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150 वर्ष पुराने कैलाश मंदिर के प्रति भक्तों में अगाध आस्था

डेढ़ वर्ष पुराने उत्तर भारत के सबसे ऊंचे शिवालय कैलाश मंदिर के प्रति भक्तों में अगाध आस्था है। श्रावण मास के प्रथम सोमवार को यहां हजारों भक्त शिव-पार्वती की पूजा-अर्चना को पहुंचेंगे। इसके लिए मंदिर के महंत धीरेन्द्र कुमार झा ने जलाभिषेक, आरती, पूजा-अर्चना का समय निर्धारित किया है। पहले सोमवार के लिए मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है।

हिन्दुस्तान से बातचीत में कैलाश मंदिर महंत धीरेन्द्र कुमार झा ने बताया कि मंदिर का निर्माण राजा दिलसुख राय ने डेढ़ सौ वर्ष पूर्व कराया था। कैलाश मंदिर में भगवान शंकर की चर्तुमुखी शिवलिंग हैं। यह जमीन तल से दो सौ फीट ऊंचाई पर स्थित है। श्रद्धालुओं को मंदिर में शिवलिंग तक पहुंचने के लिए एक सौ आठ सीढियों से होकर गुजरना पड़ता हैं। मंदिर का गर्भगृह पूरी तरह शिवलिंग तक ठोस है। कैलाश मंदिर में शिव परिवार समेत विराजमान हैं। मंदिर के समीप पांच हेक्टेयर में कैलाश सरोवर है। मंदिर परिसर में सामने बोर्डिंग हाउस है। जहां काफी वर्षों पूर्व राजा के हाथी, घोड़े खड़े हुआ करते थे।

प्रथम सोमवार को प्रात: चार बजे खुलेंगे मंदिर के कपाट

एटा। शहर कैलाशनाथ मंदिर के महंत धीरेन्द्र कुमार झा ने बताया कि श्रावण के प्रथम सोमवार को मंदिर के कपाट प्रात: चार बजे खुलेंगे। भगवान शिव-पार्वती की प्रथम आरती प्रात: पांच बजे, संध्या कालीन आरती सात बजे एवं रात्रि कालीन आरती एवं महादर्शन नौ बजे होती है। रात साढ़े ग्यारह बजे मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। नगर के लोगों के साथ-साथ कैलाशनाथ मंदिर में आसपास के क्षेत्रों से लोग पूजा-अर्चना एवं मनौती मांगने आते हैं। हजारों की संख्या में आने वाले भक्त शिवलिंग पर बेलपत्र, दूध, दही, शहद, घी, पंचामृत, भांग, सुगंधित इत्र से देवाधिदेव महादेव का अभिषेक कर मनौती मांगते हैं। मनौती पूर्ण होने पर श्रद्धालु घंटा, प्रसाद चढ़ाते हैं।

कैलाश मंदिर में सोमवार को होंगे धार्मिक अनुष्ठान

एटा। श्री कैलाशनाथ मंदिर में श्रावण मास के प्रथम सोमवार को प्रात: काल को भगवान का छप्पन मिठाइयों से भोग लगाया जाएगा। इसके बाद कलश यात्रा शहर के मुख्य मार्गों से निकाली जाएगी। शाम पांच बजे छप्पन भोग प्रसाद वितरण किया जाएगा। मंदिर में शिव परिवार को पोषाक पहनावा कार्यक्रम आयोजित होगा।

गंगाघाट से चल पड़े शिवभक्त कांवड़िए

एटा। श्रावण मास में देवाधिदेव महादेव, पार्वती, गणेश का जलाभिषेक करने के लिए गंगाघाटों से जल भरकर शिवभक्त कांवडिया शिवालयों की ओर निकल पड़े हैं। रास्ते में कावड़ियों के मुंह से निकल रहे जयकारे, भजन, लागुरियां से माहौल भक्तिमय बना हुआ है। मार्गों पर कावड़ियों को देखकर लोग भी उनके साथ बम-बम भोले, हर-हर महादेव के जयकारे लगाने से नहीं चूकते हैं। लोगों के जयकारों से पैदल जाने वाले शिवभक्त कावड़ियों में उत्साह का संचार होता है। वह दोगुने जोश से अपनी यात्रा को आगे जारी रखते हैं।

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  • Web Title:Unbelievable belief in devotees towards 150 year old Kailash temple