सैकड़ों बच्चे आज भी मजदूरी को मजबूर, श्रम विभाग ने मुक्त कराए 60 बच्चे
विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर, श्रम विभाग ने पिछले एक साल में जिले के विभिन्न प्रतिष्ठानों से करीब 60 बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराया है। हालांकि, बाल श्रमिकों की संख्या अभी भी चिंताजनक है। समाजसेवियों का मानना है कि सख्त कार्रवाई और जागरूकता अभियान के बिना बाल श्रम की समस्या नहीं सुलझेगी।

विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर आज जिले भर में बाल अधिकारों को लेकर तमाम दावे किए जा रहे हैं। यदि आंकड़ों पर नजर डालें तो श्रम विभाग ने पिछले एक साल के दौरान जिले के विभिन्न व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, होटलों और ढाबों पर अभियान चलाकर करीब 60 बच्चों को बाल श्रम से मुक्ति दिलाई है। विभाग ने इन बच्चों का रेस्क्यू करने के बाद संबंधित नियोक्ताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू की है, लेकिन सरकारी दावों से इतर जमीनी हकीकत आज भी बेहद चिंताजनक बनी हुई है। श्रम विभाग की सालभर की कार्रवाई के बावजूद जिले में बाल श्रमिकों की संख्या कम नहीं हुई है।
आज भी जिले के शहरी और ग्रामीण इलाकों में सैकड़ों मासूम बच्चे स्कूल जाने की उम्र में कड़ा श्रम कर रहे हैं। जबकि सरकार प्रदेश को पूरी तरह बाल श्रम मुक्त बनाने पर जोर दे रही है। इसके बावजूद जिले के नियोक्ताओं में प्रशासनिक कार्रवाई का कोई खौफ नजर नहीं आता। बेहद गरीब परिवारों के बच्चों को मामूली पैसों का लालच देकर उनसे 12 से 14 घंटे तक काम कराया जाता है। जिले के समाजसेवियों और प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि बाल श्रम का यह कलंक तब तक नहीं मिट सकता जब तक श्रम विभाग खुद आगे बढ़कर सघन चेकिंग अभियान नहीं चलाएगा और दोषियों को जेल भेजने जैसी सख्त से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित नहीं करेगा।गुरुवार को श्रम प्रवर्तन अधिकारी राज बाबू ने बताया कि पिछले वर्ष जिलेभर में करीब 60 बच्चों को श्रम मुक्त कराया गया था। इन बच्चों की शिक्षा और पालन पोषण के लिए संबंधित शिक्षा और प्रबोशन विभाग को जानकारी दी गई थी। इसके अलावा बाल श्रम कराने वाले प्रतिष्ठान संचालकों के खिलाफ न्यायालय में वाद दाखिल कराए गए है। उन्होंने बताया कि आज बाल श्रम दिवस पर विभिन्न विभागों के साथ जिलेभर में बाल श्रम निषेध जागरूकता रैली निकाली जाएगी।
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