दान में आए नोटों के बंडल बनाते हुए हुई हेराफेरी, राम मंदिर चढ़ावा चोरी की जांच में खुलासा

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राम मंदिर चढ़ावा चोरी की जांच में बड़ा खुलासा हो गया है। दान में आए नोटों के बंडल बनाते समय हेराफेरी हुई। ्गिररफ्तार आठ अभियुक्तों में छह अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्र, अविनाश शुक्ल, करुणेश पांडेय का यही काम था।

दान में आए नोटों के बंडल बनाते हुए हुई हेराफेरी, राम मंदिर चढ़ावा चोरी की जांच में खुलासा

अयोध्या राम जन्मभूमि मंदिर चढ़ावा प्रकरण की जांच में एक नया पहलू सामने आया है। एसआईटी से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इस मामले में नामजद आठ आरोपियों में से छह कर्मियों का काम नोटों की मशीन से गिनती करना नहीं था। इनकी ड्यूटी दानपात्रों से निकले मुड़े-तुड़े नोटों को सीधा कर बंडल बनाते हुए रबर लगाकर व्यवस्थित करने की थी। जांच एजेंसियों का मानना है कि कथित हेराफेरी इसी दौरान की गई।

्गिररफ्तार आठ अभियुक्तों में छह अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्र, अविनाश शुक्ल, करुणेश पांडेय का यही काम था। इस दौरान दानपात्रों को खाली करने में ही छोटे-मोटे आभूषणों पर भी हाथ साफ किया गया। रामशंकर यादव टिन्नू किसी को भी बिना तलााशी के अंदर-बाहर करवाने की हैसियत में था, इसलिए उसने अपने स्तर पर काम किया। रिटायर बैंक कर्मी सुभाष श्रीवास्तव गणना का इंजार्ज था, आरोप है कि उसने मॉनीटरिंग में अनदेखी की और सब कुछ होते रहने देने दिया। बताया जाता है कि राम मंदिर परिसर में लगे करीब 40 दानपात्रों से निकलने वाले नकद चढ़ावे में अधिकांश नोट मुड़े-तुड़े होते थे। इन नोटों को पहले सीधा कर बंडल बनाया जाता था और एक दिन के लिए सुरक्षित रखा जाता था। इसके बाद बैंक कर्मचारियों की मौजूदगी में मशीनों से नोटों की गणना होती थी। गणना पूरी होने के बाद स्लिप लगाकर नकदी को बक्सों में सील कर बैंक में जमा कराया जाता था।

एमओयू के बाद बदली व्यवस्था

नौ फरवरी 2024 को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के बीच एमओयू होने के बाद इन कर्मियों को ट्रस्ट की सिफारिश पर सैनिक सिक्योरिटीज के माध्यम से वेतन दिया जाने लगा। हालांकि, बताया जाता है कि इनमें से कई कर्मचारी एमओयू से पहले भी इसी कार्य में लगे हुए थे।

रामशंकर यादव पर जांच का फोकस क्यों

सूत्रों का दावा है कि आरोपी रामशंकर यादव पूरे सिस्टम की निगरानी से जुड़ा था और उसे विशेष अधिकार प्राप्त थे। बताया जाता है कि वॉकी-टॉकी के माध्यम से वह बिना तलाशी किसी व्यक्ति की एंट्री और एग्जिट कराने की स्थिति में था। जांच एजेंसियों को संदेह है कि इसी व्यवस्था का कथित तौर पर दुरुपयोग कर नकदी बाहर निकाली गई। इसी आधार पर उसके खिलाफ आरोपों की जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

टीनू यादव और सुभाष श्रीवास्तव की भूमिका

सूत्रों के मुताबिक, टीनू यादव और सुभाष श्रीवास्तव सीधे नोटों की गणना प्रक्रिया में शामिल नहीं थे। सुभाष श्रीवास्तव की भूमिका निगरानी की बताई जा रही है, जबकि टीनू यादव व्यवस्था संचालन से जुड़ा हुआ था।

छह कर्मियों की क्या थी जिम्मेदारी

- दानपात्रों से निकले नोटों को सीधा करना।

- नोटों की बंडलिंग करना।

- बंडलों पर रबर लगाकर व्यवस्थित करना।

- मशीन से नोट गिनने का कार्य इनके जिम्मे नहीं था।

गिनती कौन करता था

- मशीन से नोटों की गणना स्टेट बैंक के स्थायी कर्मचारी करते थे।

- गणना प्रक्रिया में ट्रस्ट के प्रतिनिधियों की भी भागीदारी रहती थी।

- बैंक के आठ स्थायी कर्मचारी पूरी प्रक्रिया में शामिल बताए जाते हैं।

- गिनती के बाद स्लिप लगाकर नकदी बैंक में जमा कराई जाती थी।

Deep Pandey

लेखक के बारे में

Deep Pandey

दीप नरायन पांडेय लाइव हिन्दुस्तान में पिछले आठ सालों से यूपी की खबरें करते हैं। डिजिटल, टीवी और प्रिंट जर्नलिज्म में 15 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले दीप नरायन पांडेय वरिष्ठ पत्रकार हैं। दीप अब डिजिटल मीडिया के जाने माने नाम बन गए हैं। दीप हिंदी भाषा की डिजिटल पत्रकारिता के नए आयामों को बेहतर समझते हैं। यूपी की राजनीति के साथ क्राइम की खबरों पर अच्छी पकड़ है। सामाजिक, इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन, शिक्षा और हेल्थ पर भी लिखते हैं। दीप पाठकों की पसंद को समझने और उसी तरह से न्पूज प्रस्तुत करने में माहिर हैं। दीप सरल भाषा में खबरों को पाठकों तक पहुंचाते हैं। खबर लिखने के अलावा साहित्य पढ़ने-लिखने में भी रुचि रखते हैं। मास कम्युनिकेशन में बीए और एमए दीप नरायन पांडेय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गोंडा के रहने वाले हैं। दीप ने पत्रकारिता की शुरुवात लखनऊ से की। टीवी चैनल से करियर का आगाज करने वाले दीप इसके बाद प्रिंट अमर उजाला लखनऊ में भी रहे। हिन्दुस्तान प्रिंट में वाराणसी, गोरखपुर, फिर लखनऊ में कार्य के दौरान विभिन्न जिलों के डेस्क इंचार्ज रहे हैं। यूपी विधानसभा चुनाव 2012, 2017, 2022, लोकसभा चुनाव, पंचायत चुनावों के दौरान बेहतर कवरेज कर चुके हैं।

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