
इटावा में उर्स रद्द होने से नाराजगी, फिशरवन मजार मामले में प्रशासन हाई अलर्ट
Etawah-auraiya News - इटावा के फिशरवन क्षेत्र में मजार विवाद बढ़ता जा रहा है। उर्स की अनुमति न मिलने से वन विभाग और पुलिस अलर्ट हैं। मजार के केयरटेकर ने दावा किया कि यह मजार 800-900 साल पुरानी है और धार्मिक आस्था का केंद्र है। वन विभाग ने कड़े कदम उठाए हैं और मजार तक जाने वाले रास्ते पर पुलिस तैनात की गई है।
इटावा, संवाददाता। फिशरवन क्षेत्र में मजार विवाद को लेकर हालात और संवेदनशील होते जा रहे हैं। प्रस्तावित उर्स की अनुमति न मिलने के बाद वन विभाग और पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है। वहीं, मजार से जुड़े पदाधिकारियों और अल्पसंख्यक समाज की नाराजगी भी खुलकर सामने आ रही है। बढ़पुरा वन रेंज अफसर अशोक कुमार शर्मा ने बताया कि फिशरवन में मजार का मामला सामने आने के बाद सबसे पहले मजार के केयरटेकर फजले इलाही को नोटिस जारी किया गया था। नोटिस के जरिए उनसे 22 जनवरी तक मजार से संबंधित जमीन के दस्तावेज मांगे गए थे, लेकिन तय समय सीमा पूरी होने तक वन विभाग को कोई भी वैध दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि दस्तावेजों के अभाव में विभाग को वन अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई करनी पड़ी। वहीं, मजार के केयरटेकर फजले इलाही ने वन विभाग की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि फिशरवन में स्थापित यह मजार करीब 800 से 900 साल पुरानी है और इसका मोहम्मद गोरी के सेनापति शमसुद्दीन से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि झूठी शिकायत के आधार पर धार्मिक आस्था के केंद्र को अवैध बताकर ध्वस्त करने की कोशिश की जा रही है। फजले इलाही का कहना है कि उनके पास जमीन के कागजी दस्तावेज भले न हों, लेकिन वे और उनके पूर्वज पिछले 50 वर्षों से लगातार उर्स का आयोजन कराते आ रहे हैं। उर्स रद्द होने से मुस्लिम समुदाय में भारी नाराजगी है। मजार के प्रबंधक मुस्तकीम राईनी ने बताया कि वन विभाग की ओर से दिए गए नोटिस के जवाब में मजार से जुड़े सभी उपलब्ध साक्ष्य विभाग को सौंप दिए गए हैं। इनमें पूर्व वर्षों में मजार पर आयोजित उर्स की प्रशासनिक अनुमति और अन्य पुराने फोटोग्राफ शामिल हैं। इधर, कानून-व्यवस्था को लेकर पुलिस भी पूरी तरह सतर्क है। एसएसपी बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि भले ही मजार का मामला वन विभाग देख रहा हो, लेकिन शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए मजार तक जाने वाले रास्ते पर पुलिस की सघन तैनाती की गई है। किसी भी व्यक्ति को मजार तक पहुंचने की अनुमति नहीं दी जाएगी। खुफिया पुलिस को भी सतर्क किया गया है और रात में पुलिस बल लगातार भ्रमणशील रहेगा। डीएफओ विकास नायक ने कहा कि उर्स की सूचना मिलने के बाद वन अधिनियम के तहत कठोर कदम उठाए गए हैं। मजार तक जाने वाले रास्ते को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है, 24 घंटे वन कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है और चेतावनी बोर्ड लगाकर क्षेत्र को सील किया गया है। अब 5 फरवरी को प्रस्तावित सुनवाई के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी।

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