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22 अक्तूबर, 2020|1:01|IST

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महात्मा गांधी के विचारों ने जिले को दी क्रांति की मशाल

महात्मा गांधी के विचारों ने जिले को दी क्रांति की मशाल

गंगा-यमुना के दोआब में जिले ने क्रांति की लकीरों को अब भी सहेज कर रखा है। यही कारण है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की यात्रा को न सिर्फ इटावा के स्वर्णिम इतिहास में लिखा गया, बल्कि क्रांतिकारी आंदोलन की अनेक गाथाओं में इटावा का जिक्र आज भी शामिल है। साइमन कमीशन के खिलाफ हुए आंदोलन में गांधीजी की सहभागिता ने जिले को एक नई क्रांति में शामिल किया। 8 नवंबर 1928 को देश में संवैधानिक कार्यशैली की रूपरेखा तैयार करने के लिए तीन सदस्यीय साइमन कमीशन का गठन किया गया। किसी भारतीय सदस्य के शामिल न होने पर जब देश भर में साइमन कमीशन का विरोध शुरू हुआ तो इटावा भी पीछे नहीं रहा। यही कारण है कि तत्कालीन क्रांतिकारी छात्रों ने 29 नवंबर 1928 को शहर के राजकीय इंटर कॉलेज छात्रावास में प्रार्थना सभा के बाद ही विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। साइमन कमीशन वापस जाओ के नारों के साथ पूरा जीआईसी मैदान गूंज उठा। अंग्रेज सरकार की दमनकारी नीतियों और आंदोलन को दबाने के लिए निहत्थे छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया। इस दौरान आगजनी की घटना में हॉस्टल में रहने वाले छात्रों का सामान भी फूंक दिया गया। आंदोलन की गति इतनी तेज हुई कि इटावा समेत आसपास के कस्बाई इलाकों इकदिल, अछल्दा, कंचौसी में भी आंदोलन ने गति पकड़ ली। कमीशन के विरोध में छात्रों के इस प्रदर्शन ने दिल्ली की राजनीति को भी हिला कर रख दिया। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने इस दमनकारी अंग्रेज सरकार की कार्यवाही पर तीखा प्रहार करते हुए दिल्ली से इटावा के लिए कूच किया। रेलवे स्टेशन पर उन्होंने एक सभा को भी संबोधित किया। जिसके बाद जीआईसी छात्रावास पहुंचकर उन्होंने घायल छात्रों का हालचाल जाना। किसान, वकील, अध्यापक ,छात्र, मजदूर सब इस आंदोलन से जुड़े इसके लिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने एकजुटता का संदेश देते हुए साइमन कमीशन के खिलाफ राष्ट्रव्यापी आंदोलन को गति दी। उत्साही जनसमूह ने आंदोलन को आग की तरह फैलाने का संकल्प लिया। इटावा के अलावा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने इकदिल, कंचौसी, भरथना व अछल्दा में भी जनसभा का आयोजन किया। इस आंदोलन के बाद 2 फरवरी 1929 को जब साइमन कमीशन के सदस्य मुंबई पहुंचे तो देश भर में पुरजोर विरोध के साथ इटावा के छात्र छात्राओं समेत विभिन्न संगठनों ने भी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के दिए हुए संदेश के बल पर आंदोलन को गति प्रदान की।

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  • Web Title:Mahatma Gandhi 39 s ideas gave the district the torch of revolution