फर्जी एनओसी पर 10 साल से चल रहा था बिजली कनेक्शन, अधिकारी का सिग्नेचर भी फर्जी
लखनऊ के अलीगंज में 22 जून को चार मंजिला भवन में आग लग गई थी। अग्निकांड में 15 लोगों की मौत हो गई थी। उन्हें अग्निकांड की जांच मिली थी। जांच में पता चला कि तत्कालीन सहायक निदेशक के फर्जी हस्ताक्षर से वर्ष 2016 में यह एनओसी तैयार की गई थी। उसी एनओसी के आधार पर उसने निगम से बिजली का कनेक्शन लिया था।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज सेक्टर-डी के चार मंजिला हुए भवन में हुए भीषण अग्निकांड में 15 की मौत हो गई और नौ घायल हुए। जानलेवा अग्निकांड के बाद विद्युत सुरक्षा विभाग ने जांच की तो पता चला कि तत्कालीन सहायक निदेशक के फर्जी हस्ताक्षर से वर्ष 2016 में यह एनओसी तैयार की गई थी। उसी एनओसी के आधार पर उसने निगम से बिजली का कनेक्शन लिया था। इसके बाद विद्युत सुरक्षा विभाग ने अलीगंज थाने में वीरेंद्र शुक्ला के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।
इंस्पेक्टर अलीगंज इंस्पेक्टर ध्रुव कुमार के मुताबिक मुकदमा विद्युत सुरक्षा विभाग के सहायक निदेशक आलोक शुक्ला ने दर्ज कराया है। उन्होंने तहरीर में लिखा कि अलीगंज सेक्टर-डी में 22 जून को चार मंजिला भवन में आग लग गई थी। अग्निकांड में 15 लोगों की मौत हो गई थी। उन्हें अग्निकांड की जांच मिली थी। जांच में पता चला कि वीरेंद्र ने भवन की एनओसी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर तैयार की थी। जांच में पता चला कि भवन स्वामी वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला पुत्र रामेश्वर प्रसाद शुक्ला निवासी एमएस-102 सेक्टर-डी अलीगंज की एनओसी पत्रांक-2461 दिनांक 24 जून 2016 को डिस्पैच है।
वहीं, कार्यालय के अभिलेखों में पड़ताल की गई तो पता चला कि उक्त डिस्पैच नंबर किसी अन्य विषय से संबंधित पत्र का है। फर्जीवाड़ा पकड़े जाने पर गहनता से जांच हुई तो जानकारी हुई कि एनओसी में तत्कालीन सहायक निदेशक पीके निगम के जो हस्ताक्षर किए गए हैं व उनसे मेल नहीं खा रहे हैं। इसके बाद उच्चाधिकारियों को मामले की जानकारी देकर रिपोर्ट तैयार की गई। इंस्पेक्टर ने बताया कि विद्युत सुरक्षा विभाग के सहायक निदेशक आलोक शुक्ला की तहरीर के आधार पर भवन स्वामी वीरेंद्र शुक्ला के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। मामले में आरोपी वीरेंद्र शुक्ला को पहले ही जेल भेजा जा चुका है।
सहायक निदेशक का दावा, तीन बिंदुओं से फर्जीवाड़े का खुलासा -
- एनओसी पर दर्ज सहायक निदेशक पीके निगम के हस्ताक्षर जांच में मेल नहीं खाए।
- एनओसी की लिखावट व फांट साइज विभाग से बिल्कुल भिन्न मिला।
- पेपर डिजाइन भी विद्युत सुरक्षा विभाग से बिल्कुल भिन्न मिला।
लेखक के बारे में
Ajay Singhअजय कुमार सिंह पिछले आठ वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में पूर्वांचल के बड़े हिस्से से खबरों का कोआर्डिनेशन देख रहे हैं। वह हिन्दुस्तान ग्रुप से 2010 से जुड़े हैं। पत्रकारिता में 27 वर्षों का लंबा अनुभव रखने वाले अजय ने टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। हिन्दुस्तान से पहले वह ईटीवी, इंडिया न्यूज और दैनिक जागरण के लिए अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। अजय राजनीति, क्राइम, सेहत, शिक्षा और पर्यावरण से जुड़ी खबरों को गहराई से कवर करते हैं। बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट अजय फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान में असिस्टेंट एडिटर हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति और क्राइम की खबरों पर विशेष फोकस रखते हैं।
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