बुजुर्ग दंपति ने जहर खाकर दी जान, इकलौता बेटा अपने परिवार के साथ रहता था अलग
बाराबंकी के सधवापुर में एक बुजुर्ग दंपति ने जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली। मजदूरी कर जीवन यापन करने वाले गणेश और कलावती अपने पुराने घर में अकेले रहते थे, जबकि बेटा अलग रहता था।

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने बुढ़ापे में अकेलेपन और पारिवारिक बिखराव की त्रासदी को उजागर कर दिया है। रामसनेहीघाट क्षेत्र के सधवापुर गांव में मंगलवार की शाम एक बुजुर्ग दंपति ने जहरीला पदार्थ खाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। उम्र के उस पड़ाव पर, जहाँ इंसान को अपनों के साथ और सहारे की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, उस वक्त इस वृद्ध दंपति का आत्मघाती कदम उठाना पूरे इलाके में चर्चा और शोक का विषय बना हुआ है। इस घटना ने न केवल गांव के लोगों को स्तब्ध कर दिया है, बल्कि उन सामाजिक रिश्तों पर भी सवाल खड़े किए हैं जहाँ माता-पिता उम्र ढलने पर अकेले रह जाते हैं।
पुराने घर में अकेलेपन से जूझ रहे थे बुजुर्ग दंपति
सधवापुर गांव के निवासी गणेश (65) और उनकी पत्नी कलावती (60) गांव के ही अपने पुराने पुश्तैनी मकान में रहते थे। गांव वालों के अनुसार, यह दंपति बेहद सादा जीवन व्यतीत करता था। जीवन के अंतिम दौर में भी गणेश ने हार नहीं मानी थी और वे मेहनत-मजदूरी व अपनी थोड़ी सी खेती के सहारे अपना और अपनी पत्नी का गुजर-बसर कर रहे थे। वहीं, उनका इकलौता बेटा पवन अपनी पत्नी और बच्चों के साथ उसी गांव में दूसरी जगह बने प्रधानमंत्री आवास में अलग रहता था। घर के इस बंटवारे और दूरियों ने शायद बुजुर्गों के मन में कोई ऐसी फांस पैदा कर दी थी, जिसका अंत इतना भयावह होगा, किसी ने सोचा न था।
पोती ने जब देखी दादी की हालत, तब खुला राज
यह खौफनाक राज मंगलवार की शाम को उस वक्त खुला जब बुजुर्ग दंपति की पोती अपनी दादी से मिलने पुराने घर पहुंची। वहां उसने अपनी दादी कलावती को लगातार उल्टियां करते देखा। मासूम बच्ची घबराकर अपनी मां पूजा के पास दौड़ी और पूरी बात बताई। जब बहू पूजा मौके पर पहुंची तो वहां का मंजर देखकर उसके होश उड़ गए। कलावती जमीन पर तड़प रही थी और दूसरी ओर बिस्तर पर गणेश अचेत पड़े हुए थे। शोर मचने पर आसपास के लोग जुटे और टेंपो चलाने गए बेटे पवन को सूचना दी गई। आनन-फानन में दोनों को सीएचसी रामसनेहीघाट ले जाया गया, जहाँ से उनकी नाजुक हालत को देखते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।
अस्पताल में थमी सांसें, परिवार में मचा कोहराम
मौत से जद्दोजहद के बीच बाराबंकी जिला अस्पताल में इलाज के दौरान गणेश ने दम तोड़ दिया। वहीं, कलावती की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें लखनऊ के लोहिया अस्पताल भेजा गया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था; वहां उपचार के दौरान उनकी भी सांसें थम गईं। दंपति की असामयिक और दर्दनाक मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। बेटा पवन और बेटी गीता, जो अब अपने-अपने घरों के हो चुके हैं, माता-पिता को एक साथ खोने के गम में डूबे हुए हैं।
अनसुलझा सवाल: आखिर क्यों चुना मौत का रास्ता?
इस आत्मघाती कदम के पीछे की असली वजह अभी तक रहस्य बनी हुई है। हालांकि गांव में दबी जुबान में लोग बुजुर्गों के अकेलेपन और बेटे से अलग रहने के दर्द को कारण मान रहे हैं, लेकिन आधिकारिक तौर पर कोई भी कुछ बोलने को तैयार नहीं है। क्या यह किसी तात्कालिक विवाद का परिणाम था या फिर लंबे समय से मन में पल रहा कोई अवसाद? यह सवाल अब भी हर किसी की जुबान पर है। पुलिस मामले की जांच कर रही है, लेकिन सधवापुर गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा है और हर कोई इसी बात पर दुखी है कि जीवन की संध्या में इस दंपति को इतना बड़ा कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा।
लेखक के बारे में
Yogesh Yadavयोगेश यादव लाइव हिन्दुस्तान में पिछले छह वर्षों से यूपी की राजनीति, क्राइम और करेंट अफेयर से जुड़ी खबरों को देख रहे हैं। यूपी में हो रहे विकास कार्यों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे बदलाव के साथ यहां की मूलभूत समस्याओं पर गहरी नजर रखते हैं। पत्रकारिता में 25 वर्षों का लंबा अनुभव रखने वाले योगेश ने डिजिटल से पहले प्रिंट में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। लम्बे समय तक वाराणसी में सिटी और पूर्वांचल के नौ जिलों की अपकंट्री टीम को लीड किया है। प्रयागराज हिन्दुस्तान को लांच कराने वाली टीम में शामिल रहे। सिटी टीम का नेतृत्व भी किया। बीकॉम में ग्रेजुएट और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट योगेश ने कई स्पेशल प्रोजेक्ट पर रिपोर्टिंग भी की है। राष्ट्रीय नेताओं के दौरों को कवर करते हुए उनके इंटरव्यू किये। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े रहस्यों पर हिन्दुस्तान के लिए सीरीज भी लिख चुके हैं।
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