यूपी बोर्ड: अंकेक्षण बने प्रधानाचार्य में आक्रोश व्याप्त, कार्य मुक्त करने की मांग
Etah News - एटा, हिन्दुस्तान संवाद। बोर्ड उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कार्य का अंकेक्षण बने प्रधानाचार्य विरोध कर रहे है। अंकेक्षण के विरोध के बाद भी गुरुवार को

बोर्ड उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कार्य का अंकेक्षण बने प्रधानाचार्य विरोध कर रहे हैं। गुरुवार को पांच केन्द्रों पर 879 परीक्षकों ने 22,605 उत्तर पुस्तिकायें जांची हैं। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ जिलाध्यक्ष मुकेश कुमार शर्मा ने बताया कि अंकेक्षण कार्य के लिए प्रधानाचार्य को लगाये जाने को लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेश कुमार त्रिपाठी ने शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) को पत्र लिखा है, जिसमें बताया गया है कि वर्ष 2026 में अंकेक्षण कार्य के लिए प्रधानाचार्यों की ड्यूटी लगायी गई है। अंकेक्षण कार्य में लगे प्रधानाचार्यों को एक रुपये प्रति कापी पारश्रमिक देय है। उल्लेखनीय है कि कुल अंकेक्षित उत्तर पुस्तिकाओं का 15 प्रतिशत ही अंकेक्षित करना है।
व्यवहारिक रूप से यह अपमानजनक है। इससे प्रधानाचार्य मानसिक पीड़ा में है। उन्होंने मांग की है कि या तो इन्हें अंकेक्षण कार्य से मुक्त उनकी पद की गरिमा के अनुरूप उप प्रधान परीक्षक के समान पारश्रमिक का भुगतान कराया जाये। मूल्यांकन कर रहे शिक्षकों को हाईस्कूल की उत्तर पुस्तिका जांचने पर 13 और इंटर की उत्तर पुस्तिका जांचने के 15 रुपये पारश्रमिक दिया जा रहा है।22,605 उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकनजिला विद्यालय निरीक्षक डा. इंद्रजीत प्रजापति ने बताया कि गुरुवार को 22,605 उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन पांच केन्द्रों पर हुआ है। इसमें हाईस्कूल की 12,466, इंटरमीडिएट की 10,145 उत्तर पुस्तिकायें जांची गई है।
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