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मन और इच्छाओं पर काबू रखने वाला ही है सच्चा तप धर्म उपासक

मन और इच्छाओं पर काबू रखने वाला ही है सच्चा तप धर्म उपासक

संक्षेप:

Etah News - पर्युषण महापर्व के सातवें दिन, शहर के जिनालयों में श्रावकों ने भक्ति और आस्था के साथ पूजा-अर्चना की। निर्जला उपवास और एकाशन के माध्यम से उत्तम तप धर्म का पालन किया गया। विद्धानों के प्रवचन और...

Sep 03, 2025 08:25 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, एटा
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पर्युषण महापर्व के सातवें दिन शहर के सभी जिनालयों में भक्ति, आस्था का माहौल बना रहा। श्रावक, श्राविकाओं ने निर्जला उपवास एवं एकाशन कर उत्तम तप धर्म की साधना की। इसके साथ ही विद्धानों के सानिध्य में प्रवचन सभाएं हुई। जिसमें ज्ञान की धारा बहती रही। बुधवार को पुरानी बस्ती स्थित पद्मावती पुरवाल पंचायत बड़े जैन मंदिर में सुबह एकीभाव स्त्रोत, स्वरूप स्तुति एवं रत्नखण्ड श्रावकाचार ग्रंथ का वाचन हुआ। इसके साथ ही भगवान का अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन किया गया। श्रावक श्राविकाओं ने उत्तम तप एवं सोलह कारण की भी पूजा-अर्चना की। मथुरा से आए जैन पंडित ने उत्तर तप धर्म की महिमा के बारे में बताया कि इच्छाओं को रोकना ही तप धर्म का पालन करना है, जो व्यक्ति अपनी इच्छाओं को काबू में नहीं कर पाते, तब उनकी इंद्रायां भी काबू में नहीं रहती और वह अनेकों प्रकार के बुरे कर्म पाप में फंस जाते हैं।

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उत्तम तप धर्म ज्ञान देता है कि इच्छाओं पर काबू पाना ही वास्तविक तप धर्म का पालन करना है। दोपहर में तत्वार्थ सूत्र वाचन संध्या में श्रावक प्रतिक्रमण, जिनेन्द्र भगवान की आरती की गयी। रात में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ। योगेश जैन, रजत जैन, गोटू जैन, अनूप जैन, अर्पित जैन, शुभम जैन, झलक जैन, सोनाली जैन, निष्ठा जैन, गुंजन जैन आदि लोग मौजूद रहे। सकीट के जिनालय में हुई पूजा अर्चना सकीट के जिनालय में भगवान महावीर की पूजा अर्चना के साथ श्रावक, श्राविकाओं ने व्रत उपवास कर उत्तम तप धर्म का पालन किया। वहीं जिनालय में श्रावक साधना शिविर के माध्यम से जैन पंडित अक्षत जैन उत्तम तप धर्म के बारे में बताया कि जो इंसान अपनी इच्छाओं और मन पर काबू पा लेगा। वहीं सच्चा तप धर्म का उपासक है। मन को काबू करने वाला इंसान विश्व को काबू कर सकता है। आत्म शुद्धि के लिए इच्छाओं को रोकना ही तप धर्म अवागढ़ के पर्वाधिराज दशलक्षण पर्व के सातवें दिन‌ कस्बा के सभी जिनालयों में श्रावकों ने बड़े ही उत्साह के साथ जिनेंद्र भगवान की पूजा-अर्चना की एवं बडे मंदिर में भक्तामर विधान का आयोजन हुआ। जैन पंडित ने आत्म शुद्धि के लिए इच्छाओं का रोकना तप बताया। दोपहर में तत्तवार्थ सूत्र का वाचन हुआ, सांयकाल में सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए।