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बोले एटा: ‘आवारा आतंक से पैदल वाले ही नहीं वाहन वाले भी हैं परेशान

बोले एटा: ‘आवारा आतंक से पैदल वाले ही नहीं वाहन वाले भी हैं परेशान

संक्षेप: Etah News - हर दिन एटा में 200 से अधिक लोग कुत्तों के हमलों का शिकार हो रहे हैं। गर्मी के कारण आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ गई है, जिससे लोग मेडिकल कॉलेज और स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने के लिए...

Mon, 18 Aug 2025 10:55 PMNewswrap हिन्दुस्तान, एटा
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हर दिन सुबह आठ बजे से लेकर दोपहर दो बजे तक मेडिकल कॉलेज में लाइन लगी रहती है। ये वो लोग हैं जो कुत्तों के आंतक का शिकार हो चुके होते हैं। गली-मोहल्लों में कुत्तों का आतंक इतना बढ़ गया है कि पैदल तो छोड़िए, दोपहिया वाहन पर निकला दुश्वार कर दिया। कुत्तों के हमलों से कई बार तो बाइक सवार गिर जाते हैं। झुंड में होने के कारण इन्हें हटाना भी मुश्किल होता है। कुत्तों के शिकार लोगों से हिन्दुस्तान अखबार के ‘बोले एटा के तहत बात की तो एक स्वर में सभी बोले कि इन कुत्तों का सरकार कोई तो स्थाई समाधान निकाले।

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नहीं तो यह घरों से निकलना मुश्किल कर देंगे। अनुमान के अनुसार, जिलेभर में रोजाना 200 से अधिक लोग कुत्तों के शिकार हो रहे हैं। अकेले मेडिकल कॉलेज में रोजाना 200 वैक्सीन लग रही हैं। तावरण में गर्मी बढ़ने के साथ ही कुत्तों के हमले बढ़ते जा रहे हैं। आवारा घूम रहे जानवर गर्मी और भूखे रहने के कारण हिंसक हो रहे है। इनके हमले में हर उम्र के लोग शिकार हो रहे है। कुत्तों के काटने के बाद लोग एंटी रैवीज वेक्सीन लगवाने के लिए मेडिकल कालेज, सीएचसी, पीएचसी पर पहुंच रहे हैं। मेडिकल कालेज में प्रतिदिन 200 तक लोगों को एआरवी लगायी जा रही है। सीएचसी, पीएचसी पर भी 50 से 80 तक लोग वेक्सीन लगवाने आ रहे हैं। इससे प्रतिमाह जनपद में 10 से 12 हजार लोग कुत्तों के हमलों का शिकार हो रहे है। इसके बाद भी इन आवारा जानवरों को पकड़े जाने की जनपद में कोई व्यवस्था नहीं है। तेजी से बढ़ रही जनसंख्या रोकने को कोई व्यवस्था नहीं: कुत्तों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। इन आवारा जानवरों के छह माह में एक बार बच्चे पैदा होते हैं। इससे गली-मोहल्लों, गांव, बस्ती में इनको खासी तादात में देखा जा सकता है। कुत्ते अपने छोटे बच्चों के पास आने वालों पर भी हमला कर देते हैं। इनकी बढ़ती तादात को रोकने के लिए जनपद में इनकी नसबंदी कराये जाने की कोई व्यवस्था नहीं है। महानगरों में नगर निकाय के माध्यम से आवारों जानवरों को पकड़कर नसबंदी कर दी जाती है। इससे इनकी बढ़ती जनसंख्या रुक सके। एटा जैसे शहरों में इस तरह की कोई व्यवस्था ही नहीं है। गांव में गली से घूमने वाले कुत्ते ने उनके बच्चे को काट लिया। उससे बच्चे के पैर में जख्म हो गया। उनको डर है कि बच्चे को कुत्ता काटे का असर न हो जाये। इस डर की वजह से बच्चे को डाक्टर को दिखाया। कुत्ते इतना खूंखार हो गए है कि चलती बाइक पर भी हमला कर देते है। - पुष्पा गांव-देहात में कुत्ते लोगों पर अचानक हमला कर काट लेते हैं। इससे खाने-पीने का सामान लेकर आने-जाने में काफी डर लगता है। उनको भी कुत्ते ने काट लिया। काटने के बाद होने वाली परेशानी से बचने के लिए मेडिकल कालेज में वेक्सीन लगवाने आये है। - मंजू देवी कुत्ते हमेशा से ही घर-परिवार, गली-मोहल्ले में रहते आ रहे हैं। यह काटते भी है। इसके काटने के बाद असर होने का डर रहता है। हमको भी कुत्ता पालने का शौक है। रात में यह घर के बाहर रहकर देखभाल करते हैं। इन लोगों पर जुर्माना भी लगाना चाहिए। - हरीश चन्द्रा गांव में आवारा कुत्तों के झुंड के झुंड रहते हैं। लोग इनको खाने-पीने के लिए भी देते है। उसके बाद भी यह आये दिन लोगों को काट रहे है। एक-दो दिन के बाद यह वापस आ जाते हैं। सरकार को खतरनाक आवारा जानवरों को पकड़वाने की व्यवस्था करनी चाहिए। - चंपाराम गांव में आवारा कुत्ते आये दिन लोगों को काट लेते है। इसके बाद इनको मारपीट कर भगा दिया जाता है। कुछ दिनों बाद यह वापस आ जाते हैं। लोग काटने की बाद भूलकर इनको पाल लेते हैं। जानने वालों को यह नहीं काटते हैं। कोई अंजान व्यक्ति को देखकर यह उन पर हमला कर देते है। - राज सिंह गर्मी के मौसम में ही कुत्ता काटने की घटना बढ़ती है। भूखे-प्यासे और गर्मी से परेशान होने पर कुत्ते काट लेते हैं। गांव में कुत्ते मार पीटने पर ही लोगों को काटते हैं। गांव में लोग इनको सुबह-शाम खाना देते हैं। ताकि यह रात में अंजाने खतरे से भौंक कर आगाह करने का काम करते हैं। - मानवीर गली में कुत्ते रहते है। खेलते-खेलते बच्चे के हाथ में दांत लग गया। कुछ ऐसा इंतजाम हो कि कुत्ते के हमले से किसी पर कोई असर ना हो सके। सरकार में बैठे जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे है। अब कुत्तों को देखकर डर लगने लगा है। कुत्तों रात में सबसे अधिक परेशान करते है। - शैलेंद्र गांव में बढ़ी तादात में कुत्ते है। किसी न किसी को काटते ही रहते है। काटने पर इंजेक्शन लगवाने मेडिकल कालेज आये है। जहां पर उनको वेक्सीन लगायी गई है। डाक्टर ने बताया कि वेक्सीन लगने के बार डर की कोई बात नहीं है। गांव में देशी इलाज भी कराया है। - मनोज गली में रहने वाले कुत्ता ने काट लिया। काटने पर घर पर ही मिर्च लगा ली। इसके बाद भी घर-परिवार व आसपास के लोगों ने इंजेक्शन लगवाने की सलाह दी। गली में रहने वाले कुत्ता के काटने से असर होने का डर रहता है। गली में रहने वाले कुत्ते आने-जाने पर लोगों पर भौंकते है। - विराट गर्मी बढ़ने से गांव में कुत्ता काटने की घटना बढ़ गई है। परेशान आवारा कुत्ते अचानक हमला कर देते है। हमले में दांत लगने से जख्म हो जाता है। काटने के बाद कुत्ते को मारपीट कर भगा दिया। उसके बाद पहले गांव में ही जख्म की दवा ली। शहर में अधिक कुत्ते घातक हो रहे है। - ब्रजेश कुमार गली-मोहल्ले में काफी कुत्ते रहते हैं। लोगों के घरों में भी कुत्ते पले हुए है। घरों में रहने वाले कुत्ते बच्चों, बड़ों पर हमला कर देते है। काटने के बाद इंजेक्शन लगवाया है। इससे किसी भी प्रकार की कोई परेशानी न हो। जो लोग पालते है उन्हें भी अपने कुत्ते पर नजर रखनी चाहिए। - भगवान देवी गांव में रहने वाले कुत्ते ने अचानक पीछे से काट लिया। काटने के बाद कुत्ता भाग गया। कईबार ग्राम प्रधान से गांव में घूमने वाले आवारा कुत्तों को पकड़वाने के लिए कहा है। कोई सुनता ही नहीं। कुत्तों की वजह से रात में घर से बाहर निकलना नामुमकिन हो गया है। - आशा देवी घर में पालतू कुत्ते ने काट लिया। पालतू कुत्तों को सभी इंजेक्शन पहले ही लगावाये जा चुके है। फिर भी स्वयं के बचाव के लिए अस्पताल में आकर एआरवी लगवायी है। उनके घर के आसपास भी कुत्ते रहते हैं। किसी से भी कोई डर की बात नहीं है। - तुरसन पाल गांव में हमेशा से कुत्ते घूमते रहते हैं, जिनको रोटी खाने को दे दी जाती है। कभी यह काटते और हमला नहीं करते है। गर्मी बढ़ने के साथ ही अचानक कुत्तों के रहन-सहन में परिवर्तन आ गया है। गर्मी से परेशान होने के कारण यह बार-बार भगाने, डांटने पर हमला कर देते हैं। - किशन पाल