भाजपा का 'सहयोगी दल' बन गया निर्वाचन आयोग, एसआईआर को लेकर अखिलेश का बड़ा हमला
अखिलेश यादव ने कहा, 'सरकार ने कुछ एजेंसियों को नियुक्त किया है जिनमें दिल्ली, लखनऊ और देशभर के अन्य स्थानों से काम कर रहे पेशेवर लोग शामिल हैं। उनके पास पूरी मतदाता सूची का डेटा उपलब्ध है।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग और भाजपा पर बड़ा हमला बोला। अखिलेश यादव ने दावा किया कि सरकार द्वारा नियुक्त पेशेवर एजेंसियां उन चुनिंदा बूथों को निशाना बना रही हैं, जहां उनकी पार्टी ने चुनाव जीता है।
पत्रकारों से बातचीत के दौरान अखिलेश यादव ने कहा, 'सरकार ने कुछ एजेंसियों को नियुक्त किया है जिनमें दिल्ली, लखनऊ और देशभर के अन्य स्थानों से काम कर रहे पेशेवर लोग शामिल हैं। उनके पास पूरी मतदाता सूची का डेटा उपलब्ध है और इसके माध्यम से वे उन बूथों की पहचान कर रहे हैं जहां समाजवादी पार्टी ने जीत हासिल की है।' 'फॉर्म-सात' का उपयोग किसी के नाम को मतदाता सूची में शामिल करने या सूची से हटाने के लिए किया जाता है। पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया ने पहले ही चुनाव परिणामों को प्रभावित किया है।
एसआईआर के कारण बिहार में जीते हैं चुनाव
उन्होंने कहा, 'एसआईआर के जरिए ही वे बिहार चुनाव जीतने में सफल हुए हैं। इसमें एसआईआर की अहम भूमिका रही है।' यादव ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में भी इसी तरह के प्रयास जारी हैं। उन्होंने कहा, 'भाजपा पश्चिम बंगाल में भी यही करने की कोशिश कर रही है। इसलिए वहां की सरकार और मुख्यमंत्री बार-बार कह रही हैं कि निर्वाचन आयोग भाजपा का आयोग बन गया है।' उच्चतम न्यायालय में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खुद पैरवी करने का जिक्र करते हुए यादव ने कहा, 'उन्हें भाजपा के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में पेश होने के लिए काला कोट पहनने को मजबूर किया गया। इससे पता चलता है कि किस तरह का भेदभाव हो रहा है और निर्वाचन आयोग भाजपा का 'सहयोगी दल' बन गया है।'
पीडीए के प्रहरियों ने संदिग्ध प्रपत्रों पर आपत्ति जताई
सपा प्रमुख ने कहा कि कई पार्टी कार्यकर्ताओं और पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के 'प्रहरियों' ने संदिग्ध प्रपत्रों पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा, 'समय-समय पर हमारे संगठन, पीडीए के प्रहरियों और जिम्मेदार नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने हमें पहले से भरे हुए प्रपत्र सौंपे हैं।' यादव ने कुछ विशिष्ट मामलों का जिक्र भी किया गया। उन्होंने कहा, 'दशरथ और नंदलाल से जुड़ा मामला अब सामने आया है। नंदलाल आज हमारे साथ हैं। मुझे खुशी है कि बहादुर नंदलाल हमारे साथ खड़े हैं।' फर्जी हस्ताक्षरों का आरोप लगाते हुए यादव ने कहा, 'यह वही नंदलाल हैं जिनके हस्ताक्षर कथित तौर पर भाजपा द्वारा लिए गए थे। नंदलाल अंगूठे का निशान इस्तेमाल करते हैं।
लेखक के बारे में
Dinesh Rathourदिनेश राठौर वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट
पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में हरदोई से की थी। कानपुर
यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका
(डिजिटल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हरदोई की गलियों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर
आज डिजिटल मीडिया के शिखर तक पहुँच चुका है। दिनेश राठौर ने यूपी और राजस्थान के विभिन्न शहरों की नब्ज को प्रिंट और
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लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में कार्यरत दिनेश दिनेश, खबरों के पीछे की राजनीति और सोशल मीडिया के ट्रेंड्स (वायरल
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पत्रकारिता का सफर
हरदोई ब्यूरो से करिअर की शुरुआत करने के बाद दिनेश ने कानपुर हिंदुस्तान से जुड़े। यहां बतौर स्ट्रिंगर डेस्क पर करीब
एक साल तक काम किया। इसके बाद वह कानपुर में ही दैनिक जागरण से जुड़े। 2012 में मुरादाबाद हिंदुस्तान जब लांच हुआ तो
उसका हिस्सा भी बने। करीब दो साल यहां नौकरी करने के बाद दिनेश राजस्थान पत्रिका से जुड़ गए। सीकर जिले में दिनेश ने
करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में
प्रिंट के डेस्क पर वापसी की। लगभग दो साल की सेवाओं के बाद डिजिटल हिंदुस्तान में काम करने का मौका मिला जिसका सफर जारी
है।


