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इटावा में लॉयन सफारी में नेचर वॉक, पौधों और चिड़ियों की देखी दर्जनों प्रजातियां

इटावा में लॉयन सफारी में नेचर वॉक, पौधों और चिड़ियों की देखी दर्जनों प्रजातियां

संक्षेप:

Etawah-auraiya News - इटावा सफारी पार्क में रविवार को एक नेचर वॉक का आयोजन किया गया, जिसमें शिक्षकों, डाक्टरों और समाज के अन्य वर्गों के लोगों ने भाग लिया। उन्हें पौधों और चिड़ियों की विभिन्न प्रजातियों के बारे में जानकारी...

Aug 24, 2025 10:45 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, इटावा औरैया
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इटावा सफारी पार्क में रविवार की सुबह नेचर वॉक कराई गई। इसमें बड़ी संख्या में शिक्षकों, डाक्टरों तथा समाज के अन्य वर्गों के लोगों ने भागीदारी की। इस नेचर वॉक के दौरान उन्हें पौधों तथा चिड़ियों की दर्जनों प्रजातियों के बारे में जानकारी दी गई और उनसे रूबरू भी कराया गया। रविवार की सुबह सफारी के डिप्टी डायरेक्टर डा. विनय सिंह, वन्य जीव विशेषज्ञ डा. राजीव चौहान के नेतृत्व में यह नेचर वाक कराया गया। इस नेचर वॉक में सफारी के बायोलॉजिस्ट बीएन सिंह ने पेड़, पौधों तथा चिड़ियों की विभिन्न प्रजातियों की जानकारी दी और उनसे रूबरू भी कराया। इस नेचर वॉक के दौरान पौधों की 35, चिड़ियों की 17, कीटों की 11 और तितलियों की 8 प्रजातियों से लोगों को रूबरू कराया गया और उनके बारे में जानकारी भी दी गई।

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यह भी बताया गया कि यह किस स्थान पर पाए जाते हैं और जीवन में यह किस तरह से उपयोगी हैं। यह नेचर बॉक सफारी की नेचर ट्रेल पर कराया गया।दो घंटे तक चले इस नेचर वॉक में लोगों को जैव विविधता के बारे में भी जानकारी दी गई। डिप्टी डायरेक्टर डा. विनय सिंह ने बताया कि सफारी क्षेत्र अब जैव विविधता की नई इबारत लिख रहा है। यहां उसकी जैव विविधता को सूचीबद्ध भी किया गया। उन्होंने कहा कि बीमारियों से बचने के लिए हमें प्रकृति के करीब जाना होगा। स्कॉन महासचिव डा. राजीव चौहान ने बताया कि नेचर वाक काब मुख्य अर्थ लोगों को प्रकृति, पेड़ पौधों और चिड़ियों के करीब ले जाना और उनसे लगाव पैदा करना है। इस नेचर वॉकिंग जागरूक लोगों के साथ ही सफारी के अधिकारी कर्मचारी भी मौजूद रहे। नेचर वाक के दौरान वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ डा. डीके दुबे ने रामचरितमानस की एक रोचक चौपाई के माध्यम से यह बताया कि वर्षा ऋतु का समापन होने की स्थिति किस तरह से पता चल जाती है। उन्होंने सुनाया फूले कांस सकल महि छाई, जनु वर्षा कृत प्रगट बुढ़ाई। इसका अर्थ है कि जब कांस के सफेद फूल छा जाते हैं तो यह माना जाता है कि अब वर्षा का बुढ़ापा आने वाला है।