
देव पूजन के साथ आज से प्रारंभ होंगे शुभ और मांगलिक कार्य
संक्षेप: Etah News - आज देव उठानी एकादशी पर घर-घर देवों का पूजन होगा और तुलसी-सालिगराम का विवाह होगा। लोग गन्ने, सिंघाढ़ा, और सकरकंध की खरीदारी कर रहे हैं। देव उठानी एकादशी से विवाह का शुभारंभ होगा, जिसमें नवंबर और दिसंबर में कई शुभ तिथियां हैं। दिसंबर में केवल 3-4 शुभ तिथियां होंगी।
आज देव उठानी एकादशी पर घर-घर देवों का पूजन विभिन्न प्रकार की खाद्य सामग्रियों से किया जाएगा। साथ ही तुलसी-सालिगराम के विवाह के साथ वैवाहिक सीजन की शुरूआत होगी। देवोत्थान से एक दिन पहले शुक्रवार को शहर के अधिकांश तिराहों-चौराहों एवं मार्गों पर सजी दुकानों पर लोगों ने गन्नों की खरीदारी की। विक्रेता प्रति गन्ना 30 से 60 रुपये तक बिके। इसके अलावा मुख्य बाजार घंटाघर स्थित सब्जी मंडी, प्रेमनगर, रेलवे रोड आदि स्थानों पर लगाने वाली सब्जी मंडियों में लोगों ने सकरकंध, सिंघाढ़े आदि की भी बड़े पैमाने पर खरीदारी की। देव पूजन के लिए सिंघाढ़े और सकरकंध की मान्यता अधिक होने के कारण फुटकर विक्रेताओं ने भी इस का जमकर फायदा उठाया।

सिंघाड़े 60 एवं सकरकंध 60 से 65 रुपये प्रति किलो के भाव बने रहे। देवों की आकृति बनाने के लिए लोगों ने किराना बाजार में खड़िया, चावल एवं गेरू की भी बढ़चढ़ कर खरीदारी की। देव उठानी एकादशी पर शुभ महूर्त के अनुसार करें धार्मिक कार्य ज्योतिषाचार्य पंडित दुर्गेश शुक्ला के अनुसार देव उठनी एकादशी कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को कहते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु चार माह के निद्रा काल से जागते हैं और पुन: सृष्टि पालन का कार्यभार संभालते हैं। इस दिन तुलसी और सालिगराम के विवाह का भी आयोजन किया जाता है। देवउठनी एकादशी के दिन से ही शुभ कार्य और विवाहिक कार्यो का शुभारंभ हो जाता हैं। इस दिन भगवान विष्णु की सच्चे मन से आराधना करने से बैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है। उन्होंने बताया कि देवोत्थान के दिन व्रत उपवास करने वाले उपासक सुबह जल्दी स्नान करें और व्रत का संकल्प करें। भगवान विष्णु के समक्ष दीप प्रज्जवलित करें। गंगा जल से अभिषेक करें। भगवान विष्णु को तुलसी अर्पित करें। जगत के पालनहार को सात्विक चीजों का भोग लगाए। शाम को तुलसी के समक्ष दीप जलाएं। विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। अगले दिन द्वादशी के दिन शुभ मुहूर्त पर व्रत खोलें। ब्राह्मणों को भोजन कराकर प्रसाद वितरण करें। नवंबर माह में शादियों के शुभ तिथियां देवोत्थान एकादशी के बाद नवंबर और दिसंबर माह में विवाह के लिए कई शुभ तिथियां हैं। हालांकि यह ध्यान रखना जरुरी है कि शुभ मुहूर्त स्थानीय पंचांग और व्यक्तिगत ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर थोड़ी भिन्न हो सकती हैं। एटा जिले में (उत्तर भारत के पंचांग के अनुसार) नवंबर का महीना शादियों के लिए सबसे व्यस्त रहने वाला है। क्योंकि इस महीने में विवाह के लिए लगभग 14 से 17 शुभ तिथियां हैं। एक नवंबर दिन शनिवार को देव उठानी एकादशी के बाद दो नवंबर दिन रविवार, तीन नवंबर दिन सोमवार, छह नवंबर दिन गुरुवार, आठ नवंबर दिन शनिवार, 12 नवंबर दिन बुधवार, 13 नवंबर दिन गुरुवार, 16 नवंबर दिन रविवार, 17 नवंबर दिन सोमवार, 18 नवंबर दिन मंगलवार, 21 नवंबर दिन शुक्रवार, 22 नवंबर दिन शनिवार, 23 नवंबर दिन रविवार, 25 नवंबर दिन मंगलवार, 30 नवंबर दिन रविवार को अंतिम शुभ मुर्हूत रहेगा। ❄️ दिसंबर में विवाह के शुभ मुहूर्त दिसंबर में विवाह के लिए केवल 3 से 4 शुभ तिथियां ही हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि दिसंबर के मध्य में खरमास (मलमास) शुरू हो जाएगा। इस अवधि में जब सूर्य, बृहस्पति की राशि में प्रवेश कर जाएगा और इन दिनों विवाह जैसे सभी शुभ कार्य रोक दिए जाएंगे। साथ ही शुक्र ग्रह भी अस्त हो जाएगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार शुक्र अस्त होने के कारण विवाह जैसे मांगलिक कार्य वर्जित हो जाते हैं। चार दिसंबर दिन गुरुवार, पांच दिसंबर दिन शुक्रवार, छह दिसंबर दिन शनिवार वर्ष 2025 का अंतिम विवाह मुहूर्त रहेगा।

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