Hindi NewsUttar-pradesh NewsEtawah-auraiya NewsFarmers Struggle with Sandy Soil Deposits Due to Yamuna Floods
 बाढ़ के बाद खेतों में जमी रेत और मिट्टी की परत, किसान बुवाई कों परेशान हजारों खर्च करने के बावजूद पुलिस और

बाढ़ के बाद खेतों में जमी रेत और मिट्टी की परत, किसान बुवाई कों परेशान हजारों खर्च करने के बावजूद पुलिस और

संक्षेप:

Etawah-auraiya News - फोटो-9 यमुना नदी के किनारे खेतों में जमी बालू की मोटी परतबकेवर, संवाददाता। इस साल जिले में यमुना नदी में दो बार आई बाढ़ के कारण नदी किनारे के खेतों में रेतीली मिट्टी की परत जमा हो गयी है। जिसके कारण...

Nov 16, 2025 06:22 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, इटावा औरैया
share Share
Follow Us on

फोटो-9 यमुना नदी के किनारे खेतों में जमी बालू की मोटी परत बकेवर, संवाददाता। इस साल जिले में यमुना नदी में दो बार आई बाढ़ के कारण नदी किनारे के खेतों में रेतीली मिट्टी की परत जमा हो गयी है। जिसके कारण किसानों के सामने खेतों में रबी की फसल की बुवाई का संकट खड़ा है। करीब एक से डेढ़ फीट मोटी रेतीली मिट्टी की परत को हटाने में किसानों का काफी खर्च आ रहा है। ऊपर से पुलिस व प्रशासन उन्हें जमी मिट्टी की परत को खनन के तहत आने की बात कह कर हटाने नहीं दे रहे हैं। ऐसे में किसानों के सामने नया संकट खड़ा है, बुवाई का समय निकलता जा रहा है।

LiveHindustan को अपना पसंदीदा Google न्यूज़ सोर्स बनाएं – यहां क्लिक करें।

सरसों, आलू व गेहूं की बुवाई इस समय चल रहा है। यह किसी एक गांव की बात नहीं बल्कि यमुना नदी के किनारे के स्थित करीब 20 गाँवों की स्थिति है। इसके साथ ही महेवा, बढ़पुरा, चकरनगर, जसवंतनगर ब्लॉकों के यमुना व चंबल नदी किनारे बसे एक सैकड़ा से अधिक गाँवों की यहीं स्थिति है। यमुना नदी में इस साल बरसात के मौसम में दो बार आयी। जिससे किनारे के खेतों में खड़ी किसानों की खरीफ की फसल डूबने से नष्ट हो गयी थी। बाढ़ का पानी उतरने के बाद नदी किनारे के खेतों में रेतीली मिट्टी जमा हो गयी।अब किसानों को रबी की फसल की बुआई के लिए रेतीली मिट्टी को उठवाने के लिए परेशान होना पड़ रहा है। किसान निजी खर्च कर टैक्टर के कराह से अपने खेत में जमी मिट्टी को हटाकर नदी की तरफ कर रहे हैं। जिसमें उनका हजारों रुपये का खर्चा आ रहा है। ऊपर से मिट्टी हटवाने पर पुलिस व खनन विभाग के लोग रोक रहे हैं। चकरनगर तहसील में आने वाले बकेवर क्षेत्र के दस गाँवों व लवेदी क्षेत्र के करीब 10 से अधिक गाँवों के एक सैकड़ा किसानों की करीब सौ एकड़ जमीन हैं। इन किसानों को सरसों, चना, गेहूं एवं अन्य फसलों की बुआई करना भी आसान नहीं लग रहा है। बहादुरपुर गांव के किसान नरेंद्र सिंह , मुन्ना, अनूप ने बताया कि उसकी जमीन यमुना तट के पास ही है। उसकी सात एकड़ जमीन में कई दिनों तक पानी भरा रहा जब पानी उतरा तो पता चला कि पानी के साथ जों रेत आया था उसकी मोटी परत बन गई है। उन्होंने कहा, हमने मिट्टी हटाने का काम शुरू कर दिया है, लेकिन यह कहना मुश्किल है कि जमीन की उपजाऊ शक्ति पर इसका क्या असर पड़ेगा। बिझाउली गांव के निवासी गम्भीर, सुरेश, रोशन आदि किसानों का कहना है कि कुछ जमीन ठेके पर ली गई है और कुछ उनकी पैतृक है। हर साल नदी में बरसात के मौसम में बाढ़ आ रही है उन्हें एक ही फसल मिल पाती थी लेकिन इस बार खेतों में मिट्टी, गाद और रेत अधिक जम गई है। उसे निकालने की अनुमति दी जाए। खेतों में दो फीट से लेकर तीन फीट रेत जमा है। जिससे किसानों को काफी परेशानी हो रही है वे सरकारी सहायता का अभी भी इंतजार कर रहे है तो कुछ किसान अपने स्तर से रेत हटाने का प्रयास कर रहे हैं। कन्धेसी निवासी किसान राजेंद्र, अर्जुन, जसवंत सिंह का कहना है कि इस बार डेढ़ फीट तक रेत खेत में जम गया है। इस रेत ने खेत में खड़ी फसल नष्ट कर दी थी है। मेरे खेत में जितना रेत आया है, वह रेत भी मेरा है। इसे उठाने का अधिकार भी मुझे ही मिलना चाहिए। हर वर्ष नदी के आस पास गांवों की करीब सौ एकड़ से अधिक जमीन पर फसल खराब होती है। जब खेत हमारे है तो कम से कम रेत को उड़ाने दिया जाए तो कम से कम एक फसल तो मिल जाएगी। एसडीएम चकरनगर ब्रह्मानंद कठेरिया ने कहा कि उनके पास अभी कोई ऐसी शिकायत लेकर नहीं आया हैं। जिन किसानों के खेतों में रेत की परत जम गई वे सभी किसान सूची बनाकर ग्राम प्रधान से संस्तुति कराकर उपलब्ध करा दें। उनको खेत में जमी रेत की परत उठवाने की अनुमति दी जाएगी।