Hindi NewsUP NewsEarlier I too was a non-vegetarian In Kashi, Vice President Radhakrishnan explained how he became a vegetarian
पहले मैं भी मांसाहारी था…, काशी में उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने बताया कैसे शाकाहारी हो गए

पहले मैं भी मांसाहारी था…, काशी में उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने बताया कैसे शाकाहारी हो गए

संक्षेप: उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन शुक्रवार को काशी पहुंचे थे। यहां उन्होंने काशी नाटकोट्टाई संस्था की धर्मशाला का उद्घाटन किया। इस दौरान एक रहस्योद्घाटन किया। उन्होंने बताया कि मेरी तरह लाखों लोगों के जीवन में काशी आकर बदलाव आया है। बताया कि पहले मैं भी मांसाहारी था। काशी आने के बाद ही शाकाहारी हुआ था।

Fri, 31 Oct 2025 11:04 PMYogesh Yadav वाराणसी, विशेष संवाददाता।
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उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में थे। उन्होंने यहां श्रीकाशी नाट्टुकोट्टई नगर क्षेत्रम में नवनिर्मित 10 मंजिली धर्मशाला भवन का उद्घाटन किया। इस दौरान अपने संबोधन में एक रहस्योद्घाटन किया। कहा कि आज से 25 वर्ष पूर्व काशी ने मेरे विचार और संस्कार बदल दिए थे। यहां दिव्य ज्योति और ऊर्जा है। जिसकी वजह से मेरी तरह लाखों जीवन यहां आने के बाद बदल गए। यहां से उप राष्ट्रपति मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ श्री काशी विश्वनाथ मंदिर जाकर शांति, समृद्धि और सभी की भलाई के लिए प्रार्थना की। उन्होंने मंदिर परिसर में स्थित अन्नपूर्णी अम्मन देवी मंदिर में भी पूजा-अर्चना की। इस दौरान उप राष्ट्रपति श्री काशी विश्वनाथ धाम की भव्यता को देख अभिभूत दिखे।

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उपराष्ट्रपति बनने के बाद पहली बार सीपी राधाकृष्णन चार घंटे के अल्पप्रवास पर काशी पहुंचे थे। उन्होंने 60 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित धर्मशाला का उद्घाटन करने के बाद श्रीकाशी नाट्टुकोट्टई नगर क्षेत्रम समिति से जुड़े तमिलनाडु, अमेरिका सहित विश्व के विभिन्न देशों से पहुंचे नागरथर समुदाय के लोगों को संबोधित किया।

काशी और गंगा स्नान ने बदल दिया जीवन

उन्होंने कहा कि धर्म को कुछ समय के लिए संकट हो सकता है, लेकिन वह कभी स्थायी नहीं होता। धर्म की विजय हुई है, यह इमारत उसी की साक्षी है। उन्होंने अपने जीवन से जुड़े प्रसंग को सुनाते हुए बताया कि वर्ष 2000 में मैं पहली बार काशी आया था। तब परिवारजन के साथ बाबा विश्वनाथ, मां विशालाक्षी सहित कई अन्य मंदिरों में दर्शन-पूजन किया। गंगास्नान भी किया। तब मैं मांसाहारी था। लेकिन यहां से जाने के बाद मेरे जीवन में इतना परिवर्तन आया कि मैंने शाकाहार अपना लिया। यह परिवर्तन स्वाभाविक नहीं, बल्कि विशेष कृपा की वजह से सम्भव था।

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काशी में उपराष्ट्रपति और सीएम योगी

11 वर्षों में पूरी तरह बदल गई काशी

उपराष्ट्रपति ने बताया कि मैं 2014 में दोबारा बनारस आया था। तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनाव प्रचार के लिए पहुंचा था। मैं तमिलभाषी हूं। टूटी-फूटी हिंदी आती है। यहां जनसम्पर्क कर रहा था। इसी दौरान एक हिंदी भाषी नागरिक ने कहा कि ‘आप तमिलनाडु से प्रचार करने आये हैं तो आपको जरूर वोट दूंगा, लेकिन यहां कुछ नहीं बदलने वाला है।’ लेकिन इन 11 वर्षों में यहां अद्भुत बदलाव हुए है, जो अचम्भित करने वाले हैं। काशी पूरी तरह बदल गई है। 25 साल पहले की काशी और आज की काशी में जमीन-आसमान का अंतर है। यह परिवर्तन केवल दो कर्मयोगियों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कारण संभव हुआ है।

देश में निवेश का सबसे उत्तम स्थल यूपीः योगी

वाराणसी। उपराष्ट्रपति के साथ काशी आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने काशी नाट्टुकोट्टई नगर क्षेत्रम के धर्मशाला के उद्घाटन में आये तमिलनाडु और दुनियाभर से अतिथि और इन्वेस्टर्स से कहा कि देश में निवेश का सबसे उत्तम स्थल यूपी है। उन्होंने आश्वस्त किया कि उनकी हर मदद के लिए प्रदेश सरकार स्वागत में खड़ी रहेगी।

काशी में उपराष्ट्रपति और सीएम योगी

सिगरा स्थित धर्मशाला के उद्घाटन समारोह में शुक्रवार को उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन के साथ पहुंचे योगी ने ‘वणक्कम काशी’ से संबोधन को शुरू करते हुए कहा कि काशी में गंगा से लेकर तमिलनाडु की कावेरी नदी तक हमारी साझी परंपरा याद दिलाती है कि भाषाएं भले ही अलग हों, भारत की आत्मा एक ही है जो शाश्वत समावेशी और अटूट है। उन्होंने कहा, जो समिति 200 साल से भगवान विश्वनाथ की पूजा अराधना में समर्पित रही है, आज उसने देश और दुनिया में तमिल समुदाय के लोगों के लिए यहां धर्मशाला का निर्माण किया है।

काशी और तमिलनाडु के बीच प्राचीन सांस्कृतिक संबंध

मुख्यमंत्री ने कहा कि ये सुखद संयोग है कि यूपी की इस यात्रा में उपराष्ट्रपति बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी और प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में पधारे हैं। श्रीकाशी नाट्टुकोट्टई नगर क्षेत्रम मैनेजिंग सोसाइटी की ओर से निर्मित धर्मशाला का उद्घाटन उपराष्ट्रपति द्वारा हुआ है। यहां श्रद्धालुओं को रहने की सुविधा उपलब्ध होगी साथ ही काशी और तमिलनाडु के प्राचीन सांस्कृतिक संबंध भी सुदृढ़ होंगे।