अत्यधिक यूरिया से मिट्टी उर्वरता, भू-जल गुणवत्ता पर पड़ रहा प्रतिकूल प्रभाव
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को नाइट्रोजन आधारित रासायनिक उर्वरकों, विशेषकर यूरिया के अधिक प्रयोग से बचने की सलाह दी है। अत्यधिक यूरिया से मिट्टी की उर्वरता और भू-जल की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। जिला कृषि अधिकारी ने उर्वरक वितरण की नियमित समीक्षा करने की जानकारी दी।

खेत बचाओ अभियान में कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से कहा कि नाइट्रोजन आधारित रासायनिक उर्वरकों, विशेषकर यूरिया का आवश्यकता से अधिक प्रयोग न करें। अत्यधिक यूरिया के उपयोग से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित हो रही है। मिट्टी एवं भू-जल की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि गत वर्ष मई माह में 11,338.9 मीट्रिक टन यूरिया का विक्रय हुआ था। जबकि मई 2026 में 11,666 मीट्रिक टन यूरिया का विक्रय हुआ है। यह पिछले वर्ष की तुलना में 327.1 मीट्रिक टन अधिक है। एक जून 2026 तक जनपद में लगभग 30,186.8 मीट्रिक टन यूरिया तथा 12,898.6 मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध है।
गोदामों में सामान्य एवं प्री-पोजिशनिंग स्टॉक सहित कुल 9,851.6 मीट्रिक टन यूरिया, 8,461 मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध है।जिला कृषि अधिकारी निरंतर समितियों, गोदामों एवं विक्रय केंद्रों का भ्रमण कर उर्वरकों की उपलब्धता एवं वितरण व्यवस्था की नियमित समीक्षा कर रहे हैं। उर्वरकों को लेकर किसी प्रकार की भ्रांति में न आएं। आवश्यकता के अनुसार ही उर्वरक क्रय करें। शासन के आदेशानुसार कृषकों को उनकी कृषि भूमि के प्रति हेक्टेयर के आधार पर अधिकतम 5 बैग डीएपी एवं 7 बैग यूरिया उपलब्ध कराया जाएगा। निर्धारित सीमा से अधिक भंडारण उर्वरक प्रावधानों का उल्लंघन माना जाएगा। किसी भी प्रकार के उर्वरकों का अनावश्यक भंडारण न करें।


