बोले कासगंज: वैदिक परंपरा व सामाजिक समरसता संग मनाएं होली
Etah News - होलिका दहन के माध्यम से नकारात्मक प्रवृत्तियों का दहन करने का संकल्प लें। होली सामाजिक समरसता का पर्व है, जो जाति और वर्ग भेदों को मिटाता है। नशाखोरी और अश्लीलता से दूर रहकर पारंपरिक तरीके से होली मनाएं। प्राकृतिक रंगों का उपयोग करें और सभी वर्गों को शामिल करें।

कासंगज। होलिका दहन के माध्यम से हम अपने भीतर की नकारात्मक प्रवृत्तियों को ईर्ष्या, द्वेष, क्रोध और स्वार्थ का दहन करने का संकल्प लें। सांस्कृतिक दृष्टि से होली सामाजिक समरसता का पर्व है। यह जाति वर्ग, भाषा और क्षेत्रीय भेदों से ऊपर उठकर समाज को एक सूत्र में पिरोने का अवसर देता है। मोहल्लों और ग्रामों में सामूहिक मिलन, भजन, फाग और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से आत्मीयता बढ़ाई जा सकती है। संघ की विचारधारा भी संगठित और समरस समाज को राष्ट्र की शक्ति मानती है। होली को लेकर लोगों कहना था कि होली ऐसा अवसर बने जहां समाज के सभी वर्ग समान रूप से सहभागी हों।
हम कुछ साल पीछे देखें तो हाल के वर्षों में उत्सव के स्वरूप में कुछ विकृतियां देखने को मिली हैं, जो चिंताजनक हैं। वर्तमान में कुछ लोगों ने इस त्योहार के मूल स्वरूप को ही छोड़कर इसमें कई ऐसी चीजें शुरू कर दी हैं जो नहीं होनी चाहिए। नशाखोरी, जबरन रंग लगाना, अश्लीलता, भड़काऊ संगीत और महिलाओं के प्रति अभद्र व्यवहार जैसे कृत्य हमारी संस्कृति के अनुरूप नहीं हैं। होली उल्लास का पर्व है। ऐसे में इस त्योहार पर बिना अनुमति के किसी दूसरे पर रंग न लगाएं और मातृशक्ति के सम्मान का विशेष ध्यान रखें। समाज की मर्यादा और अनुशासन ही उसकी वास्तविक शक्ति हैं। स्वदेशी और प्राकृतिक रंगों का प्रयोग करना भी समय की आवश्यकता है। हम देखें तो रासायनिक रंगों से स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों को हानि पहुंचती है। ऐसे में रासायनिक रंगों के प्रयोग की जगह पर स्थानीय उत्पादों का उपयोग कर हम स्वदेशी भावना को भी सुदृढ़ कर सकते हैं। इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए सीमित और शास्त्र सम्मत होलिका दहन किया जाए। वहीं पंचांग के निर्धारित मुहूर्त का पालन करना हमारी धार्मिक परंपरा के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है। होली भारतीय सांस्कृतिक चेतना का उत्सव है। इसे सनातन परंपराओं, वैदिक मर्यादाओं और पारिवारिक मूल्यों के साथ मनाएं। पहले परिवार व पड़ोस में बड़ों का आशीर्वाद लें, फिर गुलाल लगाएं। - आदित्य दुबे काकोरिया होलिका दहन केवल लकड़ी जलाना नहीं, बल्कि अहंकार, अन्याय व दुष्प्रवृत्तियों का प्रतीकात्मक दहन है। बच्चों को इसकी पौराणिक कथा व सांस्कृतिक संदेश समझाएं। समय से पूर्व दहन से बचें। - विजय अग्रवाल नशा उत्सव की गरिमा को नष्ट करता है। होली पर शराब या अन्य मादक पदार्थों से दूर रहें। सजग नागरिक ही स्वस्थ समाज का निर्माण करते हैं। परिवार और युवाओं को नशामुक्त होली का संदेश दें। - मनीष शर्मा होली उत्साह का पर्व है, किंतु अनुशासनहीनता का नहीं। अश्लील गीत, भड़काऊ संगीत या अमर्यादित व्यवहार से दूर रहें। पारंपरिक फाग, भजन व लोकगीतों से वातावरण आनंदमय बनाएं। - हेमंत होली सामाजिक समरसता का पर्व है। जाति, वर्ग, भाषा या आर्थिक स्थिति के भेद को भूलकर सबको साथ जोड़ें। मोहल्ले में सामूहिक मिलन कार्यक्रम आयोजित करें, जहां सभी परिवार सहभागी बनें। - विवेक वशिष्ठ रासायनिक रंगों के स्थान पर प्राकृतिक व स्वदेशी गुलाल लें। इससे स्वास्थ्य सुरक्षित रहेगा व पर्यावरण भी संरक्षित रहेगा। स्थानीय कारीगरों व छोटे व्यापारियों से रंग खरीदकर स्वदेशी अर्थव्यवस्था सशक्त करें। - दीपक होली के दिन जरूरतमंदों को मिठाई, वस्त्र या आवश्यक सामग्री देकर सेवा का भाव जगाएं। वृद्धजनों, अकेले रह रहे लोगों व श्रमिक परिवारों को उत्सव में शामिल करें। कोई भी वर्ग उपेक्षित न रहे। - सत्यम चतुर्वेदी होली परिवारों को जोड़ने का अवसर है। घर के सभी सदस्य मिलकर पकवान बनाएं, पूजा करें और मिलन समारोह आयोजित करें। बच्चों को परंपराओं की जानकारी दें और बड़ों के अनुभव सुनें। - अनमोल अग्रवाल होली पर पुराने मतभेद मिटाने का प्रयास करें। जिनसे दूरी हो गई हो, उनके घर जाकर स्नेहपूर्वक मिलें। संवाद ही समाधान है। समाज में सौहार्द्र और विश्वास का वातावरण बने, यही पर्व का उद्देश्य है। - सतीश होली के अवसर पर राष्ट्रगीत, देशभक्ति गीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करें। यह पर्व राष्ट्रीय एकता का भी प्रतीक बने। विविधता में एकता ही भारत की विशेषता है। - डॉ.बशीर रहीस खान
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