गोवंश सहभागिता योजना बनी सहारा, 5446 गोवंश संरक्षित

Newswrap हिन्दुस्तान, एटा
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प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना के तहत अब तक 1943 पशुपालकों को 5446 निराश्रित गोवंश सुपुर्द किए गए हैं। इस योजना में प्रति गोवंश 1500 रुपये की आर्थिक सहायता सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जा रही है, जिससे ग्रामीण पशुपालकों को आर्थिक संबल मिल रहा है।

गोवंश सहभागिता योजना बनी सहारा, 5446 गोवंश संरक्षित

प्रदेश सरकार की निराश्रित गोवंश के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से संचालित मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना जिले में प्रभावी रूप से संचालित की जा रही है। जिलाधिकारी अरविन्द सिंह के निर्देशन में अधिक से अधिक पात्र पशुपालकों को योजना से लाभान्वित किए जाने हेतु निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरपी शर्मा ने बताया कि जिले में संचालित मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना के अंतर्गत अब तक 1943 पशुपालकों को 5446 निराश्रित गोवंश सुपुर्द कर संरक्षित कराया गया है। योजना के तहत सरकार द्वारा प्रति गोवंश 1500 रुपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जा रही है।

एक लाभार्थी अधिकतम 4 गोवंश अपने पास रख सकता है। उन्होंने बताया कि योजना के माध्यम से निराश्रित गोवंश को संरक्षण मिलने के साथ-साथ ग्रामीण पशुपालकों को आर्थिक संबल भी प्राप्त हो रहा है।जिले में संचालित 24 गोवंश आश्रय स्थलों में भी 14496 गोवंश संरक्षित हैं, जहां चारा, पानी एवं उपचार की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। बीमार गोवंश के उपचार हेतु पशुपालन विभाग द्वारा नियमित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। योजना से लाभान्वित मलावन क्षेत्र निवासी लाभार्थी सोनम एवं रवेंद्र ने बताया कि उन्हें बेसहारा गोवंश की सेवा करने का अवसर मिला है तथा समय से आर्थिक सहायता मिलने से गोवंश के चारा-पानी की व्यवस्था सुचारु रूप से हो जाती है। उन्होंने योजना को छोटे पशुपालकों के लिए अत्यंत लाभकारी बताते हुए कहा कि इससे गोवंश संरक्षण के साथ-साथ परिवार को आर्थिक सहयोग भी प्राप्त हो रहा है।

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