DA Image
23 सितम्बर, 2020|9:49|IST

अगली स्टोरी

स्वयं सहायता समूहों को पुष्टाहार सौंपे जाने को फेल करने में लगे हैं ठेकेदार

default image

महिलाएं कर रही इंतजार, कब मिलेगा काम, आठों ब्लॉकों में मिलनी है जिम्मेदारीइटावा। हिन्दुस्तान संवादजिले के आठों ब्लॉकों में संचालित आंगनबाड़ी केन्द्रों पर बच्चों को पुष्टाहार दिए जाने की जिम्मेदारी अब स्वयं सहायता समूहों को सौंपी जानी है। करीब दो माह पहले यह निर्णय ले लिए जाने के बाद उसे अभी तक धरातल पर नहीं उतारा जा सका है। पहले से इस विभाग में पुष्टाहार देने वाले ठेकेदार नहीं चाहते कि यह जिम्मेदारी उनके हाथ से निकलकर स्वयं सहायता समूहों तक पहुंचे। ऐसा हुआ तो वे खाली हाथ रह जाएंगे। जिले में जो 1564 आंगनबाड़ी केन्द्र हैं उन सभी पर पुष्टाहार की आपूर्ति की जानी है जो बच्चों को खिलाया जाता है। अभी तक जो व्यवस्था चली आ रही है उसमें इस कार्य के लिए एक कम्पनी है। यह कम्पनी लखनऊ से पुष्टाहार की सप्लाई करती है और जिला मुख्यालय से ब्लॉकों और फिर आंगनबाड़ी केन्द्रों तक पहुंचाने का कार्य भी यही कम्पनी करती है। पुष्टाहार के ब्लॉक मुख्यालय पर पहुंच जाने के बाद उसका सत्यापन कराया जाता है और फिर कम्पनी ही उसे गांवों तक पहुंचाती है। जानकारों का मानना है कि इसमें खूब खेल भी होता है जिसकी शिकायतें भी आती रहतीं हैं। अब नये निर्णय के अनुसार यह कार्य स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं की सौंपा जा रहा है। इसके लिए आठो ब्लॉकों में स्थान का चयन भी कर लिया गया है जहां यह महिलाएं पुष्टाहार तैयार करेंगी। इसके बाद महिलओं का चयन किया जाएगा। अब यह व्यवस्था स्वयं सहायता समूहों के हाथ में पहुंच जाने से ठेकेदारों के हाथ तो खाली रह जाएंगे। समझा जाता है कि इसीलिए स्वयं सहायता समूहों को यह व्यवस्था सौंपने में अड़ंगा लगाया जा रहा है ताकि ठेकेदारों का खेल चलता रहे। सवाल यह है कि करीब दो माह पहले यह निर्णय ले लिया गया और स्थान भी चिन्हित कर लिए गए लेकिन अभी तक योजना को धरातल पर क्यों नहीं उतारा जा सका। अभी इस योजना में पुष्टाहार बनाने के लिए महिलाओं का चयन किया जा रहा है और काम की जो रफ्तार है उसके चलते इसे शुरू होने में करीब एक माह का समय और लग जाएगा। तब तक ठेकेदार मौज करते रहेंगे। स्वयं सहायता समूह की महिलाएं पुष्टाहार तैयार करेंगे जिसे आंगनबाड़ी केन्द्रों पर वितरित किया जाएगा। इसके लिए सभी ब्लॉकों में स्थान का चयन कर लिया गया है। अब पुष्टाहार बनाने के लिए समूहों की महिलाओं का चयन किया जा रहा है। जल्द ही इस योजना को धरातल पर उतारा जाएगा। बृजमोहन अम्बेड उपायुक्त एनआरएलएमनहीं हुए मनमाफिक काम, अब कैसे मांगे वोटकोरोना काल प्रधानों पर पड़ रहा भारीसाढ़े तीन महीने में वोटरों को खुश करना प्रधान जी के लिए बड़ी चुनौतीइटावा। हिन्दुस्तान संवादग्राम प्रधानों का कार्यकाल अब सिर्फ साढ़े तीन महीने का बचा है और इतने समय में वोटरों को खुश करना बड़ी चुनौती है। बड़ी समस्या यह है कोरोनाकाल के चलते वर्तमान वित्तीय वर्ष में प्रधान अपने मनमाफिक काम नहीं कर पाए हैं जो उनके लिए चुनावी डगर आसान करता। यही चुनाव में प्रधानों के लिए भारी पड़ सकता है। अब 25 दिसम्बर को प्रधानों का कार्यकाल पूरा हो जाएगा और फिर ग्राम पंचायतों में प्रशासक काम संभालेंगे जो प्रधानों के लिए कतई मुफीद नहीं होगा। इस कोरोनाकाल में काम तो हुए लेकिन प्रधानजी के मनमाफिक नहीं हुए यह प्रधानों के लिए एक बड़ी समस्या है। वर्ष 2015 में पंचायत चुनाव होने के बाद इस वर्ष दिसम्बर में ग्राम पंचायतों के चुनाव कराए जाने थे। इस लिहाज से यह वर्ष चुनावी वर्ष है। आमतौर पर चुनावी वर्ष में ग्राम प्रधान अपने गांवों में इस तरह काम कराते हैं जिससे क्षेत्र के अधिक लोग प्रसन्न है और इसका प्रधान जी को चुनावों में लाभ मिल जाएं। इसी तरह की तैयारी इस वर्ष भी थी लेकिन चुनावी वर्ष में कोरोना का ग्रहण लग गया। गांवों में कामकाज तो हुए लेकिन प्रधान जी जैसे कराना चाहते थे उस तरह से नहीं हुए। कई ग्राम प्रधानों ने बताया कि गांव में नाली खड़ंजा जैसे जनता से जुड़े कार्य कराने से जनता को सुविधा मिलती है जिससे गांव के लोग खुश भी होते हैं इस बार यह काम और तेजी से होने थे क्योकि चुनावी वर्ष था। इसके विपरीत इस वर्ष ऐसा कुछ नहीं हो पाया। कामकाज तो हुए लेकिन ग्राम प्रधानों के अनुसार नहीं हुए। नदियों और स्कूलों का कायाकल्प प्रधानों को रास आया नहीं और इन कामों पर काफी रकम खर्च कर दी गई। प्रधानों की मुश्किल यह भी है 25 दिसम्बर को कार्यकाल पूरा होने पर प्रशासक बैठाएं जाएंगे और तब वे ग्राम पंचायतों का संचालन अपने अनुसार करेंगे। प्रशासकों का काम कभी भी प्रधानों को पंसद आया नहीं। इसके चलते अब पंचायतों के जो चुनाव होंगे वे प्रधानों के लिए काफी मुश्किलभरे होंगे। प्रधानों को ही बनाया जाए प्रशासक: मलखानइटावा। सराय एसर के प्रधान तथा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष मलखान सिंह यादव ने मांग की है कि ग्राम प्रधानों का कार्यकाल पूरा हो जाने के बाद एडीओ पंचायत को प्रशासन न बनाकर ग्राम प्रधान को ही प्रशासक बनाया जाए। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने यही किया है। जब मध्य प्रदेश में ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाया गया है तो फिर उत्तर प्रदेश में ऐसा क्यों नहीं किया जा रहा है। एक देश में एक नियम ही लागू होना चाहिए। ग्राम प्रधान जनप्रतिनिधि हैं और उन्हे प्रशासन बनाने में सरकार को क्या परेशानी है। सरकार अधिकारियों को ही प्रशासक क्यों बनाना चाहती है। गांव- गांव जाकर बताएं कांग्रेस की नीतियां: मलखानइटावा। हिन्दुस्तान संवादकांग्रेस ही जमीन पर जनता के लिए कार्य कर रही है। पार्टी कार्यकर्ता गांव गांव जाकर कांग्रेस की नीतियां बताएं तथा लोगों को पार्टी के साथ जोड़ें। यह बात कांग्रेस जिलाध्यक्ष मलखान सिंह यादव ने कही। सैफई में रामपुरा में पार्टी की बैठक में उन्होंने कहा कि न्याय पंचायत स्तर पर न्याय पंचायत अध्यक्ष तथा बूथ अध्यक्ष का गठन गांव -गांव जाकर हम सभी को मिलकर करना है। यूपी में बढ़ते अपराधों से जनमानस के मन में खौफ है। प्रदेश महासचिव अनिल यादव ने कहा के हम सभी पदाधिकारी गांव- गांव जाकर लोगों को कांग्रेस सरकार द्वारा चलाई गई योजनाओं के बारे में बता कर अपने साथ जोड़ें। संचालन अरुण यादव ने किया। बैठक में मोहम्मद राशिद, राम नरेश यादव, आरबी सिंह पाल, आलोक यादव, शेखर यादव, विश्राम सिंह यादव, सरवर अली, जय राम नायक, हरिश्चंद्र यादव, विनय यादव, विकास शाक्य, अमित यादव, जयवीर सिंह यादव, कुलदीप सविता, शिव सिंह, मदन प्रजापति, रघुवीर यादव, विपिन नायक, अंशुल यादव, पंकज विनय, भीमसेन, अर्जुन सिंह, धर्मेंद्र, दीपक मौजूद रहे। कई लोगों ने कांग्रेस की सदस्यता भी ली। महिलाओं बच्चों व दिव्यांगों के अधिकारों पर वेबिनारफोटो-1 कार्यक्रम में मौजूद सिविल जज सीनियर डिवीजन नूहिन जैदी, मुंसिफ मजिस्ट्रेट दिव्या राणा। इटावा। हिन्दुस्तान संवादमहिलाओं बच्चों व दिव्यांगों के अधिकारों को लेकर विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से वेबिनार का आयोजन किया गया। इसमें इनके अधिकारों पर चर्चा हुई। प्राधिकरण की सचिव सिविल जज सीनियर डिवीजन नूहिन जैदी ने महिलाओं बच्चों व दिव्यांगों के अधिकार बताए। उनकी समस्याएं भी सुनी। वेबिनार में मुंसिफ मजिस्ट्रेट दिव्या चंद्रा,डीआईओ एस राजू राणा, जिला प्रोबेशन व दिव्यांगजन अधिकारी प्रशांत कुमार सिंह तथा प्रभारी कार्यक्रम अधिकारी सुरेश कुमार ने शामिल होकर इनके अधिकारों पर चर्चा की। इसके साथ ही अपने अपने विभागों की ओर से महिलाओं बच्चों तथा दिव्यांगों के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों की भी जानकारी दी। प्रधानाचार्यों तथा विभिन्न विभागों के कर्मचारियों ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान प्रतिभागियों से उनकी समस्याएं सुनी गईं। इन समस्याओं का निस्तारण भी किया गया। डीबीए ने शोक जतायाइटावा। पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के निधन पर डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए अधिवक्ता कार्य से विरत रहे। डीबीए महामंत्री साकेत शुक्ला ने बताया कि जिले भर के अधिवक्ता मंगलवार को शोक व्यक्त करते हुए न्यायिक कार्य से विरत रहे। डीबीए ने अधिवक्ता दिनेश कुमार सिंह के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। शिक्षक संघ का उपवास स्थगितइटावा। माध्यमिक शिक्षक संघ चन्देल गुट की ओर से शिक्षकों की समस्याओं को लेकर तीन सितम्बर को किया जाने वाला 24 घंटे का उपवास स्थगित कर दिया गया है। जिलाध्यक्ष पंकज कुमार सिंह चौहान ने बताया कि पूरे देश में सात दिन का शोक होने के कारण यह उपवास स्थगित किया गया है। शिक्षक संघ ने पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। गांव के स्कूल व पंचायत भवनों को फाइवर कनेक्टिविटीइंटरनेट की सुविधा का लिया गया फैसलाइटावा। हिन्दुस्तान संवादग्रामीण क्षेत्र में इंटरनेट सम्बंधी समस्याओं के निदान के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके तहत ग्राम पंचायत के शासकीय भवनों तथा विद्यालायों को फाइबर टू होम कनेक्टिविटी से जोड़ा जाएगा। जिससे इंटरनेट से सम्बंधित समस्याओं का निदान हो जाएगा। इनसे आए दिन परेशानी होती रहती है। जल्द ही इस योजना के प्रथम फेज का काम शुरू होगा। इसे बीएसएनएल, ग्राम पंचायत विभाग व बेसिक शिक्षा विभाग मिलकर धरातल पर उतारेंगे।ग्रामीण क्षेत्रों में आए दिन इंटरनेट के कारण काम में रुकावट की समस्या आती रहती है। जिससे काम काज में बाधा पड़ती है और अनावश्यक देरी भी होती है। इसके लिए भारत सरकार ने गांवों के सभी शासकीय भवनों तथा विद्यालयों को फाइवर टू होम कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने की योजना बनाई है। इस योजना के प्रथम फे ज में जल्द ही ग्राम पंचायतों व विद्यालयों का चयन करके उनमें काम शुरू करा दिया जाएगा। सरकार की योजना है कि काम तेजी से कराया जाए। इन दिनों जब कोरोना के चलते विद्यालय बंद है तथा ऑनलाइन पढ़ाई चल रही है तब यह व्यवस्था और भी जरूरी हो गई है। क्योंकि नेट के कारण ऑनलाइन पढ़ाई में बाधा आती है। इसी तरह पंचायत के कामों में नेट के कारण आने वाली बाधा को भी दूर किया जा सकेगा। जल्द ही योजना का प्रथम फेज शुरू हो जाएगा।ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी भवनों तथा विद्यालयों में फाइबर कनेक्टिविटी की योजना है। इससे इंटरनेट सुविधा अच्छी तरह मिलेगी। इस संबंध में अभी निर्देशों का इंतजार किया जा रहा है। शासन से निर्देश मिलते ही काम शुरू करा दिया जाएगा। इंटरनेट सुविधा अच्छी मिलने से कामकाज में भी गति आएगी और कई परेशानियों से बचा जा सकेगा। डॉ. राजा गणपति आर

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:Contractors engaged in failing to hand over nutrition to self-help groups