बिजली बिल राहत योजना: मूल बकाया माफी नियमित भुगतान वालों पर भारी? कहीं ऐसे तो नहीं होगी भरपाई
बिजली कंपनियां हर साल आय और खर्च का ब्योरा नियामक आयोग में दाखिल करती हैं। आय और खर्च में अंतर की भरपाई के बराबर की रकम के एवज में वे बिजली बिल बढ़ाने की मांग करती हैं। बिल के तौर पर बकाया राशि चूंकि उपभोक्ताओं पर उधार है, इसलिए कंपनी उसे अपने खाते में आय के तौर पर दिखाती है।
एक दिसंबर से प्रदेश में बिजली बकायेदारों का बकाया वसूलने के लिए बिजली बिल राहत योजना (ओटीएस) लागू है। पहली बार न केवल ब्याज बल्कि 25 प्रतिशत मूलधन भी माफ किया जा रहा है। योजना को लागू हुए सात दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक यह नहीं पता है कि मूलधन माफी की रकम की भरपाई सरकार करेगी या नहीं। जानकारों के मुताबिक अगर सरकार मूलधन माफी की भरपाई नहीं करती है तो इसका असर नियमित भुगतान करने वाले उपभोक्ताओं के बिजली बिल के रूप में आ सकता है क्योंकि मूलधन में कमी का अंतर कंपनी की पूंजी पर पड़ेगा और उसके अंतर की मांग बिल की दरों में बढ़ोतरी के तौर पर की जाएगी।
प्रदेश में तकरीबन 1.45 करोड़ उपभोक्ताओं पर बिल के तौर पर करीब 55,980 करोड़ रुपये बकाया हैं। इनमें से मूलधन 33,427 करोड़ रुपये है जबकि 21,533 करोड़ रुपये ब्याज है यानी, मूलधन का दो-तिहाई हिस्सा केवल ब्याज है। बिजली कंपनियां हर साल आय और खर्च का ब्योरा नियामक आयोग में दाखिल करती हैं व आय और खर्च में अंतर की भरपाई के बराबर की रकम के एवज में बिजली बिल बढ़ाने की मांग करती हैं। बिल के तौर पर बकाया राशि चूंकि उपभोक्ताओं पर उधार है, इसलिए कंपनी उसे अपने खाते में आय के तौर पर दिखाती है। अब जबकि इस साल इस रकम में भी माफी दी जा रही है, तो यह कंपनी को शुद्ध नुकसान होगा, जिसकी भरपाई अगर सरकार नहीं करेगी तो इसका बोझ बिजली दरों में इजाफे के तौर पर नियमित भुगतान करने वाले उपभोक्ताओं पर आएगा।
मूल बकाया टैरिफ का हिस्सा सरकार का अधिकार नहीं है
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष और राज्य व केंद्रीय सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा कहते हैं कि सरकार मूल धन में माफी का ऐलान नहीं कर सकती है। यह टैरिफ का हिस्सा है। यह नियामक आयोग का अधिकार है। मूलधन में माफी की रकम सरकार को भरनी होगी। इसके लिए नियामक आयोग में याचिका दाखिल की गई है। इस रकम का बोझ उन सामान्य उपभोक्ताओं पर नहीं आने दिया जाएगा, जो नियामित बिजली बिल जमा करते हैं।
ब्याज भी कितना होगा माफ, इस पर भी नजर
ओटीएस में ब्याज माफी की रकम सामान्य तौर पर पावर कॉरपोरेशन अपने रिटर्न ऑफ इक्विटी से समायोजित करता है। यह रकम ढाई से तीन हजार करोड़ रुपये के आसपास होती है। अगर इस बार ओटीएस में इससे ज्यादा का ब्याज माफ होता है या मूल में अच्छी रकम माफ होती है तो नियमित भुगतान वाले उपभोक्ताओं के लिए मुसीबत का सबब बन सकता है। जानकारों के मुताबिक अगर बकायेदारों को इस तरह की सहूलियत दी जा रही है तो नियामित भुगतान वालों को भी रियायत मिलनी चाहिए। उन्होंने नियमित भुगतान कर गलती नहीं की है।
ये हैं ओटीएस में शामिल
-दो किलोवॉट तक के घरेलू उपभोक्ता
-एक किलोवॉट तक के वाणिज्यिक उपभोक्ता
-कभी भी बिजली बिल न जमा करने वाले उपभोक्ता
-लंबे वक्त से बिजली का बिल न जमा करने वाले
-31 मार्च 2025 तक एक बार भी बिजली बिल न जमा करने वाले उपभोक्ता, जिन्होंने उसके बाद नवंबर तक बिल का कुछ हिस्सा भुगतान कर दिया





