसपास के दुकानदार और बाजार आई महिलाए जाने से ही कतराती हैं। नगर में महिला-पुरुष के लिए बनवाए गए शौचालय में पिछले छह महीनों से पानी की समस्या बनी हुई है। इस कारण लोगों को काफी दिक्कतें हो रही हैं। नगर पंचायत द्वारा नगर के मुख्य मार्ग गेट पर सार्वजनिक शौचालय है। दुर्दशा का आलम यह है कि महिला शौचालय के अंदर चार महीने से सफाई नही की गई और शौचालय के बाहर हाथ धोने के लिए लगे वॉशबेसिन में टोंटी नही है उसके ऊपर पानी की दो टंकी तो रखवा दी गई लेकिन उसमें पानी नही भरा जाता है। एक तो पास में रखे ट्रांसफ़ॉर्मर के मकड़ तार लटक रहें इसे भी लोगों को डर लगा रहता। राहगीरों के लिए बनायें गये शौचालय में पानी न होने व गंदगी के कारण ऐसे में भला महिलाएं कैसे टायलेट जाएं। वहीं गंदगी का भी साम्राज्य रहता है। इसलिए महिलायें खुले में टॉयलेट करने को मजबूर हैं। ..... -..... शहर में अधिकांश शौचालय में लटक रहा ताला इटावा। नगर पालिका क्षेत्र में सार्वजनिक व सामुदायिक शौचालय की प्रमुख समस्या इनमें लगे ताले है। 25 से 30 लाख रुपए तक खर्च करके बनाए गए इन शौचालय में अब तक ताले नहीं खुले। इनमें करनपुरा, सराय दयानंद, मकसूदपुरा, रानी बाग के साथ ही शहर के कई अन्य इलाकों में एमआरएफ सेंटर या फिर पानी की टंकी के पास बनाए गए शौचालय शामिल है। वहीं दूसरी ओर शहर क्षेत्र में पिंक टॉयलेट का निर्माण भी अब तक नहीं हो सका। नगर पालिका परिसर के अंदर बनाए जा रहे पिंक टॉयलेट का काम भी अधूरा पड़ा है। वहीं दूसरी ओर जो सार्वजनिक या सामुदायिक शौचालय संचालित हैं उनकी दशा भी बहुत खराब है। गंदगी, टूटे दरवाजे और अन्य सुविधाओं के कारण लोग यहां जाने से भी कतराते हैं। 00 बोले जिम्मेदार- नगर पालिका क्षेत्र में जो भी समुदायिक या सार्वजनिक शौचालय हैं वह क्यों बंद है इसकी जानकारी की जाएगी। दरअसल अब इन शौचालय का प्रयोग करने वाले लोग कम है, ऐसे में इनके संचालन को लेकर एक बार फिर से निर्णय लिया जाएगा। - संतोष कुमार मिश्र, ईओ नगर पालिका

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