ईरान-अमेरिका युद्ध की गूंज कानपुर तक पहुंची; 600 करोड़ पर संकट, टेंशन में व्यापारी
ईरान-अमेरिका तनाव का असर कानपुर के निर्यात कारोबार पर पड़ा है। खाड़ी देशों ने शिपमेंट रोकने के संकेत दिए हैं। लेदर, गारमेंट और इंजीनियरिंग सेक्टर प्रभावित हो सकते हैं। लंबे तनाव से करोड़ों के कारोबार पर संकट मंडरा रहा है।

ईरान-अमेरिका जंग की गूंज कानपुर के औद्योगिक गलियारों में जैसे ही पहुंची माहौल बदल गया। जाजमऊ की टेनरियों में पैक होकर खड़ा चमड़ा, पनकी की इकाइयों में तैयार इंजीनियरिंग सामान और रेडीमेड गारमेंट के कंटेनर सब अचानक अनिश्चितता की गिरफ्त में आ गए। दुबई, ओमान, कतर, बहरीन, यूएई और कुवैत जैसे खाड़ी देशों से जुड़े निर्यातकों के पास एहतियाती संदेश आने लगे “शिपमेंट रोकिए, हालात साफ होने दीजिए”।
खाड़ी क्षेत्र कानपुर और यूपी के निर्यात का बड़ा सहारा है। ऐसे में वहां बैंकिंग लेनदेन, बीमा कवर और समुद्री मार्गों को लेकर बढ़ी आशंका ने व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है। कानपुर के लेदर, गारमेंट, इंजीनियरिंग, एग्री प्रोडक्ट, हैंडीक्राफ्ट और इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर सीधे तौर पर प्रभावित होते दिख रहे हैं। आकलन है कि यदि तनाव लंबा खिंचा तो कानपुर का 600 करोड़ व यूपी के 2500 करोड़ रुपये के कारोबार पर आफत आएगी। शहर के निर्यातकों ने हिन्दुस्तान से खुलकर बात की।
खाड़ी देश हमारे लिए रीढ़ की हड्डी
चमड़ा निर्यात परिषद के रीजनल चेयरमैन असद इराकी कहते हैं कि खाड़ी देशों के बाजार हमारे लिए रीढ़ की हड्डी जैसे हैं। जंग शुरू होते ही दुबई और यूएई के खरीदारों ने नई शिपमेंट पर रोक लगाने को कहा है। बैंकिंग ट्रांजैक्शन और बीमा कवर को लेकर भी असमंजस है। हालात जल्दी नहीं सुधरे तो उत्पादन घटाना पड़ सकता है।
लंबी छिड़ी जंग तो बड़ा नुकसान
टेक्सटाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के यूपी चेयरमैन बलराम नरूला कहते हैं कि रेडीमेड गारमेंट का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों को जाता है। आज सुबह तक सब सामान्य था, लेकिन दोपहर बाद ऑर्डर ‘होल्ड’ पर डाल दिए गए। सीजनल माल है, देर हुई तो नुकसान तय है। भरोसा है कि हालात जल्द सामान्य होंगे।
मालभाड़ा सबसे ज्यादा प्रभावित
आईएए के राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष आलोक अग्रवाल कहते हैं कि मौजूदा स्थिति बेहद गंभीर है। जंग से शिपिंग रूट और मालभाड़ा सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। अगर फ्रेट और इंश्योरेंस महंगा हुआ तो छोटे निर्यातकों का मार्जिन खत्म हो जाएगा। सरकार को त्वरित सपोर्ट देना चाहिए। पेट्रोल की कीमतें भी और बढ़ने का डर है। सरकार को त्वरित सपोर्ट देना चाहिए। पेट्रोल कीमतें भी और बढ़ने का डर है।
स्थिति का त्वरित समाधान जरूरी
भारतीय निर्यात परिषद के सहायक निदेशक आलोक श्रीवास्तव कहते हैं कि ईरान-अमेरिका जंग से समूचे खाड़ी देशों से कारोबार दांव पर हैं। वहां हमारे चावल और हैंडीक्राफ्ट की नियमित मांग रहती है। कानपुर के छह सौ करोड़ तो यूपी के 2500 करोड़ के व्यापार पर संकट है। जंग लंबी खिंची तो भुगतान चक्र धीमा पड़ा तो नकदी संकट खड़ा होगा। सबसे ज्यादा चिंता मजदूरों की रोजी-रोटी को लेकर है।
सुबह तक सामान्य कारोबार कर रहे निर्यातकों को दोपहर बाद अचानक बदले हालातों से जूझना पड़ा। खाड़ी देशों से एक संदेश बार-बार आया कि नई डील अभी रोकिए, शिपमेंट की तारीख आगे बढ़ाइए। इससे निर्यातकों की परेशानियां झटके में बढ़ गईं। निर्यातकों का कहना है कि समुद्री मार्गों पर जोखिम की आशंका से मालभाड़ा और प्रीमियम बढ़ सकते हैं, जिसका सीधा असर लागत पर पड़ेगा।
भविष्य में इन बड़े संकट का खतरा
ऑर्डर कैंसिलेशन और बाजार खोने का खतरा
भुगतान चक्र में लंबी देरी, नकदी संकट गहराएगा
मालभाड़ा और बीमा प्रीमियम में भारी वृद्धि का डर
कच्चे माल, ईंधन महंगाई का दबाव, रोजगार पर असर
क्यों अहमियत है खाड़ी देशों की जानिए
दुबई, यूएई, कतर, ओमान, कुवैत में भारतीय उत्पादों की लगातार मांग
कानपुर का चमड़ा और फुटवियर खाड़ी में स्थापित ब्रांड वैल्यू रखता
भारतीय परिधान, किफायती और मध्यम वर्ग के कपड़ों की मजबूत खपत
चावल, मसाले और अन्य कृषि उत्पादों की खाड़ी में नियमित मांग रहती
बड़ी भारतीय आबादी होने से भारतीय उत्पादों की मांग हमेशा बनी रहती



