
बागपत, बलिया, बिजनौर समेत यूपी के दस शहरों में घर-घर मेडिकल सर्वे, क्या है मंशा
यूपी के बागपत, बलिया, बिजनौर समेत दस शहरों में मेडिकल टीमें घर-घर जाकर परिवारों का सर्वे करेंगी। लखनऊ में पांच वरिष्ठ चिकित्सकों, स्वास्थ्य कर्मियों की टीम बनाई गई है। सर्वे के लिए 340 क्लस्टर बनाए गए हैं।
कोविड-19 ने केवल शरीर ही नहीं, बल्कि देश के करोड़ों लोगों के दिमाग और मन पर भी गहरा प्रहार किया है। अवसाद, घबराहट, अनिद्रा, नशे की लत और आत्महत्या जैसे खतरनाक संकेत तेजी से बढ़े हैं, लेकिन सरकारी दावे अधूरे आंकड़ों पर टिके हैं। अब इन्हीं दावों की सच्चाई परखने के लिए राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण-2 की शुरुआत की जा रही है, जिसमें उत्तर प्रदेश के 10 जिलों में घर-घर जाकर लोगों के मानसिक हालात की जांच होगी। बागपत, बलिया, बिजनौर के साथ राजधानी लखनऊ भी इस अहम सर्वे का हिस्सा बनेगा।
10 साल बाद फिर शुरू हुआ राष्ट्रीय स्तर का मानसिक सर्वे
देश में इससे पहले 2014-16 के बीच पहली बार राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण किया गया था, जिसमें चौंकाने वाला खुलासा हुआ था कि भारत में हर सातवां व्यक्ति किसी न किसी मानसिक बीमारी से जूझ रहा है।अब लगभग 10 साल बाद, कोविड जैसी वैश्विक महामारी के बाद बदले हालात को समझने के लिए यह दूसरा सर्वे कराया जा रहा है।
कौन करा रहा है सर्वे, कौन करेगा अमल
केंद्र सरकार का स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय यह सर्वे नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंस बेंग्लुरू के सहयोग से करा रहा है। उत्तर प्रदेश में इसकी कार्यान्वयन एजेंसी किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के मानसिक रोग विभाग को बनाया गया है। प्रशिक्षित टीमें चयनित जिलों में जाकर सीधे लोगों से साक्षात्कार करेंगी। जिलाधिकारी विशाख जी ने लखनऊ नगर निगम को पत्र भेज कर इस सर्वे में पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया है।
रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार बनाएगी नीतियां
सर्वे से मिलने वाले आंकड़ों के आधार पर केंद्र और राज्य सरकार मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों, डॉक्टरों की तैनाती, अस्पतालों और हेल्पलाइन जैसी योजनाओं को मजबूत करने का काम करेगी।
इन जिलों के लोगों के मानसिक स्वास्थ्य का होगा सर्वे
सर्वे लखनऊ के अलावा अलीगढ़, अमेठी, बागपत, बलिया, बिजनौर, कानपुर, खीरी, ललितपुर, मिर्जापुर, सिद्धार्थ नगर में होगा। लखनऊ में पांच वरिष्ठ चिकित्सकों स्वास्थ्य कर्मियों की टीम बनाई गई है। जिनकी निगरानी में पूरा सर्वे होगा। सर्वे के लिए 340 क्लस्टर बनाए गए हैं। युवाओं के साथ 10 वर्ष प्लस के बच्चों का भी सर्वे होगा। सर्वे का डाटा पूरी तरह गोपनीय रहेगा।
सर्वे में खासतौर पर इस पर फोकस होगा
डिप्रेशन और एंग्जायटी, लगातार उदासी, डर, बेचैनी
अनिद्रा और तनाव, नींद न आना, चिड़चिड़ापन
सिजोफ्रेनिया, बाइपोलर डिसऑर्डर
शराब, तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थ का सेवन
किशोरों का मानसिक स्वास्थ्य, व्यवहारिक बदलाव
आत्महत्या के विचार और मिर्गी जैसे मामले

लेखक के बारे में
Yogesh Yadavयोगेश यादव हिन्दुस्तान में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर हैं।
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