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जिनलयों में दिनभर महावीर स्वामी के संदेशों की गूंज

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मंगलवार को जैन समाज का प्रमुख पर्वराज पर्यूषण पर्व श्रद्धाभाव के साथ प्रारंभ हो गया। पर्यूषण पर्व के पहले दिन शहर के सभी जैन मंदिरों में प्रात:काल श्रावक, श्राविकाओं ने भगवान महावीर का जलाभिषेक कर भक्तिभाव से पूजा, अर्चना की। जैन मुनियों एवं विद्धानों ने भगवान महावीर के संदेशों पर चलने की सीख देते हुए उत्तम क्षमा के बारे में विस्तार पूर्वक बताया। जिनालयों में दिनभर पूजा-अर्चना, मंत्रोच्चारण, धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होता रहा।

शहर के पुरानी बस्ती स्थित दिगंबर जैन पद्मावती पुरवाल पंचायत बड़े जैन मंदिर में प्रात: पांच से छह बजे जैन मुनि विश्रुत सागर महाराज के सानिध्य में श्रावक, श्राविकाओं ने आत्मध्यान लगाया। इसके बाद सुबह छह बजे भगवान महावीर का अभिषेक पूजन जैन मुनि द्वारा किया गया। उसके उपरांत विश्रुत सागर महाराज ने उत्तम क्षमा धर्म के बारे मे बताते हुए कहा कि आत्मा का उत्तम ध्यान , आश्रय करना ही क्षमा धर्म का पालन है। जिस जीव के अंदर क्षमा नहीं हो सकती वह अधर्मी होता है। वह कभी धार्मिक नहीं हो सकता हमें आजीवन सभी जीवों के प्रति क्षमा का भाव रखना चाहिए। जब तक हमारे अंदर क्षमा का प्रकटीकरण नहीं होता तब तक हम धार्मिक नहीं हो सकतेद्ध। पर्वराज पर्यूषण पर्व आत्मा शांति का महापर्व है। इसमें क्रमश: दस दिनों तक दस संदेशों को धारण करने उनके पालन का प्रयास किया जाता है। आज प्रथम दिन उत्तम क्षमा का है क्षमा का अर्थ होता है क्रोध, कषाय पर विजय, क्रोध कषाय पर नियंत्रण आवश्यक है। अन्यथा क्रोध के कारण सब कुछ बिगड़ने में देर नही लगती। उन्होंने कहा कि क्षमा विद्वानों ने वीरों का आभूषण कहा है न कि कायरों का क्योंकि भय के कारण से तो कोई भी क्षमा भाव धारण कर लेता है। जैसे कि बलवान पुरुष के सामने निर्बल अपने आप ही हार मान लेता है।

क्रोध से व्यक्ति का विवेक नष्ट हो जाता है एवं वह क्रोध में अंधा हो जाता है। वास्तविक उत्तम क्षमा संदेश पर चलने वाले नाम मात्र का भी क्रोध नहीं करते। क्रोध पर नियंत्रण कर क्षमा भाव को अपने जीवन मे धारण करने के बारे में बताया। उसके उपरांत दोपहर में जिनवाणी पूजन, तत्वार्थ सूत्र का वाचन जैन मुनि द्वारा किया गया। शाम को संध्या को आरती हुई। उसके पश्चात छुल्लक 105 निर्भीक सागर महाराज ने शास्त्र सभा का आयोजन किया।

रात को सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। इस अवसर पर बृहमचारणी काजल दीदी, श्रेय भईया, विदित जैन, अर्पित राज जैन, मंदिर कमेटी अध्यक्ष सुरेश चन्द्र जैन, पदम चन्द्र जैन, आनंद कुमार जैन, कुलदीप जैन, विजय चन्द्र जैन, विनय जैन, सोना जैन, सुधाकर जैन, कैलाश जैन, रवीन्द्र कुमार जैन, संजीव जैन, अनुज जैन, शैलेन्द्र जैन, प्रशांत जैन, मोहित जैन संजय जैन, विनोद जैन, राजकुमारी जैन , ममता जैन , गरिमा जैन , प्राची जैन , मेघा जैन आदि श्रावक मौजूद रहे।

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