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इटावा औरैयाकागजों में चल रहा अन्ना मवेशियों का पालन- पोषण

हिन्दुस्तान टीम,इटावा औरैयाPublished By: Newswrap
Sat, 12 Jun 2021 04:32 AM
कागजों में चल रहा अन्ना मवेशियों का पालन- पोषण

बसरेहर। संवाददाता

गांवों में अन्ना मवेशी और किसानों के बीच की लड़ाई लाखों रुपए खर्च होने के बावजूद अब तक खत्म नहीं हो सकी। भारी-भरकम इंतजामों और बड़े बजट के बावजूद इस संघर्ष में आज भी अन्नदाता हारते हुए नजर आ रहे हैं। दूसरी ओर गौशालाओं में अधूरे इंतजाम के कारण गौवंश की सेवा कागजों पर हो रही है। बजट में खेल के साथ ही भूखे गौवंश दम तोड़ रहे है।

यूँ तो जिले में 35 अस्थाई गौ आश्रय केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें इन दिनों 5037 अन्ना मवेशी बंद है। लेकिन इसके बावजूद खेत खलियान से लेकर शहर की पक्की सड़कों, नेशनल हाईवे, एक्सप्रेस-वे तक पर अन्ना मवेशियों की चहल कदमी आसानी से देखी जा सकती है। प्रशासन लाख दावे करे लेकिन इसके बावजूद बीते कुछ सालों में मवेशियों की धमाचौकड़ी के कारण जिले में अब तक 11 किसानों ने अपनी जान गंवाई हैं। इसके अलावा 22 राहगीरों की मौत का कारण भी यही अन्ना मवेशी रहे है। हादसें भले ही अन्ना मवेशियों के लिए बेहतर इंतजाम करने की याद दिलाते हो लेकिन हर हादसे के बाद प्रशासन केवल चुप्पी साधे रहता है। जिले के अलग-अलग ब्लॉक क्षेत्र में कुल 35 अस्थाई गौ आश्रय केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। जिनमें चार शहरी क्षेत्रों में जबकि 31 ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित है। अकेले बसरेहर की परौली रमायन की गौशाला की क्षमता 15 सौ से अधिक पशुओं की है। निश्चित तौर पर प्रशासनिक लापरवाही कहें या अन्ना मवेशियों की लगातार बढ़ती संख्या जिसके कारण अन्नदाता लगातार इस समस्या से जूझ रहे है। साफ है कि केवल सरकारी कागजों में ही गौशाला चल रहीं है और फाइलों में ही गौवंश की सेवा की जा रही है।

पीने का पानी न होने से तड़प रहे गौवंश, सब बेखबर

बसरेहर। विकासखंड क्षेत्र के ग्राम पंचायत चौबिया मजरा जैनपुरा में गिरधर गोपाल गौशाला है। जिसमें कागजों पर 103 गोवंश रखे गए थे, लेकिन इस गौशाला में सिर्फ 60 गोवंश बचे हैं। कई महीनों से शासन द्वारा 103 गोवंश की भरणपोषण धनराशि दी जाती रही है। बता दें कि प्रत्येक गोवंश को 30 रुपये प्रति एक गोवंश के हिसाब से भूसा के लिए मिलते हैं। फिर 43 गोवंश के रुपये कहां जाते हैं इसका जवाब किसी के पास नहीं है। वहीं गौशाला के अंदर सिर्फ 60 गोवंश बचे हुए हैं। गौशाला के अंदर बना भूसा गोदाम भी इन दिनों खाली पड़ा है और उसी के अंदर बना गौवंश के पानी पीने के लिए छोटा सा तालाब वह भी गंदा पानी भरा होने से गौवंश संकट में फंसे हैं। वहीं सचिव का कहना है गौशाला के अंदर दो कर्मचारी रखे गए हैं और उन्हें जानकारी नहीं है कि फाइल में कितने गौवंश दाखिल है। लापरवाही का आलम यह है कि गौवंश भूखे प्यासे तड़पते रहते हैं। सूखा भूसा आने के इंतजार में रहते हैं। रोज की तरह भूसा आता है तब गोवंश को डाला जाता।

हर दिन भेजी जा रही सरकार को रिपोर्ट

इटावा। प्रदेश भर में गौ आश्रय केंद्रों के संचालन को लेकर सरकार ने सख्त मॉनिटरिंग के आदेश भी दिये हैं। ऐसे में जिले में संचालित सभी गौ आश्रय केंद्र के साथ ही परौली रमायन की वृहद गौशाला की रिपोर्ट भी प्रतिदिन शासन को भेजी जा रही है। कोरोना काल में अन्ना मवेशियों के खाने पीने की व्यवस्था के लिए भी सरकार ने बजट के साथ ही जिला प्रशासन को भी बेहतर इंतजाम करने के निर्देश दिए थे। इन सब के बावजूद सड़कों पर अन्ना मवेशियों की संख्या कम होती नजर नहीं आ रही। वही पालिका क्षेत्र में बन रही राहतपुरा की गौशाला का निर्माण भी अब तक पूरा नहीं हो सका। आलम यह है कि पालिका क्षेत्र में एक भी गौशाला का संचालन नहीं किया जा रहा।

सहायता राशि न मिलने से बंद पड़ी अनुदान योजना

इटावा। अन्ना मवेशियों की बेहतर देखभाल के लिए सरकार ने दुधारू जानवरों को किसानों व आम जनता को देने की योजना तैयार की थी। आश्रित योजना में 900 रुपये प्रति माह प्रति जानवर सहायता राशि भी पशुपालक को दी जाती है। लेकिन पिछले कुछ महीनों से धनराशि न मिलने के कारण पशुपालक जानवरों को लेने से कतरा रहे हैं। ऐसे में योजना बंद पड़ती जा रही है। वहीं जिले की सबसे बड़ी परौली रमायन गौशाला में वर्तमान समय में लगभग 1275 अन्ना मवेशी बंद है। गौशाला का संचालन श्री संकट मोचन बालाजी सेवा समिति द्वारा किया जा रहा है। पिछले दिनों डीएम श्रुति सिंह ने जब गौशाला का निरीक्षण किया तो उन्होंने यहां की व्यवस्थाओं पर संतोष व्यक्त करते हुए अधिक से अधिक गर्भाधान व अनुदान योजना के तहत दुधारू जानवरों को किसानों को देने के निर्देश दिए थे।

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