
खेतों में धड़ल्ले से जलाई जा रही पराली, जुर्माने का भी नही है डर जिले में पराली जलाने पर हो चुका है
Etawah-auraiya News - फोटो 1 फसल की कटाई के बाद खेतों में जलती परालीइटावा, संवाददाताखेतों में फसल की कटाई के बाद पराली ना जलाने के लिए किसानों को जागरुक किया गया है। यह व्यवस्था भी है कि पराली जलाने पर जुर्माना भी किया...
फोटो 1 फसल की कटाई के बाद खेतों में जलती पराली इटावा, संवाददाता खेतों में फसल की कटाई के बाद पराली ना जलाने के लिए किसानों को जागरुक किया गया है। यह व्यवस्था भी है कि पराली जलाने पर जुर्माना भी किया जाएगा। इसके बाद भी जिले में अलग अलग स्थानों पर फसल की कटाई के बाद खेतों में धड़ल्ले से पराली जलाई जा रही है। स्थिति यह है कि जिले में रोक के बाद भी पराली जलाने पर 50 किसानों पर एक लाख 25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया जा चुका है, इसके बाद भी पराली जलाए जाने की घटनाएं नहीं रुक रहीं हैं।
ऐसा लगता है कि जागरुकता अभियानों का कोई असर नही हुआ और जुर्माना का डर भी पराली जलाने वाले किसानों को रोक नही सका है। पराली जलाने से रोकने के लिए सरकार ने फसल अवशेष प्रबंधन के लिए काफी खर्चा भी किया है, इसके बावजूद हालात यह हैं कि किसान खुलेआम खेतों में पराली जला रहे हैं। बकेवर, ऊसराहार, ताखा क्षेत्र की ही बात करें तो इस क्षेत्र में नसीदीपुर, नसीरपुर बोझा, चिकनी और रमपुरा में इन दिनों शाम के समय खेतों पर पराली जलती हुई देखी जा सकती है। इससे क्षेत्र का वातावरण प्रदूषण से भर गया है और लोगों को सांस लेने में भी परेशानी हो रही है। इसका एक कारण यह भी बताया गया है कि पराली प्रबंधन मशीनें पर्याप्त संख्या में नहीं हैं और जो उपलब्ध हैं, वे किसानों तक समय पर नहीं पहुंच पातीं। इसके अलावा अधिकारियों की लापरवाही और निगरानी की कमजोर व्यवस्था से भी पराली जलाने वाले किसानों के हौसले बुलंद हैं। खेतों में पराली ना जलाई जाए इसके लिए कृषि विभाग के साथ ही अन्य विभागों को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन विभागाें के बीच तालमेल की कमी के कारण शासन की पराली नियंत्रण योजना सिमट कर रह गई है। एक ओर सेटेलाइट से निगरानी और जुर्माना लगाने की बात की जा रही है लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि ज्यादातर किसान बिना किसी रोक-टोक के खेतों में पराली में आग लगा रहे हैं। यदि प्रशासन निगरानी को मजबूत करे, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करे तो पराली जलाने पर अंकुश लगाया जा सकता है। अभी तो स्थिति यह है कि जुर्माना लगाने के बाद भी किसान पराली जलाना बंद नही कर रहे हैं। इनसेट जागरुकता के लिए रथ भी चलाए इटावा। किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान बताने और पराली प्रबंधन बताने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत जिले में चार जागरुकता रथ बनाए गए हैं, यह रथ पूरे जिले में अलग अलग स्थानों पर जाकर किसानों को जागरुक करते रहे हैं। वर्तमान में भी कृषि विभाग की ओर से एक जीप चलाई जा रही है और इस जीप में बैठे कृषि विभाग के कर्मचारी किसानों को यह बता रहे हैं कि पराली ना जलाएं बल्कि पराली का लाभदायक प्रबंधन करें, इससे पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण से बचा जा सकेगा। इनसेट किसानों को लगातार इस बात के लिए जागरुक किया जा रहा है कि पराली को ना जलाएं बल्कि पराली का उचित प्रबंधन करें। इसे गौशाला में भी दे सकते हैं। पराली जलाने पर जुर्माना लगाए जाने का प्रावधान भी किया गया है। आरएन सिंह उप निदेशक कृषि इनसेट कृषि भवन में आज किसान दिवस इटावा। किसान दिवस का आयोजन माह के तृतीय बुधवार 19 नवम्बर को सुबह 11 बजे से अपरान्ह 2 बजे तक किया जायेगा। यह कृषि भवन में होगा। इसमें किसान दिवस में कृषि और कृषि से जुड़े सभी विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी किसानों की समस्याओं का समाधान करेंगे।

लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




