
बीमार समधन को देखने गए थे, लौट नहीं पाए; दिल्ली धमाके में मरे व्यापारी का शव अमरोहा पहुंचा
जबकि लोकेश अमरोहा के हसनपुर के रहने वाले थे। लोकेश के परिवारीजनों का कहना है कि अपनी बीमार समधन को देखने सोमवार की सुबह ही दिल्ली गए थे। माना जा रहा है कि लोकेश ने ही अशोक को मिलने के लिए लाल किले के नजदीक बुलाया था। इसी बीच कार में ब्लास्ट होने से दोनों की मौत हो गई।
दिल्ली में लाल किले के पास हुए कार धमाके में अमरोहा के रहने वाले डीटीसी बस कंडक्टर अशोक (उम्र-34 साल) के अलावा खाद कारोबारी लोकेश अग्रवाल की भी जान गई है। अशोक अमरोहा के कोतवाली क्षेत्र के गांव मंगरौला के रहने वाले थे जबकि लोकेश हसनपुर के रहने वाले थे। लोकेश के परिवारीजनों का कहना है कि अपनी बीमार समधन को देखने सोमवार की सुबह ही दिल्ली गए थे। माना जा रहा है कि लोकेश ने ही अशोक को मिलने के लिए लाल किले के नजदीक बुलाया था। इसी बीच कार में ब्लास्ट होने से दोनों की मौत हो गई। पोस्टमार्टम के बाद दोनों के शव घर लाए गए हैं। परिवारों में कोहराम मचा हुआ है। गंगा घाट पर शवों के अंतिम संस्कार की तैयारी की जा रही है। जानकारी के मुताबिक, नगर निवासी लोकेश अग्रवाल शहर के रहरा अड्डे पर खाद की दुकान चलाते थे।
लोकेश अग्रवाल की समधन पिछले कई दिन से बीमार हैं और दिल्ली के अस्पताल में उनका उपचार चल रहा है। वह सोमवार सुबह अपनी समधन को देखने के लिए दिल्ली गए थे। लोकेश के बेटे गौरव अग्रवाल का कहना है कि सोमवार रात 9 बजे के बाद उनके पास दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी का फोन आया। उसने बताया कि लोकेश अग्रवाल का फोन घटनास्थल के पास मिला है। घटना के बाद से लोकेश अग्रवाल ने परिजनों से भी कोई संपर्क नहीं किया। सूचना मिलते ही परिजन दिल्ली के लिए रवाना हो गए। वहां मोर्चरी में रखे उनके शव को परिजनों ने देखते ही पहचान लिया। परिवार में कोहराम मच गया। इस ब्लास्ट में मंगरौला निवासी डीटीसी बस के परिचालक क्षेत्र के गांव मंगरौला निवासी अशोक पुत्र जगवंश गुर्जर की भी मौत हुई है। अब तक मिली जानकारी के मुताबिक, अशोक के पिता जगवंश से लोकेश की दोस्ती थी। इसी नाते वह अशोक से स्नेह रखते थे। अशोक ने कुछ समय तक लोकेश की बस भी चलाई थी। लोकेश के परिवार में दो बेटे सौरभ और गौरव हैं। सौरभ देहरादून में वैज्ञानिक है जबकि, उसकी पत्नी देहरादून में बीडीओ है। गौरव इंजीनियर है।
पिता ने सरकार से की परिवार की मदद की मांग
लोकेश अग्रवाल के पिता ओम प्रकाश ने कहा कि वह मेरा बड़ा बेटा था। वह कल अपने बेटे की सास से मिलने दिल्ली गया था, जो वहां अस्पताल में भर्ती थीं। यह एक आतंकवादी हमला है। हम चाहते हैं कि सरकार उसके परिवार की मदद करे और आतंकवादियों को कड़ी से कड़ी सज़ा मिले। वहीं लोकेश के भाई सोनू ने कहा कि लोकेश अग्रवाल मेरे बड़े भाई थे। वह अपने बेटे की सास से मिलने दिल्ली गए थे, जो वहां अस्पताल में भर्ती थीं। अस्पताल जाने के बाद, हम लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास गए जहां विस्फोट हुआ था। जब हमने उन्हें फ़ोन किया, तो एक पुलिसवाले ने फ़ोन उठाया और हमें घटना की जानकारी दी।





