हॉस्पिटल-क्लीनिक पंजीकरण-नवीनीकरण को बनेगी कमेटी : एसीएमओ
स्वास्थ्य विभाग में किसी क्लीनिक या हॉस्पीटल का पंजीकरण और नवीनीकरण वर्तमान में नहीं हो सका है। 75 क्लीनिक और हॉस्पीटल पहले से पंजीकृत हैं। अपंजीकृत क्लीनिकों की संख्या 800 से 1000 है। दो अस्पतालों का पंजीकरण निरस्त किया गया है। प्रक्रिया आगे बढ़ने के लिए कमेटी गठित की जानी है।

स्वास्थ्य विभाग में वर्तमान में किसी क्लीनिक, हॉस्पीटल का पंजीकरण, नवीनीकरण नहीं हो सका है। इसके लिए कमेटी गठित की जानी है। कमेटी गठित होने के बाद ही अस्पताल, क्लीनिक पंजीकरण, नवीनीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। पंजीकरण नोडल अधिकारी एवं एसीएमओ डा. राममोहन तिवारी ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग में एक से 30 अप्रैल का समय हॉस्पिटल, क्लीनिक के पंजीकरण को आवेदन करने के लिए रखा गया था। ऑनलाइन पोर्टल पर संबंधित व्यक्ति को पंजीकरण कराने के लिए आवेदन पत्र अपलोड कराना है। इसमें शासन ने निर्धारित मानक के अनुरूप एरिया, चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टाफ, फायर सेफ्टी और मेडिकल वेस्ट प्रबंधन संसाधन होना आवश्यक है। निर्धारित अवधि में स्वास्थ्य विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन 29 आवेदन पत्र प्राप्त हुए है। ऑनलाइन आवेदन पत्रों की जांच पूरी हो गई है। शासन से निर्धारित मानक पूर्ण होने, हॉस्पिटल, क्लीनिक में उपलब्ध रहने वाले चिकित्सकों की से वार्ता कराएगी। वह संस्तुति कर आवेदन पत्र को आगे बढ़ायेंगे। नोडल अधकारी ने बताया कि जांच पूरी होने के बाद दो अस्पताल का पंजीकरण निरस्त किया गया। जहां पर चिकित्सकों की मौजूदगी नहीं पायी गई। इसके बाद पंजीकरण, नवीनीकरण के लिए जिलाधिकारी की ओर से कमेटी गठित की जानी है। उसके बाद ही प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी。
जनपद में पूर्व से 75 क्लीनिक, हॉस्पीटल का पंजीकरण
नोडल अधिकारी डा.राममोहन तिवारी ने बताया कि जनपद में पूर्व से ही 75 क्लीनिक, अस्पताल का पंजीकरण चल रहा है। पूर्व से पंजीकृत हॉस्पिटल, क्लीनिक जिनका इस वर्ष अवधि पूरी हो रही है। उनको भी नवीनीकरण के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होता है। ऑनलाइन आवेदन पत्रपर सभी प्रक्रिया पूर्ण होने पर ही नवीनीकरण किया जाएगा।
जनपद में अपंजीकृत क्लीनिक-हॉस्पिटल की लंबी सूची
जनपद में अपंजीकृत क्लीनिक, हॉस्पिटल की लंबी फेहरिस्त है। जहां पर प्रतिदिन कहीं न कही मरीजों के साथ अनहोनी होती रहती है। मरीज के साथ अनहोनी होने पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से क्लीनिक, हॉस्पिटल संचालक को नोटिस भेजकर स्पष्टीकरण मांगा जाता है। इसके बाद सील करने की कार्रवाई की जाती है। बीते वर्ष में स्वास्थ्य विभाग की ओर से किसी भी क्लीनिक, हॉस्पिटल संचालक के विरुद्ध एफआईआर दर्ज नहीं करायी जा रही है, जिससे अपंजीकृत क्लीनिक, हॉस्पिटल संचालक पूरी तरह से बेलगाम है। जनपद में अपंजीकृत क्लीनिकों की संख्या 800 से 1000 तक बतायी जा रही है।
30 अप्रैल तक पंजीकरण-नवीनीकरण को प्राप्त हुए 29 आवेदन पत्रों की जांच पूरी हो गई है
जांच में दो अस्पताल में चिकित्सक न मिलने पर उनका पंजीकरण निरस्त किया गया है। अभी पंजीकरण, नवीनीकरण के लिए कमेटी गठित होनी है। उसके बाद ही यह प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। वर्तमान में किसी भी अस्पताल, क्लीनिक का पंजीकरण, नवीनीकरण नहीं हुआ है।-डा. राजेन्द्र प्रसाद, सीएमओ, एटा।
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