
इटावा में 8.79 लाख की अनियमितताओं में ग्राम प्रधान समेत पांच को नोटिस जारी
Etawah-auraiya News - ग्राम पंचायत सालिमपुर में सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला सामने आया है। ग्राम प्रधान सहित 5 जिम्मेदारों को नोटिस जारी किया गया है और एक सप्ताह में स्पष्टीकरण मांगा गया है। जांच में पाया गया कि आठ लाख 79 हजार 437 रुपये का दुरुपयोग किया गया है। डीएम ने कार्रवाई की चेतावनी दी है।
क्षेत्र की ग्राम पंचायत सालिमपुर में सरकारी धन के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओ के खुलासे के बाद ग्राम प्रधान व अन्य जिम्मेदारों पर कार्यवाही की तैयारी है। ग्राम प्रधान सहित 5 जिम्मेदारों को नोटिस जारी किया गया है और एक सप्ताह में इसका जबाव मांगा गया है। यह मामला आठ लाख 79 हजार 437 रुपये की गड़बड़ी का है। इसी गांव के रहने वाले कन्हैयालाल ने शिकायत की थी और इस शिकायत की जांच की गई। डीएम के आदेश पर जिला विकास अधिकारी और अवर अभियंता नलकूप खंड प्रथम को जांच अधिकारी नामित किया गया था। इनकी जांच में पाया गया कि ग्राम पंचायत में कई योजनाओं में सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है।
इसी जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि वर्ष 2025 में मेंटेनेंस कार्य के नाम पर सत्रह हजार पांच सौ रुपये का भुगतान फर्जी बिल के आधार पर किया गया। बिल में न खरीददार का नाम था, न जीएसटी नंबर, न बिल नंबर और न ही फर्म की मुहर। वर्ष 2022-23 में मोहनलाल, राजवीर, रजनीश और अखिलेश सहित कई ग्रामीणों के नाम पर पशु शेड निर्माण के लिए लाखों रुपये का भुगतान किया गया, जबकि मौके पर कोई निर्माण कार्य नहीं पाया गया। जांच में यह भी पाया गया कि वर्ष 2024-25 में दाताराम, वीरेन्द्र और अनिल कुमार के खेतों की मेडबंदी के नाम पर करीब तीन लाख रुपये का भुगतान किया गया, लेकिन वास्तविक रूप से कोई कार्य नहीं हुआ। गांव में शांति देवी स्कूल से तालाब तक नाली निर्माण में भी गंभीर अनियमितता मिली। दो लाख चौंसठ हजार की लागत के इस कार्य में सिर्फ चौदह मीटर नाली बनी मिली। मामले की प्रारंभिक जांच में कुल 8 लाख 79 हजार 437 रुपये के दुरुपयोग पाया गया। इसमें ग्राम प्रधान इन्द्रपाल सिंह में 2 लाख 93146 रुपये, ग्राम पंचायत अधिकारी अर्चना यादव और एक अन्य से 1 लाख 75902 रुपए, तकनीकी सहायक बृजेन्द्र कुमार से 3 लाख 49860 रुपये और कंसल्टिंग इंजीनियर देवेन्द्र यादव से 70529 रुपये की अनियमितता पाई गई। डीएम शुभ्रान्त कुमार शुक्ल ने 7 दिन के भीतर स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए हैं। निर्धारित समय में जवाब न मिलने पर पंचायत राज अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी और दुरुपयोगित रकम की वसूली भी की जाएगी।

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