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पीतांवरा महायज्ञ में उमड़ रही आस्था,आहूतियां देने की होड़

पीतांवरा महायज्ञ में उमड़ रही आस्था,आहूतियां देने की होड़

संक्षेप: Etawah-auraiya News - फोटो.33. यज्ञ स्थल पर मौजूद श्रद्धालुओं का हुजूमफोटो.34. भंडारे में प्रसाद ग्रहण करते श्रद्धालुइटावा, संवाददाता।रामलीला मैदान के निकट हिन्दू हॉस्टल के

Thu, 13 Nov 2025 11:27 PMNewswrap हिन्दुस्तान, इटावा औरैया
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इटावा, संवाददाता। रामलीला मैदान के निकट हिन्दू हॉस्टल के प्रांगण में आयोजित हो रहे मृत्युंजय मां पीतांबरा महायज्ञ में यजमानों का मेला उमड़ रहा है। षष्ठम दिवस गुरुवार को प्रात:, दोपहर और रात्रि कालीन तीनों पालियों में हवन करने के लिए श्रद्धालुओं में होड़ लगी रही। रात्रि बेला में भी यज्ञ करने के लिए काफी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं वही हजारों श्रद्धालुओं के द्वारा प्रतिदिन यज्ञ कुंड की परिक्रमा भी की जा रही है। गुरुवार को सुबह 8 बजे आरंभ हुई स्वाहा की पवित्र ध्वनियां रात्रि 12 बजे तक आकाश में गूंजती रहीं। घृत की आहुति से अग्नि ज्वालाएँ दिव्यता का स्वरूप बनकर उठीं और सम्पूर्ण परिसर को अदृश्य तेजस्विता से आलोकित कर गईं।

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यह केवल यज्ञ नहीं बल्कि सृष्टि और चेतना का पुनर्संयोजन है। माँ पीतांबरा की आराधना के माध्यम से यह महायज्ञ, मृत्युंजय तत्त्व की उस रहस्यमयी शक्ति को जाग्रत करता है जो भय, रोग, दुर्भाग्य और मृत्यु जैसी सीमाओं को लाँघ कर जीवन को अमृतत्व की ओर अग्रसर करती है। देववाणी में कहा गया है “यज्ञो वै श्रेष्ठतमं कर्म” यज्ञ ही सर्वोत्तम कर्म है, क्योंकि यहीं से धर्म की जड़ें, आत्मा की शुद्धि और लोककल्याण की धारा प्रवाहित होती है। मृत्युंजय माँ पीतांबरा महायज्ञ का प्रत्येक कुंड, ब्रह्मांड के एक तत्व का प्रतिनिधि है। यह यज्ञ, न केवल व्यक्तिगत कल्याण का मार्ग है, बल्कि समष्टि के शुद्धिकरण का माध्यम भी है साथ ही यज्ञ धन की शुद्धि का भी सबसे उपयुक्त साधन हमारे वेदों में बताया गया है इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपनी आय का दशांश यज्ञ में समर्पित करना चाहिए। यज्ञ सम्राट रामदास महाराज का आह्वान है कि जो व्यक्ति धर्म के इस यज्ञाग्नि में आहुति देता है, वह अपने भीतर और बाहर दोनों में शुद्धि का अनुभव करता है।अत: प्रत्येक सनातनी को इस दिव्य अनुष्ठान में सम्मिलित होकर माँ पीतांबरा के चरणों में अपनी श्रद्धा समर्पित करनी चाहिए। महायज की पूर्णाहुति 16 नवम्बर तथा भव्य भंडारा 17 नवम्बर को होगा। यज्ञ व्यवस्था बनाने में नीरज तिवारी, जनमेजय सिंह भदौरिया, पंकज तिवारी बबलू, कुलदीप अवस्थी, अजय दीक्षित, अल्लू ठाकुर, पूनम पाण्डेय, नमिता तिवारी, प्रीती दुबे, धर्मेंद्र मिश्रा, अमित दीक्षित, मनोज पांडे कुक्कू राजौरिया, अनिकेत श्रीवास्तव का सहयोग रहा। पीतांबरी रंग में रंगा हुआ है यज्ञ स्थल और आसपास का क्षेत्र इटावा। मां पीतांबरा को पीला रंग सर्वाधिक प्रिय है इस लिए यज्ञ स्थल और आसपास का क्षेत्र इस समय पीतांबरी रंग में रंगा हुआ है। बच्चों से लेकर बड़े तक सभी पीत बस्त्र पहनकर ही यज्ञ में आहुतियां देने के लिए पहुंच रहे हैं। महायज्ञ को लेकर महिलाओं में सबसे अधिक उत्साह है तीन पारियों में होने वाले यज्ञ में महिलाओं की संख्या सबसे अधिक हो रही है । सुबह से ही यज्ञ की परिक्रमा करने का सिलसिला शुरू हो जाता है जो देर रात तक चलता रहता है 1108 कुंड वाली यज्ञशाला की परिक्रमा श्रद्धालु काफी श्रद्धा भाव और उत्साह के साथ कर रहे हैं।