बोले एटा: जानलेवा बन गया आसपुर-सकीट रोड का मोड़, ले रहा यात्रियों की जान
Etah News - आसपुर-सकीट मार्ग पर ब्लॉक के पास स्थित खतरनाक मोड़ पर लगातार सड़क हादसे हो रहे हैं। यहाँ एक महीने में पांच से छह हादसे हो चुके हैं, जिनमें कई मौतें भी हुई हैं। टोल बचाने के चक्कर में चालक इस रास्ते का उपयोग करते हैं, जिससे सड़क पर यातायात का दबाव बढ़ गया है। प्रशासन को इस समस्या का समाधान जल्द करना चाहिए।
आसपुर-सकीट मार्ग पर ब्लॉक के पास स्थित उस खतरनाक मोड़ वाहन चालकों के लिए जान लेवा हो गए। जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं दे रहे है। एक माह से पांच से छह हादसे हो जाते। पिछले माह इसी रोड पर कार खाई में गिर गई थी। इस हादसे में चार लोगों की मौत हो गई थी। टोल के रुपये बचाने को वाहन आसपास रोड से मोड़कर मलवान पर पहुंचते हैं। इस प्रमुख मुद्दे पर आपके अपने अखबार के बोले एटा के तहत स्थानीय लोगों से बात की तो उन्होंने खुलकर अपनी बात कहीं। कीट क्षेत्र की यह बडी समस्या बन गई है।
आसपुर सकीट मार्ग पर ब्लॉक के पास स्थित खतरनाक मोड़ इन दिनों लगातार सड़क हादसों का केंद्र बना हुआ है। आए दिन यहां वाहन पलटने, टकराने और बिजली के पोल टूटने की घटनाएं सामने आ रही हैं। यह मार्ग अब दुर्घटना संभावित क्षेत्र बन चुका है, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब तक ठोस कदम नहीं उठा पाए हैं। सबसे बड़ी वजह आसपुर टोल बचाने की प्रवृत्ति को माना जा रहा है। बड़ी संख्या में वाहन चालक टोल शुल्क से बचने को मुख्य मार्ग छोड़कर इस सड़क से निकलते हैं। भारी वाहनों से लेकर तेज रफ्तार कार और ट्रैक्टर-ट्रॉली तक इस रास्ते का उपयोग कर रहे हैं। इससे सड़क पर यातायात का दबाव काफी बढ़ गया है। संकरी सड़क और तीखे मोड़ के कारण जरा सी लापरवाही भी बड़े हादसे में बदल जाती है। पिछले कुछ महीनों में यहां कई वाहन अनियंत्रित होकर पलट चुके हैं। कई बार बिजली के पोल भी टूट चुके हैं। इससे घंटों तक विद्युत आपूर्ति बाधित रही। बरसात के मौसम में स्थिति और भी भयावह हो जाती है। सड़क पर फिसलन बढ़ने से वाहन चालक संतुलन खो बैठते हैं और दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि इस खतरनाक मोड़ पर कोई चेतावनी संकेतक या सावधानी बोर्ड नहीं लगाया गया है। न तो स्पीड लिमिट का बोर्ड है और न ही तीव्र मोड़ की सूचना देने वाला संकेत। रात के समय तो हालात और भी खतरनाक हो जाते हैं, क्योंकि पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था भी नहीं है। अंधेरे में अचानक मोड़ आने से वाहन चालक संभल नहीं पाते। कई बार प्रशासन और लोक निर्माण विभाग को इस संबंध में शिकायत दी गई, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला। कुछ समय पहले अस्थायी रूप से मिट्टी डालकर सड़क समतल करने की कोशिश की गई थी, परंतु वह व्यवस्था अधिक दिन नहीं चल सकी। सड़क की चौड़ाई भी कम है, जिससे दो बड़े वाहन आमने-सामने आने पर दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है। हमें यह समझना होगा कि सड़क सुरक्षा केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज की भी जिम्मेदारी है। प्रशासन का दायित्व है कि वह खतरनाक स्थानों पर संकेतक लगाए जाए। स्पीड ब्रेकर बनाए, सड़क की मरम्मत की जाए। घटनास्थल पर प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित होतो हादसों में कमी आ सकती है। - अनिल बघेल सड़क सुरक्षा के लिए खतरनाक मोड़ों पर रिफ्लेक्टर, चेतावनी संकेतक, स्पीड ब्रेकर व सोलर लाइट लगाना आवश्यक होता है। साथ ही, सड़क की मरम्मत और चौड़ीकरण भी जरूरी है। यातायात का दबाव बढ़ गया है तो वैकल्पिक मार्ग विकसित करना या टोल प्रबंधन की समीक्षा करना भी विकल्प हो सकता है। - मनीष कुमार सकरी सड़क पर भारी वाहनों से लेकर तेज रफ्तार से चलने वाले वाहनों को पता नहीं होता कि आगे सड़क खराब है। सड़क और मोड़ होने के कारण जरा सी लापरवाही भी बड़े हादसे में बदल जाती है। पिछले कुछ महीनों में यहां कई वाहन अनियंत्रित होकर पलट चुके हैं। कई बार बिजली के पोल भी टूट चुके हैं। - कालीचरन दुर्घटना संभावित इस स्थल का तत्काल निरीक्षण कराया जाना जरूरी है। स्थायी चेतावनी बोर्ड, स्पीड ब्रेकर और पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था की जाए। साथ ही, पुलिस गश्त बढ़ाकर तेज रफ्तार वाहनों पर कार्रवाई की जाए, ताकि चालक नियमों का पालन करें। हादसा होने के कारण पुलिस मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करती है। - राजेश कुमार जब टोल नहीं बना था तो इस मार्ग पर यातायात कम था, लेकिन टोल लगने के बाद से यहां वाहनों की संख्या अचानक बढ़ गई है। कई चालक जल्दी निकलने के चक्कर में तेज रफ्तार से वाहन चलाते हैं। मोड़ पर ब्रेक लगाने में देर हो जाती है और वाहन अनियंत्रित होकर पलट जाता है। कई बार तो बाल-बाल जान बची है। - जंगबहादुर अभी दो दिन पहले ही लखनऊ जा रहा ट्रक पलट गया था। इससे बिजली का पोल टूट गया था। पोल गिरने के बाद पूरे क्षेत्र की बिजली आपूर्ति ठप हो गई थी। ऐसे हादसे आए दिन होते रहते है। कुछ यहां पर ऐसा लगा दिया जाए इससे पता चले कि यहां पर मोड है। चालक वाहनों को आसपुर सकीट मेनपुरी होकर वाहनों को निकालते है। - विशाल कुमार सड़क हादसे जब हो जाता है तो मदद के लिए पहुंचते है। फोन पर अपने परिचितों को जानकारी देते समय चालक स्थान नहीं बता पाते है कि हादसा कहां पर हुआ है। नया रास्ता होने के कारण चालकों को सही से पता नहीं होता है। वैसे ही दिन में भारी-भारी वाहन चलने के कारण सड़क आते समय डर लगता रहता है। - अजय कुमार अंधेरे में अचानक मोड़ आने से वाहन चालक संभल नहीं पाते। कई बार प्रशासन और लोक निर्माण विभाग को इस संबंध में शिकायत दी गई, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला। कुछ समय पहले अस्थायी रूप से मिट्टी डालकर सड़क समतल करने की कोशिश की गई थी, परंतु व्यवस्था अधिक दिन नहीं चल सकी। - अर्जुन आसपुर सकीट मार्ग के इस दुर्घटना संभावित स्थल का तत्काल सर्वे कराया जाए। यहां स्थायी चेतावनी बोर्ड लगाए जाए जाना बहुत जरुरी है। स्पीड ब्रेकर बनाए जाएं और सोलर लाइट या अन्य प्रकाश व्यवस्था की जाए। यदि यातायात का दबाव बढ़ गया है तो सड़क का चौड़ीकरण भी किया जाए। - सौरभ कुमार सड़क सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि छोटी-छोटी व्यवस्थाएं समय पर कर दी जाएं तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं। आसपुर सकीट मार्ग का यह मोड़ राहगीरों और वाहन चालकों के लिए खतरे की घंटी बना हुआ है। संबंधित विभाग गंभीरता दिखाए, ताकि आए दिन हो रहे हादसों पर अंकुश लग सके। - बाले मौर्य कई बार यहां पर बिजली के पोल टूटकर गिर चुके है। इससे घंटों तक विद्युत आपूर्ति बाधित रही। सड़क पर फिसलन बढ़ने से वाहन चालक संतुलन खो बैठते हैं और दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि इस खतरनाक मोड़ पर कोई चेतावनी संकेतक या सावधानी बोर्ड नहीं लगाया गया है। - बंटू सिंह सकीट क्षेत्र के लोग कई बार इस बात की मांग कर चुके है। इसके बाद भी जिम्मेदारों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। अगर इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो पता नहीं कि कितने लोगों की जान और चली जाएगी। इसे गंभीरता से लेना चाहिए। हम सभी लोग इससे समस्या से बहुत परेशान है। कोई भी सुनने देखने वाला नहीं है। - राजकुमार सड़क सुरक्षा को लेकर आए दिन बैठकें होती रहती है। इसके लिए अभियान भी चलते है। इसके बाद भी इस सड़क पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। जिस दिन हादसा होता है उसी दिन लगता है कि अब समाधान हो जाएगा। इसके बाद कोई देखने के लिए आता है। पुलिस को भी इसका समाधान कराना चाहिए।- पीएम सिंह टोल के मात्र 85 से लेकर 200 रुपये के लालच में चालक फंस रहे हैं। जब हादसा हो जाता है तो कहते है कि गलती हो गई। गूगल मैप के हिसाब से चलते हुए चले जाते हैं। रास्ता नहीं पता होता। इससे हादसा हो जाता है। चालक मालिक लोगों को यह रास्ता नहीं बताते। फंस जाते हैं तब पता चलता है कि हादसा हो गया। - अनुपम कुमार
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