कुत्ते, बिल्ली और बकरे को चढ़ाना पड़ रहा है पानी, भीषण गर्मी में बेजुबानों को ड्रिप लगाने की नौबत
मेरठ में भीषण गर्मी से बकरे, कुत्ते और बिल्लियां बीमार पड़ रहे हैं। पशु अस्पतालों में मरीजों की संख्या तीन गुना बढ़ गई है। बकरों में न्यूमोनिया, डिहाइड्रेशन और हीटस्ट्रोक के मामले बढ़े हैं। कई बकरों को ड्रिप तक लगानी पड़ रही है।

भीषण गर्मी का सीधा असर पालतू जानवरों बकरे, बिल्ली और कुत्ते पर भी पड़ रहा है। लू, डिहाइड्रेशन, उल्टी-दस्त, हीटस्ट्रोक और न्यूमोनिया जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। गर्मियों में इन मूक जानवरों के बीमार होने पर लोग उन्हें उपचार दिलाने के लिए पशु अस्पताल पहुंच रहे है। लाइव हिन्दुस्तान टीम मेरठ से सलीम अहमद ने ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर राजकीय पशु अस्पताल सूरजकुंड पहुंचकर हालात देखे तो बकरे, बिल्ली और डॉग का उपचार कराने वालों की लाइन टूट नहीं रही। बकरों को तो ड्रिप तक लगानी पड़ रही है। कुछ ऐसा ही हाल बिल्ली और पालतू डॉगी का भी हाल है। आम दिनों के मुकाबले बीमार पालतू जानवरों के पशु अस्पताल पहुंचे की संख्या में तीन गुना से भी ज्यादा बढ़ गई है।
भीषण गर्मी में कुत्ते-बिल्ली-बकरे हो रहे बीमार
ईद उल अजहा के मौके पर कुर्बानी के लिए खरीदे जा रहे बकरों में से ज्यादातर के बीमार होने को लेकर लोग परेशान हैं। इन बकरों को लोग भीषण गर्मी में पैठ से खरीदकर ला रहे हैं। घर लाते ही उन्हें एसी, कूलर के सामने रख रहे हैं। उन्हें पानी पिलाने से लेकर चारा आदि खिला रहे हैं। बकरे न्यूमोनिया का शिकार हो रहे हैं सूरजकुंड स्थित राजकीय पशु अस्पताल में बीमार पशुओं में सर्वाधिक संख्या बकरों की है। कुर्बानी के त्योहार ईद-उल-अजहा के लिए बकरों की खरीद हो रही है। गर्मी में पशु पैठ से लाकर बकरों को लोग कूलर-एसी में रखने के साथ ही उनकी देखभाल के साथ चारा आदि पूरी क्षमता के साथ खाना खिला रहे है।
पशु अस्पताल में पालतू जानवरों की लाइन
पशु चिकित्सक बताते है कि बकरों में बुखार आदि की शिकायत है। पेट फुला हुआ होने से दस्त आदि का भी शिकार हो रहे है। बताते है कि बकरे बेचने वाले बकरों को मोटा-तंदुरूस्त दिखाने के लिए मक्का आदि खिलाकर उन्हें पानी पिला देते है। ऐसे में बकरे का पेट फूल जाता है। गर्मी का असर घरों में पालतू जानवरों पर भी पड़ रहा है। बिल्लियां एवं डॉग की राजकीय पशु अस्पताल की ओपीडी में काफी संख्या में पहुंच रहे है। बकरे लेकर आने वालों का क्रम नहीं टूट रहा। बकरे में न्यमोनिया एक गंभीर श्वसन संक्रमण है, जो फेफड़ों में सूजन पैदा करता है। यह अक्सर बैक्टीरिया (जैसे पास्चुरेला), वायरस या खराब प्रबंधन के कारण होता है। इसमें बकरे को सांस लेने में बहुत तकलीफ होती है और सही समय पर इलाज न मिलने पर उसकी जान भी जा सकती है।
ऐसे लक्षण दिखे तो तुरंत चिकित्सक से करें संपर्क
उपमुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. महिमा चौधरी कहती है कि अगर जानवर बहुत हांफ रहा है, लार टपका रहा है उल्टी कर रहा है और खाना-पीना छोड़ दिया है या बेहोश हो रहा है, तो यह हीटस्ट्रोक के लक्षण हो सकते हैं। ऐसे में तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। डिप्टी सीवीओ डॉ. जनार्दन बताते है कि पालतू जानवरों को छायादार और हवादार जगह पर रखें। बकरों को हरा चारा और संतुलित आहार दें। कुत्तों और बिल्लियों को भारी भोजन (जैसे ज्यादा मीट) की जगह हल्का और सुपाच्य खाना दें।
ठंडक वाली जगहों में जानवरों को रखें
चीफ फार्मेसिस्ट डॉ. विपुल कुमार कहते है कि कुत्ते मुख्य रूप से जीभ बाहर निकालकर सांस तेज करके शरीर की गर्मी कम करते हैं, जबकि बिल्लियां अपेक्षाकृत शांत रहती हैं, लेकिन गर्मी से उतनी ही प्रभावित होती हैं। यदि समय रहते ध्यान न दिया जाए तो गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। वरिष्ठ वन्य जीव एवं पशु चिकित्सक डॉ. आरके सिंह कहते है कि जंगल में जानवर भीषण गर्मी में ठंडक वाले स्थान तलााश कर लेते हैं, लेकिन यदि जंगल से बाहर निकल जाए तो भीषण गर्मी में वह बीमार पड़ सकता है। कभी-कभी आबादी में पहुंचने पर मानव-वन्य जीव के बीच संघर्ष की घटनाएं हो जाती हैं।
बीमार बकरों के लिए कैंप लगा
पशु पालन विभाग की ओर से हापुड़ रोड स्थित पुराना कमेला स्थित नाला रोड पर लगी बकरा पैठ में शिविर लगाया गया है। बीमार बकरों की जांच करके शिविर में ही उपचार दिया जा रहा है। उपमुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. महिमा चौधरी ने बताया कि हापुड़ रोड पर पशु पैठ में पशुओं के स्वास्थ्य की जांच के लिए पशुपालन विभाग की ओर से विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाया हैं, जहां बीमार बकरों को तत्काल चिकित्सा और दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं। हालांकि लोग बीमार बकरों को लेकर सूरजकुंड स्थित राजकीय पशु अस्पताल भी पहुंच रहे है। जिनका उपचार कराया जा रहा है। शिविर में डॉक्टरों की टीम द्वारा बकरों में अफारा (पेट फूलना), दस्त, निमोनिया, या खुर की बीमारी (फुट रॉट) जैसे लक्षणों की जाँच की जाती है। इसके अलावा पशुपालकों को मौसमी बीमारियों से बचाव, संतुलित खुराक और नियमित टीकाकरण की सलाह दी जाती है।
हीटस्ट्रोक (लू) और डिहाइड्रेशन से बचाव
पर्याप्त पानी
इनके पीने के बर्तन में हमेशा साफ और ठंडा पानी रखें। पानी को बार-बार बदलें ताकि वह गर्म न हो।
ओआरएस और ग्लूकोज
अगर जानवर सुस्त लग रहा है तो उसे पशु चिकित्सक की सलाह पर पानी में ओआरएस या ग्लूकोज मिलाकर दें।
फलों का रस
डॉगी या बिल्ली को नारियल पानी या तरबूज (बीज निकालकर) दे सकते हैं, जो शरीर में पानी की कमी पूरी करते हैं।
साफ-सफाई और नियमित नहलाएं
कुत्तों को मौसम के अनुसार नहलाएं। बकरों को भी साफ पानी से स्पंज करें या नहलाएं। बिल्ली को पानी से डर लगता है, इसलिए उन्हें गीले तौलिये से पोंछ सकते हैं।


