ईरान-इजराइल जंग के बीच ईद पर नदारद रहेगी दुबई के इत्र की नायाब खुशबू, माल की डिलिवरी नहीं
ईरान-इजराइल जंग के बीच ईद पर दुबई के इत्र की नायाब खुशबू नदारद रहेगी। इसे लेकर कारोबारियों के माथे पर भी शिकन है। पहले बुक किए आर्डर अब तक नहीं पहुंचे हैं।

UP News: गुजरता रमजान ईद की खुशियों को करीब ला रहा है। अबकी ईद पर इबादत के जज्बे के बीच अपनों के जज्बात तकसीम किए जाएंगे लेकिन इनके बीच हमेशा की तरह दुबई के इत्र की नायाब खुशबू नदारद होगी। ऐसा ईरान युद्ध के कारण होगा। इसे लेकर कारोबारियों के माथे पर भी शिकन है। पहले बुक किए आर्डर अब तक नहीं पहुंचे हैं। इसके दीगर मांग में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। शिपमेंट और फ्लाइटों की आवाजाही रुकने से करोड़ों के माल की डिलिवरी नहीं हो सकी है। जिनके पास पुराना माल है वह चुनिंदा ग्राहकों को उपलब्ध करा रहे हैं। हालांकि दाम भी बढ़ा दिये गए हैं।
बनारस में इत्र के करीब 50 बड़े कारोबारी हैं। खास यह कि पूर्वांचल में इत्र के कारोबार का हब भी बनारस ही है। लेकिन रमजान में इनकी करीब खपत बढ़ जाती है। कारोबारी बताते हैं कि रमजान में 40 करोड़ रुपये का कारोबार बनारस में इत्र का होता है।
यूं तो मुंबई, सूरत, कन्नौज सहित अन्य शहरों से भी इत्र मंगाए जाते हैं। लेकिन रमजान में खाड़ी देशों में बनने वाले इत्र की मांग ज्यादा ही होती है। जन्नतुल फिरदौस, रोमांस और मदीना जैसे कई ब्रांड सहज ही लोगों को आकर्षित करते हैं। लेकिन ईरान संकट के कारण इस बार रोजेदारों को इनसे मायूस होना पड़ सकता है।
30 हजार तक का है दस ग्राम इत्र: इत्र कारोबारी सैय्यद वली अहमद ने कहा कि बनारस सहित पूर्वांचल के हर घर में मजमुआ इत्र का उपयोग सर्वाधिक होता है। मुस्क, अंबर, शबाब की भी खूब मांग होती है। उन्होंने बताया कि दस ग्राम गिलाफ-ए-काबा इत्र पांच हजार रुपये, दस ग्राम उद इत्र 30 हजार और दस ग्राम देहनल उद इत्र की कीमत दस हजार रुपये है। वैसे हमलोग भारत के इत्र पर ज्यादा निर्भर हैं। कई इत्र तो दूसरे देशों में भी भेजा जाता है।
रमजान में खुशबू का महत्व: रमजान में इत्र लगाना पैगंबर मुहम्मद की सुन्नत और स्वच्छता का प्रतीक माना जाता है। नमाज़, विशेषकर तरावीह से पहले और रोजे के दौरान ताजगी महसूस करने के लिए इत्र का उपयोग किया जाता है।
दालमंडी के मोहम्मद फहीम ने बताया कि ईरान , अमेरिका-इजराइल युद्ध से खाड़ी देशों में शिपमेंट, फ्लाइट संचालन प्रभावित होने से ऑर्डर होने के बाद भी इत्र नहीं आए हैं। मुंबई, सूरत सहित देश के अन्य शहरों से इत्र मंगाए जा रहे हैं।
दालमंडी के रियाज अहमद ने बताया कि शब-ए-बारात के समय हम इत्र ऑर्डर कर देते हैं। लेकिन इस बार दालमंडी में तोड़फोड़ के कारण रमजान में ऑर्डर किया गया। लेकिन अब युद्ध शुरू होने के कारण समस्या हो गई।
लेखक के बारे में
Deep Pandeyदीप नरायन पांडेय लाइव हिन्दुस्तान में पिछले आठ सालों से यूपी की खबरें करते हैं। डिजिटल, टीवी और प्रिंट जर्नलिज्म में 15 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले दीप नरायन पांडेय वरिष्ठ पत्रकार हैं। दीप अब डिजिटल मीडिया के जाने माने नाम बन गए हैं। दीप हिंदी भाषा की डिजिटल पत्रकारिता के नए आयामों को बेहतर समझते हैं। यूपी की राजनीति के साथ क्राइम की खबरों पर अच्छी पकड़ है। सामाजिक, इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यटन, शिक्षा और हेल्थ पर भी लिखते हैं। दीप पाठकों की पसंद को समझने और उसी तरह से न्पूज प्रस्तुत करने में माहिर हैं। दीप सरल भाषा में खबरों को पाठकों तक पहुंचाते हैं। खबर लिखने के अलावा साहित्य पढ़ने-लिखने में भी रुचि रखते हैं। मास कम्युनिकेशन में बीए और एमए दीप नरायन पांडेय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गोंडा के रहने वाले हैं। दीप ने पत्रकारिता की शुरुवात लखनऊ से की। टीवी चैनल से करियर का आगाज करने वाले दीप इसके बाद प्रिंट अमर उजाला लखनऊ में भी रहे। हिन्दुस्तान प्रिंट में वाराणसी, गोरखपुर, फिर लखनऊ में कार्य के दौरान विभिन्न जिलों के डेस्क इंचार्ज रहे हैं। यूपी विधानसभा चुनाव 2012, 2017, 2022, लोकसभा चुनाव, पंचायत चुनावों के दौरान बेहतर कवरेज कर चुके हैं।
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