काम की बात: बिजली विभाग ने करोड़ों ग्राहकों दी बड़ी राहत, बिल को लेकर अचानक लिया गया फैसला वापस

लखनऊ, विशेष संवाददाता
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यूपी में बिजली विभाग ने करोड़ों ग्राहकों को बड़ी राहत दे दी है। बिजली बिल में नाम पता गायब कर देने का पिछले दिनों लिया गया फैसला वापस ले लिया है। इस फैसले से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।

bijali bills
यूपी में बिजली के करोड़ों ग्राहकों को राहत देते हुए दोबारा बिलों पर नाम पता आने लगा है।

बिजली विभाग ने अपना एक फैसला वापस लेकर करोड़ों ग्राहकों को बड़ी राहत दे दी है। अगस्त में मिल रहे बिजली बिलों में फिर से उपभोक्ताओं का नाम और पता लिखा जाना शुरू हो गया है। बीते महीने उपभोक्ताओं के बिल में नाम और पता लिखा जाना अचानक बंद कर दिया गया था। इससे उपभोक्ता परेशान थे। बड़ी संख्या में लोग बिजली बिल का इस्तेमाल अपने पता के दस्तावेज के तौर पर करते रहे हैं। ऐसे में लोगों को पावर कॉरपोरेशन के फैसले की वजह से परेशानी झेलनी पड़ रही थी।

पिछले महीने पावर कॉरपोरेशन ने अचानक बिजली बिल बनाने के सॉफ्टवेयर में बदलाव कर दिया था। इसके बाद उपभोक्ताओं के नाम और पते में कई अक्षर बीच-बीच में गायब हो गए थे। उनकी जगह पर ‘एक्स’ लिखा आ रहा था। इससे उन उपभोक्ताओं को दिक्कत होने लगी जो इन बिल का इस्तेमाल अपने पते के दस्तावेज के तौर पर करते थे। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने भी इस पर आपत्ति दर्ज कराई थी।

उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष और राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने नियामक आयोग में आपत्ति सौंपते हुए इसे विद्युत वितरण संहिता-2003 की भावना के विपरीत बताया था। इस आपत्ति के बाद पावर कॉरपोरेशन ने दोबारा अपने सॉफ्टवेयर में बदलाव किया है।

इस बदलाव के बाद अब फिर से पहले की तरह स्पष्ट रूप से नाम और पता लिखा बिल उपभोक्ताओं को मिलने लगा है। अवधेश ने कहा कि बिजली बिल केवल भुगतान का दस्तावेज नहीं है बल्कि यह आधार, पासपोर्ट, बैंक, ड्राइविंग लाइसेंस, गैस कनेक्शन समेत तमाम सरकारी महकमों में पते के सरकारी दस्तावेज के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। लिहाजा बिल में नाम और पता अंकित रहना उपभोक्ताओं का महत्वपूर्ण अधिकार है। उन्होंने कहा कि इस मसले पर न केवल नियामक आयोग में बल्कि पावर कॉरपोरेशन के निदेशक (वाणिज्य) से भी आपत्ति दर्ज कराई गई थी।

बिना आयोग की अनुमति के पावर कॉरपोरेशन ने लिया था फैसला

सूत्र बताते हैं कि उपभोक्ताओं का नाम और पता स्पष्ट रूप से दर्ज न करने की व्यवस्था लागू करने के पहले पावर कॉरपोरेशन ने नियामक आयोग से इसकी अनुमति नहीं ली थी। कॉरपोरेशन के सूत्र बताते हैं कि बिजली बिल के मार्फत उपभोक्ताओं का नाम और पता सार्वजनिक न हो, इसलिए नाम और पते के कई अक्षरों की जगह ‘एक्स’ लिखने की व्यवस्था शुरू की गई थी। हालांकि, इस फैसले के बीच में उसने यह ध्यान ही नहीं दिया कि ऐसा करने से उपभोक्ता बिल का इस्तेमाल अपने पते के तौर पर नहीं कर सकेंगे। ऐसे में व्यवस्था लागू होने के बाद जब विरोध हुआ तो पावर कॉरपोरेशन को वह बदलाव वापस लेना पड़ा।

आरडीएसएस में हजारों करोड़ खर्च के बाद भी अपेक्षित सुधार नहीं

वहीं, केंद्र सरकार की रिवैंप डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) में हजारों करोड़ खर्च होने के बाद भी अब तक बिजली सेवाओं में अपेक्षित सुधार न होने के आरोप लग रहे हैं। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने खर्च की समीक्षा और जवाबदेही तय किए जाने की मांग की है।

आरडीएसएस में 44,094 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव है। इसमें 27 हजार करोड़ रुपये स्मार्ट मीटर में खर्च होने हैं। बाकी रकम से छूटे मजरों का विद्युतीकरण, विद्युत आपूर्ति का ढांचा ठीक करना, नए ट्रांसफॉर्मर लगाना, एरियल बंच कंडक्टर लगाने समेत अन्य काम प्रस्तावित हैं। काम होने पर ब्रेकडाउन में कमी आने, बिलिंग बेहतर होने, उपभोक्त सेवाओं में सुधार आने के दावे किए गए थे। काफी काम हो चुका है। मसलन, करीब एक करोड़ स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं और बिजली ढांचे को लेकर जो काम होने थे, उनमें से लगभग सभी पूरे हो गए हैं। बावजूद इसके बिजली सुविधाओं में अपेक्षित सुधार नहीं दिखा है।

राज्य के 67 हजार उपभोक्ताओं को बीते 15 महीनों में पहली बार बिजली बिल नहीं मिला है। तमाम उपभोक्ताओं के कनेक्शन मीटर रीचार्ज के बाद भी नहीं जुड़े, जिसकी वजह से नियामक आयोग को पावर कॉरपोरेशन पर जुर्माना लगाना पड़ा। 1912 पर आने वाली शिकायतों में से तमाम शिकायतों का समय से समाधान नहीं हो रहा है। मुआवजा कानून का अब तक पालन नहीं हो सका।

उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष और राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा कहते हैं कि इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बाद भी यदि उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति, शिकायत निस्तारण, बिलिंग और वितरण व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं मिल रहा है तो इसकी गंभीरता से समीक्षा जरूरी है। अब निचले स्तर से लेकर पावर कॉरपोरेशन के चेयरमैन स्तर तक स्पष्ट जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

यहां इतना खर्च करने का प्रस्ताव है योजना में

डिस्कॉम खर्च (करोड़ रुपये में)

मध्यांचल 13,539.33

पश्चिमांचल 12,695.42

पूर्वांचल 9,481.52

दक्षिणांचल 7,434.66

केस्को 943.33

Yogesh Yadav

लेखक के बारे में

Yogesh Yadav

योगेश यादव लाइव हिन्दुस्तान में पिछले छह वर्षों से यूपी सेक्शन को देख रहे हैं। यूपी की राजनीति, क्राइम और करेंट अफेयर से जुड़ी खबरों को कवर करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यूपी की राजनीतिक खबरों के साथ क्राइम की खबरों पर खास पकड़ रखते हैं। यूपी में हो रहे विकास कार्यों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे बदलाव के साथ यहां की मूलभूत समस्याओं पर गहरी नजर रखते हैं।

पत्रकारिता में दो दशक का लंबा अनुभव रखने वाले योगेश ने डिजिटल से पहले प्रिंट में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। लम्बे समय तक हिन्दुस्तान वाराणसी में सिटी और पूर्वांचल के नौ जिलों की अपकंट्री टीम को लीड किया है। वाराणसी से पहले चड़ीगढ़ और प्रयागराज हिन्दुस्तान को लांच कराने वाली टीम में शामिल रहे। प्रयागराज की सिटी टीम का नेतृत्व भी किया।

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से बीकॉम में ग्रेजुएट और बनारस की ही काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट योगेश ने कई स्पेशल प्रोजेक्ट पर काम भी किया है। राष्ट्रीय नेताओं के दौरों को कवर करते हुए उनके इंटरव्यू किये। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े रहस्यों पर हिन्दुस्तान के लिए सीरीज भी लिख चुके हैं।

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