
इटावा में श्रद्धाभाव से मना मकर संक्रांति का पर्व, खूब हुआ दानपुण्य
Etawah-auraiya News - मकर संक्रांति का पर्व श्रद्धा के साथ मनाया गया। सूर्य देव ने दर्शन दिए और लोगों ने दान पुण्य किया। खिचड़ी भोज और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित हुए। यमुना नदी में पानी की कमी के कारण घाटों पर सन्नाटा था। बच्चों और युवाओं ने पतंग उड़ाने में भी उत्साह दिखाया, बाजारों में विविध पतंगों की बिक्री हुई।
मकर संक्रांति का पावन पर्व गुरुवार को श्रद्धाभाव के साथ परंपरागत ढंग से मनाया गया। त्यौहार के मौके पर सुबह से सूर्यदेव ने दर्शन दे दिए थे जिसके चलते लोगों के उत्साह में कोई कमी नहीं रही और जमकर दान पुण्य किया। इस मौके पर जगह जगह धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। वहीं शहर में कई स्थानों खिचड़ी भोज व भंडारे आयोजित हुये। यमुना नदी में घाटों पर पानी ना होने के चलते सन्नाटा पसरा रहा। पौष शुक्ल प्रतिपदा को सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इसी के साथ ही मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। इस बार मकर संक्रांति पर सूर्य देव ने बुधवार की शाम 3 बजे के बाद मकर राशि में प्रवेश किया था और षटतिला एकादशी भी थी इसी कारण गुरुवार को मकर संक्रांति का पर्व को मनाया गया।
खड़खड़िया गाड़ी की खूब हुयी खरीददारी संक्रांति त्यौहार पर मिट्टी की बनी खड़खड़िया गाड़ी की भी खूब बिक्री हुई । इसी गाड़ी में लोगों ने विभिन्न प्रकार का सामान रखकर दान किया। इस गाड़ी का प्रयोग बच्चों ने अपने खेलने के लिए किया क्यों कि खड़खड़िया गाड़ी सिर्फ मकर संक्रांति के एक दिन पूर्व से ही बिक्री की जाती है। दान पुण्य करने वाले सामानों की भी लोगों ने बाजारों से जमकर खरीदारी की। हिंदू घरों में मकर संक्रांति के मौके पर रामचरितमानस अखंड पाठ, सुंदरकांड पाठ, भगवान सत्यनारायण की कथा, भजन कीर्तन के कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। त्यौहार पर सन्नाटे में डूबे रहे यमुना किनारे के घाट मकर संक्रांति के पर्व पर सूर्य भगवान की उपासना का विशेष महत्व होता है। इसलिए अधिकतर लोगों ने भगवान भास्कर को अर्घ्य देकर उनके मंत्र जाप करने के साथ आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ भी किया। मकर संक्रांति पर पावन नदियां या सरोवर में डुबकी लगाने का विशेष महत्व होता है। यहां पर चतुर्दिक वाहिनी यमुना हैं लेकिन यमुना में घाटों पर पानी नहीं है जिसके कारण घाटों पर सन्नाटा पसरा रहा और कुछ श्रद्धालुओं को घाटों से दूर जाकर डुबकी लगानी पड़ी। नगर पालिका के द्वारा त्यौहार को लेकरकोई व्यवस्था नहीं की गई थी। पानी कम होने के कारण अधिकतर लोग डुवकी लगाने के लिए यमुना नहीं पहुंचे उन्होंने अपने घरों पर ही पानी में गंगाजल डालकर स्नान करने के बाद दान किया। युवाओं और बच्चों ने खूब उड़ायीं पतंगें मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की भी एक परंपरा है। युवा और बच्चों में पतंगबाजी का काफी शौक रहता है लेकिन इस बार पतंग उड़ाने को लेकरकाफी उत्साह दिखाई दिया। त्यौहार को लेकर बाजारों में भी विक्रेताओं के द्वारा विभिन्न प्रकार की पतंगे लाई गई थी 5 रुपये से लेकर 60 रुपये तक की पतंग की बिक्री की गई। एक-एक बच्चे के द्वारा कई-कई पतंगें खरीदी गई । सुबह 10:00 बजे से बच्चे और युवा पतंगे उड़ानें लगे थे यह सिलसिला देर शाम तक चलता रहा ।

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